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कोरोना

Coronavirus: WHO से बिल गेट्स तक, पाकिस्तान की कर रहे फर्जी तारीफ?

aajtak.in
  • 15 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 7:58 AM IST
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कोरोना वायरस को नियंत्रित करने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पिछले हफ्ते ही पाकिस्तान की खूब पीठ थपथपाई थी. WHO प्रमुख टेड्रोस अधनोम का कहना था कि कोरोना से मुकाबले की रणनीति पूरी दुनिया को पाकिस्तान से सीखने चाहिए. पाकिस्तान में महामारी के नियंत्रण को लेकर बिल गेट्स भी हैरान थे. हालांकि इन सबके पीछे एक वाजिब सवाल ये भी उठता है कि आखिर पाकिस्तान में अचानक ऐसा संभव कैसे हुआ. क्या वाकई पाकिस्तान की सरकार ने ऐसे कदम उठाए जिससे कोरोना कंट्रोल हुआ या ये किसी चमत्कार की तरह अपने आप काबू में आ गया?

Photo: Reuters

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पाकिस्तान में 15 जून के बाद से ही कोरोना वायरस का ग्राफ लगातार नीचे गिरता जा रहा है. हालांकि, पाकिस्तान में कोरोना वायरस की महामारी थमने के पीछे तमाम बेतुके तर्क दिए जा रहे हैं. ये बात पूरी तरह से साफ है कि इसके पीछे पाकिस्तान सरकार की कोई व्यवस्थित योजना नहीं थी और यहां के हर प्रांत का अपना एक अलग दृष्टिकोण था. ना तो यहां बड़े पैमाने पर टेस्टिंग हुई और जो टेस्टिंग हुईं, उनकी रिपोर्ट आने में भी काफी समय लगा. बड़ी संख्या में बीमार पड़े लोगों की जान बचाने के लिए भी देश में कोई एडवांस मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं थी. पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने देश में पूरी तरह से लॉकडाउन भी लागू नहीं किया था.

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अब भले ही सरकार जोर देकर अपनी नीतियों का डंका पीट रही हो, लेकिन सच तो यही है कि कोरोना को कंट्रोल करने के लिए बनाई गई गाइडलाइन (SOPs) को लागू करने के लिए पाकिस्तान की सरकार पूरी तरह विफल रही है. बड़े राजनीतिक दलों के नेताओं ने खुद देशवासियों के मास्क ना पहनने पर अफसोस जताया. पंजाब प्रांत की स्वास्थ्य मंत्री डॉ. यासमीन रशीद ने खुद आग बबूला होकर लाहौर के लोगों को 'अज्ञानी और मूर्ख' तक कह दिया. लाहौर पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है.

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हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज भी वायरल हुए हैं, जो सबूत हैं कि पाकिस्तान में कभी SOPs फॉलो ही नहीं किए गए. यहां जिंदगी उतनी ही आम थी जैसे महामारी के दौर से पहले हुआ करती थी. सड़कों पर लोगों की भीड़ इकट्ठा रहती थी. ग्राउंड में बच्चे क्रिकेट खेलते दिखते थे. नमाजी शान से जुम्मे की नमाज पढ़ने जाते रहे. और जब इतने से भी काम नहीं चला तो सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा बंद किए शॉपिंग मॉल्स को फिर से खोलने का फरमान सुना दिया.

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पाकिस्तान के पत्रकार शहजाद खान ने देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में अचानक आई कमी के पीछे का कारण उजागर किया है. शहजाद ने नया दौर नाम की वेबसाइट में लिखा है, 'पाकिस्तान में कोरोना के मामले इसलिए घट रहे हैं, क्योंकि लोगों को संक्रमित करने के लिए यहां वायरस को कोई मिल ही नहीं रहा है. देश की बड़ी आवाम जो कोरोना संक्रमित थी, वो अब इम्यूनिटी डेवलप कर चुकी है. दूसरा, गर्म तापमान ने भी कोरोना से जंग में पाकिस्तान का साथ दिया है.'

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उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान के स्वाबी शहर में बसा मेरा गांव खुद ग्रामीण क्षेत्रों में SOPs लागू ना होने का एक छोटा सा उदाहरण है. मेरा गांव टोरधर कोई अलग नहीं है. यहां किसी ने प्रोटोकॉल या सोशल डिस्टेंसिंग जैसी चीजें नहीं देखी. वायरस यहां आया और कई लोग बीमार पड़े. कुछ मरीजों की हालत तो बेहद गंभीर थी. इसके बावजूद यहां सिर्फ एक शख्स की मौत हुई, जो पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित था.'

