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कोरोना

लखनऊ: ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ कोरोना पॉजिटिव बुजुर्ग पिता को लेकर घूमता रहा बेटा, नहीं मिली अस्पताल में जगह

आशीष श्रीवास्तव
  • लखनऊ,
  • 15 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 1:19 PM IST
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कोरोना का कहर दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है, बड़ी संख्या में हो रही मौतों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. लखनऊ में एक ऐसी ही घटना सामने आई, जहां पर 70 साल के कोरोना मरीज को लेकर उनके परिजन कार में ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ इधर- उधर अस्पतालों के चक्कर काटते रहे,  लेकिन उन्हें किसी भी अस्पताल में बेड नहीं मिला. जिसकी वजह से उन्हें घर वापस लौटना पड़ा. 

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जानकारी के मुताबिक लखनऊ के अलीगंज में रहने वाले बुजुर्ग सुशील कुमार श्रीवास्तव शुगर और  बीपी के मरीज है. बुधवार को उन्हें अचानक सांस लेने में दिक्कत होने लगी.  परिजन उन्हे तुरंत ही विवेकानंद अस्पताल लेकर गए.  इस अस्पताल में बुजुर्ग का रेगुलर इलाज होता है. लेकिन डॉक्टरों ने कोविड-19 जांच के बिना उन्हें देखने से मना कर दिया. इस दौरान बुजुर्ग का ऑक्सीजन लेवल गिरता रहा.  बावजूद इसके अस्पताल के डॉक्टर उन्हे देखने के लिए तैयार नहीं हुए.  फिर ट्रू नेट मशीन के द्वारा बुजुर्ग की कोविड की जांच की गई जिसमें वो कोरोना पॉजिटिव निकले. 

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परिजनों ने उन्हें अस्पताल में एडमिट करने की बात कही लेकिन डॉक्टरों ने बेड न होने का हवाला देकर दूसरे अस्पताल जाने को कहा. बेटा ऑक्सीजन सिलेंडर कार में रखकर बुजुर्ग पिता को शहर के हर अस्पताल में  इलाज के लिए घूमता रहा. फोन पर डॉक्टरों से मिन्नतें भी मांगी पर कहीं से कोई मदद नहीं मिली. इस दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने लगा फिर तालकटोरा स्थित ऑक्सीजन सेंटर से मोटी रकम खर्च कर दूसरा ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदा. 

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वहीं बुजुर्ग के पुत्र आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि उनके पिता को बुधवार शाम से सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी. इसलिए वो रेगुलर चेकअप के लिए विवेकानंद अस्पताल लेकर गए थे. लेकिन वहां पर डॉक्टरों ने उन्हें बिना कोरोना जांच के देखने से मना कर दिया था. फिर टू नेट मशीन के द्वारा तुरंत 2 घंटे में पिताजी की रिपोर्ट आई जो पॉजिटिव थी. लेकिन उनका ऑक्सीजन लेवल गिरता रहा. अस्पताल से कहीं कोई मदद न मिलने से बाजार से दूसरा सिलेंडर खरीदकर लगाया.   

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इसके अलावा उन्होंने बताया कि उनके पिता की हालत बहुत खराब थी. डॉक्टरों को काफी रिक्वेस्ट भी की गई. लेकिन वो बेड न होने का हवाला देकर टरकाते रहे. फिलहाल हम घर पर ही उनकी देखभाल कर रहे हैं. जिले के कई अस्पताल गए लेकिन किसी उन्हें एडमिट नहीं किया. इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है. 

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