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कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने मलेरिया बुखार के इलाज में काम आने वाली दवा के इस्तेमाल को मंजूरी दी है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने (आईसीएमआर) द्वारा गठित नेशनल टास्क फोर्स ने मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सी-क्लोरोक्वीन को कोविड-19 के इलाज के लिए मंजूरी दी है.
हाइड्रॉक्सी-क्लोरोक्वीन से कोरोना का इलाज
स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि उन्होंने ये एडवाइजरी उन लोगों के लिए जारी की है जो संदिग्ध या पुष्ट कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे हैं. आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव ने कहा कि कोरोना वायरस के संदिग्ध या पुष्ट मामलों को देख रहे स्वास्थ्यकर्मियों और पुष्ट मरीजों के संपर्क में अति जोखिम वाले लोगों को हाइड्रॉक्सी-क्लोरोक्वीन दी जानी चाहिए.
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सीमित मात्रा में ही करें इस्तेमाल
नेशनल टास्क फोर्स द्वारा सिफारिश की गई इस ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल को भारत के महा औषधि नियंत्रक ने भी मंजूरी दी है. हालांकि इस दवा का इस्तेमाल अभी आपात परिस्थिति में सीमित मात्रा में ही किया जाएगा.
बच्चों के लिए नहीं है दवा
इस दवा की अनुशंसा 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं की गई है. इसके अलावा आंख की समस्या से जूझ रहे लोगों को भी इस दवा का इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया है. परामर्श के मुताबिक सिर्फ पंजीकृत चिकित्सा पेशेवर के निर्देश पर ही यह दवा दी जानी चाहिए.
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दवा के इस्तेमाल में ये सावधानी बरती जानी चाहिए कि पहले 400 मिलीग्राम की दवा दिन में दो बार ली जाएगी. इसके बाद 400 मिलीग्राम सप्ताह में एक बार 7 हफ्तों तक लिया जाएगा. हालांकि कुछ डॉक्टरों का मत है कि बिना डॉक्टर की इजाजत के ये दावा लेनी खतरनाक साबित हो सकती है.