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आज UPI बेहद सफल है, शुरुआत में इसको लेकर भी सवाल उठे थे. लेकिन देश में अब UPI को यूज करने वालों की बड़ी संख्या है. दरअसल, अब ONDC की तुलना UPI की जा रही है. कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में ONDC भी UPI की तरह ही सफलता के झंडे गाड़ने वाला साबित होगा. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी ओएनडीसी की खूब चर्चा हो रही है.
आज हम आपको ONDC के हर पहलु के बारे में बताएंगे, क्या सही में ई-कॉमर्स सेक्टर में क्रांति आने वाली है? ऑनलाइन शॉपिंग में लोगों के ढेर सारे पैसे बचने वाले हैं? ONDC के आने से Flipkart-Amazon का क्या होगा? कहा तो ये भी जा रहा है कि Zomato और Swiggy को भी तगड़ा झटका लगने वाला है, तो आइए ONDC से जुड़े हर सवाल का जवाब तलाशते हैं.
सबसे पहले जानते हैं, ONDC क्या है?
ओएनडीसी का फुल फॉर्म (Open Network For Digital Commerce) है. ये कोई ऐप नहीं है, यानी ये फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसा बिल्कुल नहीं है. फिर आखिर ये है क्या? दरअसल, ये एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो विक्रेता और ग्राहक दोनों को मिलाता है. आप कहेंगे फिर फ्लिपकार्ट और इसमें क्या अंतर है, वहां भी तमाम सेलर और ग्राहक होते हैं?
एक उदाहरण से समझते हैं... मान लीजिए कि आपको एक AC खरीदना है, जो फ्लिपकार्ट पर 30 हजार रुपये में मिल रहा है, ये आपने फ्लिपकार्ट ऐप को ओपन कर देखा है. फिर आपके मन में सवाल आया, क्या ये कहीं और 30 हजार रुपये से कम में भी मिल रहा है? उसके बाद आपने अमेजन के ऐप पर विजिट किया, जहां उसी AC की कीमत 31000 रुपये है. फिर आपने Jio Mart App खोला, वहां उसी AC की कीमत 29500 रुपये है. ऐसे में आपको इसका बेस्ट प्राइस सर्च करने के लिए तमाम ई-कॉमर्स कंपनियों की वेबसाइट पर जाकर देखना पड़ता है. लेकिन ONDC यही काम चुटकी में कर देगा, यानी सिंगल विंडो में सबकुछ मिलेगा.
दरअसल, ONDC पर आपको एक साथ सभी सेलर दिखेंगे, यानी आपको तमाम App पर जाकर नहीं देखना होगा. जब एक ही जगह सभी सेलर होंगे, तो कौन सबसे सस्ता दे रहा है, इसका चयन करना हर ग्राहक के लिए आसान हो जाएगा.
कैसे मिलेगा ONDC पर सामान सस्ता?
अब सवाल उठता है कि फिर खाना सस्ता कैसे मिलेगा? क्योंकि सोशल मीडिया पर खूब चल रहा है कि सरकारी प्लेटफॉर्म ONDC पर 283 रुपये का बर्गर महज 110 रुपये में उपलब्ध है. इसके अलावा दावा किया जा रहा है कि मोमोज के लिए जहां दूसरी ई-कॉमर्स कंपनियों पर 170 रुपये तक खर्च करना पड़ता है, वहीं ओएनडीसी पर यह महज 85 रुपये में ही उपलब्ध है. आखिर प्राइस में इतना फर्क कैसे?
इसके पीछे का गणित बेहद सरल है. Zomato और Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म का ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेगमेंट में मोनोपॉली है. ये कंपनियां मन-मुताबिक चार्ज वसूलती हैं. कुछ रेस्टोरेंट को भी मजबूरी में इनके साथ पार्टनरशिप करना पड़ती है. फिलहाल, जब आप Zomato और Swiggy से फूड ऑर्डर करते हैं, तो ये कंपनियां तमाम तरह की चार्ज बिल में जोड़ती हैं. लेकिन सरकारी प्लेटफॉर्म के साथ ऐसा नहीं होना वाला है. क्योंकि ONDC एक नॉन-प्रॉफिट ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, यानी इसे मुनाफा कमाने के मकसद से नहीं बनाया गया है.
