कोरोना वायरस से जंग लड़ने में राजस्थान का भीलवाड़ा जिला मिसाल बन गया है. ये सब मुमकीन हुआ सोशल डिस्टेंसिंग को सफलतापूर्वक लागू करने से. राजस्थान के भीलवाड़ा जैसे छोटे से जिले ने जो कर दिखाया उसकी चर्चा आज हर जगह है. इस मॉडल को सफल बनाने के लिए राजस्थान की सरकार और प्रशासन ने उम्दा काम किए हैं. ऐसे में भीलवाड़ा की IAS टीना डाबी की चर्चा हो रही है. आइए जानते हैं भीलवाड़ा कैसे दुनिया के लिए मिसाल बन गया.
टीना डाबी को IAS ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 2018 में भीलवाड़ा के एसडीएम (सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट) पद पर
नियुक्त किया गया था. वह कोरोना प्रकोप पर काबू पाने वाली टीम में शामिल हैं.
जयपुर से लगभग 250 किलोमीटर दूर भीलवाड़ा पहले कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा था. जिसके बाद ‘निर्मम नियंत्रण’
(ruthless containmen model) की रणनीति को अपनाया गया. जिसमें कर्फ्यू-लॉकडाउन के सख्त नियम शामिल हैं.
टीना डाबी से जब एक इंटरव्यू में पूछा गया कि भीलवाड़ा प्रशासन ने कोरोना को कैसे मात दी?
इस सवाल पर IAS ऑफिसर ने बताया, 'पहले इस जगह को कोरोना हॉटस्पॉट बताया जा रहा था. यहां तक कि इसकी तुलना इटली से की जा रही थी. जो शर्मनाक बात है'.
टीना ने बताया, सबसे पहले टीम ने भीलवाड़ा के लोगों को आइसोलेट किया गया. उनका विश्वास जीतने की कोशिश की. ताकि उनमें हिम्मत बनी रहे. वहीं लोगों ने भी अधिकारियों द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना शुरू कर दिया था.
टीना ने बताया, 19 मार्च को हमें पहला कोरोना पॉजिटिव केस मिला. इस बीच हमने पाया कि एक प्राइवेट हॉस्पिटल इस संकट का मुख्य केंद्र हो सकता है.
फिर पाया गया कि बृजेश बंगाल मेमोरियल हॉस्पिटल के कुछ डॉक्टर और स्टाफ कोरोना से पीड़ित हैं. जिसके बाद जिला प्रशासन ने पूरी तरह से भीलवाड़ा को बंद करने का फैसला किया.
टीना ने बताया, देश में लॉकडाउन लागू होने से पहले ही भीलवाड़ा के कलेक्टर राजेंद्र भट्ट ने बहुत कठोर और दृढ़ फैसला लिया कि हमें कर्फ्यू लगा देना चाहिए. जिसके बाद दो घंटे के भीतर कर्फ्यू और पूरी तरह से शटडाउन का सख्त फैसला लिया गया. आदेश पारित होने के बाद टीम ने पूरे शहर का दौरा किया और सब कुछ बंद करवा दिया.
इस समस्या से जूझने के लिए लोगों से आग्रह किया गया और उन्हें घर में रहने के लिए समझाया गया. वहीं लोगों को पूरी तरह से भरोसे में लिया गया. कई लोगों को डांटना भी पड़ा था, लेकिन टीम लोगों की भलाई के लिए दिन रात काम में लगी थी.
इसी के साथ टीम ने एक दो दिन के भीतर दूध, फल, सब्जियों जैसी खाद्य सामाग्री का डोर टू डोर सप्लाई करने का बंदोबस्त कर दिया था. ताकि लोग किसी भी प्रकार से घबराएं नहीं.
आपको बता दें, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा ने 18 अप्रैल 2020 को कहा कि भीलवाड़ा जिले में कई दिनों से कोरोना वायरस संक्रमण का कोई नया मामला नहीं आया है, जबकि जयपुर के रामगंज इलाके में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है. ये जिले के लिए अच्छी खबर है.
टीना ने बताया कि शुरुआत के तीन-चार दिन में शहर और जिले से लोगों के पैनिक कॉल आ रहे थे. टीम को बहुत सी चीजों से निपटना था. अब हमेशा गर्व रहेगा कि हम राष्ट्रीय सेवा कर रहे हैं.
भीलवाड़ा में स्थिति संभालने पर टीना ने कहा, चुनौतीपूर्ण कार्य जीवन भर के अवसरों में से एक होता है. मुझे गर्व है मैं इसका हिस्सा हूं. मैं गर्व महसूस कर रही हूं कि इस संकट की घड़ी में हमारी टीम इतने लोगों की सेवा करने में सक्षम साबित हुई है.
टीना ने कहा, यह चुनौतीपुर्ण स्थिति है. इस संकट के समय जो अनुभव हासिल कर रही हूं वो मेरे पूरे करियर में बहुत काम आएगा. आज मैं उन लोगों के काम आ रही हूं जिन्हें मेरी सबसे ज्यादा जरूरत है.
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