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सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा- भारतीयों को सबसे पहले मिलेगी हमारी कोरोना वैक्सीन

aajtak.in
  • 24 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 12:58 PM IST
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भारत में कोरोना से जूझ रहे लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है. वैक्सीन बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी ने कहा है कि भारत में सबसे पहले वैक्सीन देने पर वो काम कर रही है. उसका लक्ष्य इसी बात पर है कि कैसे हम भारत में सबसे पहले वैक्सीन दें. आपको बता दें कि ये कंपनी भारत की ही है. यहां दुनिया की सबसे ज्यादा वैक्सीन का उत्पादन होता है. 

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सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India - SII) के चीफ एग्जीक्यूटिव अदार पूनावाला (Adar Poonawalla) ने कहा है कि उनकी कंपनी का फोकस है कि एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) की वैक्सीन सबसे पहले भारत में दें. उसके बाद दुनिया के अन्य देशों में सप्लाई करें. सीरम इंस्टीट्यूट एस्ट्राजेनेका दवा कंपनी की वैक्सीन का उत्पादन भारत में कर रही है. 

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अदार पूनावाला ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि हम पहले अपने देश की चिंता करें. उसके बाद हम कोवैक्स (Covax) फैसिलिटी पर जाएं, फिर बाकी समझौतों औऱ डील्स की बात करें. इसलिए मेरी प्राथमिकता सूची में सबसे पहले भारत और भारत के लोग हैं. कोवैक्स फैसिलिटी दुनिया के गरीब देशों के लिए वैक्सीन देने की एक जगह तय की जा रही है.

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अदार ने बताया कि हम भारत सरकार से बात कर रहे हैं कि वो वैक्सीन खरीदे. SII के पास साल 2021 की पहली तिमाही तक इतनी वैक्सीन हो जाएगी कि वो भारत के बाजारों में वैक्सीन बेंच सकती है. अदार पूनावाला का बयान एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) दवा कंपनी के उस बयान के थोड़ी देर बाद आया, जिसमें दवा कंपनी ने दावा किया कि उनकी दवा कोरोना को रोकने में 90 फीसदी प्रभावी है. 

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एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) ने ये भी दावा किया है कि उनकी वैक्सीन दुनिया की सबसे सस्ती, सुरक्षित और सक्षम वैक्सीन है. कंपनी ने कहा कि उनके पास इसके सस्ते उत्पादन और सहज वितरण की पूरी नीति तैयार है. अब सीरम इंस्टीट्यूट और एस्ट्राजेनेका साल के अंत में सरकार में पास अर्जी देंगे कि उन्हें उनकी वैक्सीन का आपातकालीन उपयोग करने की अनुमति दी जाए. 

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अदार पूनावाला की माने तो अगले साल फरवरी-मार्च तक उनकी वैक्सीन बाजार में आ जाएगी. उन्होंने बताया कि उनके वैक्सीन के एक डो़ज की कीमत करीब एक हजार रुपए आएगी. अगर सरकार बड़े पैमाने पर सप्लाई के लिए कहेगी तो कीमत कम भी हो सकती है. ये तय करेगा कि कंपनी को कितनी दवा के सप्लाई का आदेश मिलता है. 

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पूनावाला ने कहा कि SII के पास ये अधिकार है कि वह पांच दर्जन से ज्यादा देशों के साथ सीधे वैक्सीन को लेकर समझौता कर ले. ये वो एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) से हुए समझौते के तहत कर सकता है. अदार का दावा है कि SII अपने भारतीय यूनिट से एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) के वैक्सीन की 40 करोड़ डोज जुलाई 2021 तक सप्लाई कर सकता है. 

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कुछ महीनों पहले भी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) के प्रमुख अदार पूनावाला ने कहा था कि इस वैक्सीन का आधा उत्पादन भारत के मरीजों को मिलेगा. उन्होंने कहा था कि ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों के साथ 500 डो़ज हर मिनट बनाने की तैयारी है. मुझे दुनिया भर के राष्ट्रध्यक्षों, राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और हेल्थ मिनिस्टर्स के फोन आ चुके हैं. सभी वैक्सीन का पहला बैच मांग रहे हैं. मेरे पास लगातार फोन आ रहे हैं. कई लोगों को तो मैं जानता तक नहीं.  

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अदार ने कहा कि ट्रायल सफल होने की स्थिति में हम भारत में 50 करोड़ से अधिक वैक्सीन उपलब्ध कराएंगे. वैक्सीन डिजाइन करने वाली कंपनियों का कहना है कि अगर ट्रायल सफल होता है तो उन्हें सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की फैक्ट्रियों की जरूरत पड़ेगी. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया वैक्सीन बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है. यहां हर साल दूसरी वैक्सीन की डेढ़ अरब डोज बनती हैं. जो गरीब देशों में भेजी जाती हैं. दुनिया के आधे बच्चों को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की वैक्सीन लगाई जाती है. 

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कुछ दिन पहले ही कंपनी ने 60 करोड़ ग्लास के वायल मंगवाए थे. अदार पूनावाला कहते हैं कि उनके ऊपर बहुत दबाव है. कई देशों से मांग की जा रही है वैक्सीन के पहले बैच की. लेकिन वो पूरी कोशिश करेंगे कि 50 फीसदी डोज भारत में रहे. बाकी 50 फीसदी डोज अन्य देशों में दी जाए. अदार कहते हैं कि हमारा फोकस गरीब देशों पर होगा. वैक्सीन को बनाने की प्रक्रिया 6 माह से चल रही है. हम इसे जल्द खत्म करना चाहते हैं. ऑक्सफोर्ड के साथ प्रमुख भागीदार एस्ट्राजेनेका है. उसने अमेरिका, यूरोप और अन्य स्थानों पर वैक्सीन बनाने के लिए 7500 करोड़ रुपए से ज्यादा का करार किया है. 

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