बता दें, भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की पहल के तहत ONDC को डेवलप किया गया है. इसलिए इसमें कमीशन का तगड़ा खेल नहीं है. जबकि स्विगी या जोमैटो पर कुल बिल में करीब 30 फीसदी तक कमीशन जुड़ा होता है, यानी ONDC से ऑर्डर करने पर ये बचत तय है.
ONDC कैसे करता है काम?
इसके अलावा आने वाले दिनों में डिलीवरी और बेहतर होने की उम्मीद है. खासकर प्रोडक्ट क्वालिटी को लेकर ग्राहकों की शिकायतें कम हो जाएंगी. क्योंकि ONDC प्रणाली जियोग्राफिक इनफॉरमेशन सिस्टम (GIS) पर काम करती है. लाखों विक्रेताओं और करोड़ों उपभोक्ताओं को उनके वास्तविक लोकेशन के आधार पर सुविधाएं मुहैया कराती है.
उदाहरण के लिए अगर कोई ग्राहक घर बैठे किसी रेस्टोरेंस से खाना या किसी दुकान से किराने का सामान मंगवाना चाहता है, तो ओएनडीसी प्लेटफॉर्म उसे आस-पास के सभी रेस्टोरेंस और किराने की दुकान को विकल्प के तौर पर दिखाएगा. ग्राहक अपनी सहूलियत से यहां अपना प्रोडक्ट्स और डिवीलरी एजेंट चुन पाएगा. क्योंकि इसी प्लेटफॉर्म पर तमाम डिलीवरी कंपनियां भी पंजीकृत रहेंगी. यही नहीं, ग्राहक ने अगर किसी रेस्टोरेंट से खाना ऑर्डर किया तो उसे ये भी चुनने की आजादी होगी कि वो किस डिलीवरी पार्टनर से ये खाना घर तक मंगवाना चाहता है.
सबसे खास बात ये है कि छोटे-छोटे रेस्टोरेंट और किराना दुकानदार भी ONDC पर मौजूद होंगे. ONDC को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि अगर आप एक किलोमीटर के दायरे में स्थित किसी रेस्टोरेंस को ONDC के जरिये खाना ऑर्डर करते हैं, तो वो बिना डिलीवरी एजेंट की मदद से भी खुद ग्राहक के घर तक खाना डिलीवर करा सकता है. इसमें वो अपने स्टाफ की मदद ले सकता है. क्योंकि ग्राहक और रेस्टोरेंट के बीच की दूरी महज कुछ किलोमीटर है. ऐसे में थर्ड पार्टी डिलीवरी एजेंट के नहीं होने से प्रोडक्ट यानी खाने की कीमत बेहद कम हो जाएगी. प्रयोग के तौर पर खुद रेस्टोरेंट सस्ते में इस प्लेटफॉर्म के जरिये खाना डिलीवर कर सकता है. यह फॉर्मूल ग्रोसरी और दूसरे प्रोडक्ट्स पर भी लागू होते हैं.
यही नहीं, इस प्लेटफॉर्म पर मौजूद सेलर को भी पता होगा कि सबसे सस्ता प्रोडक्ट्स कौन बेच रहा है. ऐसे में कम कमीशन पर सेल बढ़ाने की होड़ होगी, जिससे ग्राहकों को फायदा होने वाला है. साथ ही ओएनडीसी ई-कॉमर्स को प्लेटफार्मों के एकाधिकार से मुक्त कराएगी, इससे कम्पीटिशन को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि अभी भी लोगों में ओएनडीसी को लेकर जागरुकता कम है.
बता दें भारत में पिछले एक दशक के दौरान ई-कॉमर्स (ऑनलाइन व्यवसाय) तेजी से फैला है. इसके बावजूद देश में कुल खुदरा व्यापार का महज 6.5 फीसदी ई-कॉमर्स के जरिए होता है.