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शहजाद ने बताया कि अब यहां सब रिकवर हो चुके हैं और सामान्य जिंदगी में वापस लौट रहे हैं. वो अभी भी किसी तरह के SOPs फॉलो नहीं कर रहे हैं. आज यहां कोरोना से जुड़ी बीमारी का नामोनिशान नहीं है. ये अपने आप में कोरोना वायरस के हारने जैसा है. पाकिस्तान में अब तक सिर्फ तीन लाख से ज्यादा कोरोना के मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें एक्टिव केस सिर्फ साढ़े पांच हजार बताए जा रहे हैं. देश में कोरोना से अब तक सिर्फ 6,389 मौत हुई हैं.

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पाकिस्तान में कोरोना का डेथ रेट भी काफी कम है. कहा जा रहा है कि गंदगी और मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों की इम्युनिटी बेहतर कर दी है. पश्चिमी देशों की तरह पाकिस्तान में लोगों के पास पानी को साफ करने का एक्सेस नहीं है और ना ही 'बेस्ट हाइजीन प्रैक्टिस' में उनकी भागीदारी है. जाहिर है कि इससे लोगों का इम्यून अच्छा रहता है, जो शरीर को कोरोना वायरस से लड़ने में मदद करता है.

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पाकिस्तानी पत्रकार ने लिखा है, 'शायद मैं अपना उदाहरण देकर इसे बेहतर समझा सकता हूं. मैं अमेरिका में रहता था, लेकिन जब मैं वापस पाकिस्तान आया तो अपने गांव का पानी नहीं पीता था. मुझे लगता था इससे मैं बीमार हो जाउंगा. लेकिन निश्चित रूप से स्थानीय लोग इसे पीते हैं और बीमार भी नहीं पड़ते हैं. फिर मैंने यहां का पानी पीना शुरू किया और मेरी सेहत एकदम ठीक है.

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शहजाद खान ने लिखा है, स्पष्ट रूप से कहूं तो मेरा इम्यून सिस्टम अमेरिका में रहते हुए उतना बेहतर नहीं था, जितना पाकिस्तान में रहने के बाद हो गया है. पाकिस्तान में कुछ स्ट्रीट फूड तो हाइजीन के नाम पर मजाक करते हैं. हालांकि यहां के लोगों ने इसे भी अपना लिया है और ऐसा करने पर वे बीमार भी नहीं होते हैं.' बता दें कि पाकिस्तान में अचानक आए इस बदलाव पर अभी तक हेल्थ एक्सपर्ट, भविष्यवक्ता और यहां तक कि सरकार के खुद के एक्सपर्ट एकमत नहीं हो पाए हैं.

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महामारी की बड़ी मार झेलने वाले खैबर पख्तून प्रांत के एक अधिकारी ने हाल ही में कहा था कि मौसम के बदलते मिजाज के कारण पाक में कोरोना सुस्त पड़ा है. उन्होंने कहा कि यहां ह्यूमिडिटी का लेवल 86 डिग्री तक पहुंच चुका है और तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है. वायरस के सुस्त पड़ने का यह भी एक बड़ा कारण है. उन्होंने बताया कि 'एसिम्प्टोमैटिक इंफेक्शन' की संख्या बढ़ने से कम्यूनिटी के बीच हर्ड इम्यूनिटी का लोकल वर्जन तैयार हुआ, जिससे मामलों में गिरावट आई.

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इसके अलावा विटामिन-डी और सूर्य की किरणों के संपर्क में आने से सेहत को फायदा पहुंचा है. ये दोनों ही एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन से शरीर का बचाव करते हैं. शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम जनसंख्या घनत्व है. पाकिस्तान में किसी तरह का सब-वे सिस्टम नहीं है. यहां के सिनेमा और थिएटर भी अपनी एक्टिविटी को लेकर फेमस नहीं हैं. यहां के बाशिंदे आमतौर पर घर से काम और काम से घर की एक सीधी रेखा पर चलते हैं. यहां डोमेस्टिक टूरिज्म भी पूरी तरह से विकसित नहीं है.

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बता दें कि WHO प्रमुख ने हाल ही में कोरोना से निपटने के लिए पूरी दुनिया को पाकिस्तान से सीखने की सलाह दी थी. WHO के प्रमुख ने अपने बयान में कोरोना से जंग में पाकिस्तान सरकार की नीतियों का समर्थन किया था, जहां कोविड-19 से निपटने के लिए वर्षों पहले बनाए गए पोलियो के बुनियादी ढांचे का ही सहारा लिया गया है.

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इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर और दुनिया के सबसे अमीर इंसान बिल गेट्स ने कहा था कि महामारी से लड़ने में पाकिस्तान की कोई तुलना नहीं है. सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, 'भारत और यूरोप से तुलना करें तो पाकिस्तान ने कोरोना से बेहतर जंग की है. पाकिस्तान ने अपनी उत्कृष्ट विशेषज्ञता की बदौलत यह सफलता हासिल की है.' पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान खुद कोरोना को काबू करने को लेकर अपनी सरकार की सराहना कर चुके हैं. हालांकि, वो ये समझाने में नाकाम रहे हैं कि उनकी सरकार ने कोरोना को कंट्रोल करने के लिए क्या कदम उठाए हैं?

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