ओएनडीसी के फायदे
ओएनडीसी सामान्य ई-कॉमर्स कंपनियों से अलग है. अभी तक सामान्य ई-कॉमर्स में विक्रेता और सेवा प्रदाताओं को प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कराना होता था, इसलिए वे उन प्लेटफार्मों पर निर्भर होते हैं. ऐसे में उपभोक्ता प्लेटफॉर्म पर केवल उन्हीं विक्रेताओं को देख पाते हैं, जो उस पर रजिस्टर्ड होते हैं. ओएनडीसी ऐसी प्रणाली है, जिसमें विभिन्न प्लेटफॉर्मों को ही पंजीकरण की सुविधा प्रदान की जाती है. लेकिन ONDC की शर्त है कि इनमें से किसी भी प्लेटफॉर्म पर जिन वेंडरों या सेवा प्रदाताओं ने खुद को पंजीकृत कराया है, उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली वस्तुएं और सेवाएं ओएनडीसी पर आने वाले सभी ग्राहकों को दिखाई देंगी.
इसके अलावा यह प्लेटफॉर्म छोटे खुदरा विक्रेताओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से मदद करेगा. यह सुविधा छोटे खुदरा विक्रेताओं को बड़ी कंपनियों के साथ काम करने के अवसर भी मुहैया कराएगी. ओएनडीसी, दरअसल यूपीआई भुगतान सुविधा की तरह ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए एक सुविधा है. यह खरीदारों और विक्रेताओं को एक खुले नेटवर्क के जरिये डिजिटल रूप से किसी भी ऐप या मंच पर लेन-देन करने में सक्षम बनाएगा. इससे अलावा छोटे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म विज्ञापन पर भारी खर्च किए बिना उपभोक्ताओं तक पहुंच सकते हैं.
फिलहाल ONDC अभी देश के 180 शहरों में ऑपरेशनल है. इसके एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य नंदन नीलेकणि हैं और वे इसका भविष्य बेहद सफल बता रहे हैं. इस ओपन नेटवर्क पर खरीदारी करने वाले लोगों के पास कई सेलर्स से सामान खरीदने का विकल्प होगा.
बहुत आसान है रजिस्टर कराना
ONDC जितना आसान ग्राहक के लिए है, उतना ही दुकानदार के लिए भी रजिस्टर करना है. केवल ONDC प्लेटफॉर्म पर सेलर को अपना एक अकाउंट क्रिएट करना होता है. उसके बाद जितनी कैटेगरी में बिजनेस करना है, उसे सेलेक्ट करना होगा. फिर सेलर के पास जो भी प्रोडक्ट्स उसे अपलोड करना होगा, यानी उसकी जानकारी देनी होगी, और फिर शुरू हो जाएगा ऑर्डर आने का काम. हालांकि छोटे दुकानदार शुरुआत में चाहें तो बड़े वेंडर से जुड़कर अपने कारोबार को बढ़ा सकते हैं. क्योंकि ओएनडीसी प्लेटफॉर्म सेलर नेटवर्क, बायर नेटवर्क और डिलीवरी नेटवर्क पार्टनर्स को एक दूसरे से कनेक्ट करता है.
फिलहाल कहां है ONDC प्लेटफॉर्म?
फिलहाल प्रयोग के तौर आप Paytm पर जाकर ONDC पर क्या-क्या प्रोडक्ट्स और सेवाएं मिल रही हैं, उन्हें देख सकते हैं. आपको पेटीएम पर जाकर ONDC सर्च करना होगा और स्क्रॉल करते हुए नीचे आना होगा. यहां आपको ONDC स्टोर और कई दूसरे ऑप्शन नजर आएंगे. यहीं आपको ग्रॉसरी, फूड और क्लीनिंग एसेंशियल का भी ऑप्शन मिलेगा.
अगर आप फूड ऑर्डर करना चाहते हैं, तो आपको ONDC Food पर जाना होगा. यहां आपको रेस्टोरेंट्स का ऑप्शन मिलेगा, जहां से आप अपने लिए कुछ भी ऑर्डर कर सकते हैं. मौजूदा समय में ONDC प्लेटफॉर्म बीटा फेज में है, इसलिए इसे कुछ ही जगहों पर एक्सेस किया जा सकता है. इसका बीटा वर्जन बैंगलोर और दिल्ली में लाइव कर दिया गया है. ये ऐप 236 शहरों में अल्फा फेज (शुरुआती चरण में) है.