
चीन में कोरोना की अब तक की सबसे बड़ी लहर आई है. संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. मौतें भी खूब हो रहीं हैं. हालांकि, चीन कोरोना को लेकर जो आंकड़े दे रहा है, वो वहां के हालातों के ठीक उलट हैं.
चीन के नेशनल हेल्थ कमिशन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 21 दिसंबर को देशभर में 3,030 नए मामले सामने आए और किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई. इन तीन हजार मामलों में से 64 विदेशी थे और बाकी स्थानीय थे.
हालांकि, चीन के इन आंकड़ों पर सवाल उठ रहे हैं. उसकी वजह ये है कि वहां के अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने की जगह नहीं है. दवाएं भी नहीं मिल रहीं हैं. श्मशानों के बाहर कतारें खड़ी हैं. चीन के इन आंकड़ों पर सवाल उठना इसलिए भी लाजमी है क्योंकि वहां की सरकार आंकड़े छिपाने के लिए जानी जाती है.
चीन में कहां-कहां बढ़ रहा कोरोना?
नेशनल हेल्थ कमिशन के मुताबिक, चीन में सबसे ज्यादा तबाही गुआंगडोंग प्रांत में है. यहां 1300 से ज्यादा मामले सामने आए हैं.
दूसरे नंबर पर बीजिंग है जहां 470 से ज्यादा मामले सामने आए. शंघाई में 47 मामले ही सामने आने की बात चीन ने कही है.
इनके इनके अलावा चोंगक्विंग, फुजियान, युनान, हुनान, सिचुआन, तियांजिन, शांक्सी, हेनान, जियांग्शी, झेजियांग, हुबेई, जियांग्सु, शैंगडोंग समेत कई प्रांतों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं.
'सही आंकड़े दिखाए चीन'
जानकारों का मानना है कि महामारी जैसे हालात में आंकड़े छिपाना और खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे बीमारी की गंभीरता का सही आकलन लगा पाना मुश्किल हो जाता है, जिसका नतीजा लोगों को भुगतना पड़ता है.
पर इसके बावजूद चीन सही आंकड़े कभी नहीं देता है. अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि चीन में इस वक्त कैसी स्थिति है, इसका डेटा दुनिया से साझा करना चाहिए.
इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी सही आंकड़े नहीं दिखाने पर चिंता जताई थी. WHO के इमरजेंसी चीफ डॉ. माइकल रेयान ने कहा था कि चीन में कोरोना के कम केस रिपोर्ट हो रहे हैं, लेकिन वहां अस्पतालों में आईसीयू भरे पड़े हैं.
चीन में कैसे हैं हालात?
बहुत बुरे. वहां से जो रिपोर्ट्स आ रहीं हैं वो चीन में कोरोना से बिगड़े हालातों को बयां करती हैं. चीन की मीडिया रिपोर्ट्स में ही कहा जा रहा है कि हालात बिगड़ते जा रहे हैं, अस्पतालों में डॉक्टरों तो क्या स्टाफ की भी कमी है.
अस्पतालों में भीड़ इतनी बढ़ गई है कि अब लोगों को घर पर ही इलाज करने की सलाह दी जा रही है. वहां के स्वास्थ्य अधिकारी अपील कर रहे हैं कि संक्रमित होने पर घर पर ही आइसोलेट हो जाएं और फ्लू या दूसरी दवाओं से इलाज करें.
चीन में दवाओं की भी किल्लत होने लगी है. हालांकि, इसकी वजह ये भी है कि जीरो कोविड पॉलिसी हटने के बाद लोगों ने पहले ही दवा की जमाखोरी कर ली थी. ऐसे में अब भारत की ओर से भी दवाई भेजी जाएगी.
ऐसा ही हाल श्मशानों का भी है. लोग मर रहे हैं, लेकिन उनके अंतिम संस्कार की जगह नहीं है. लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है.
चीन में बदले कोविड डेथ के नियम
पूरी दुनिया में ये नियम है कि अगर कोई व्यक्ति कोरोना से संक्रमित होता है और उसकी मौत हो जाती है तो उसे कोविड से हुई मौत ही माना जाएगा. पर चीन में ठीक इसके उलट है.
चीन के नेशनल हेल्थ कमिशन ने हाल ही में कोविड डेथ को लेकर नई गाइडलाइन जारी की थी. इसके मुताबिक, कोविड डेथ उसे ही माना जाएगा जब मरीज की मौत सांस की बीमारी से होगी.
ये गाइडलाइन कहती है कि अगर कोई मरीज डायबिटीज, कैंसर, हार्ट या ब्रेन से जुड़ी किसी बीमारी से पीड़ित है और कोरोना संक्रमित होने के बाद उसकी मौत हो जाती है तो इसे कोविड डेथ नहीं माना जाएगा.
चीन में आने वाली हैं तीन लहरें
चीन के महामारी विशेषज्ञ वू जुन्यो का कहना है कि चीन में तीन महीने में तीन लहरें आ सकतीं हैं. उन्होंने दावा किया कि चीन अभी पहली लहर का सामना कर रहा है और इसका पीक मिड-जनवरी में आ सकता है.
उन्होंने कहा कि 21 जनवरी से चीन का लूनार न्यू ईयर भी शुरू हो रहा है और इस वजह से लोग ट्रैवल करेंगे, जिस कारण दूसरी लहर शुरू होगी. इस दौरान लाखों लोग ट्रैवलिंग करते हैं. इसलिए जनवरी के आखिर से दूसरी लहर शुरू हो सकती है जो मिड-फरवरी तक चलेगी.
जबकि, तीसरी लहर फरवरी के आखिर से शुरू होने का अंदेशा है. वू जुन्यो का कहना है कि हॉलीडे के बाद लोग फिर से ट्रैवल करेंगे और इस कारण तीसरी लहर शुरू हो सकती है. तीसरी लहर फरवरी के आखिर से मिड-मार्च तक चल सकती है.
हाल ही में अमेरिका के एक रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि 2023 में चीन में कोरोना विस्फोट हो सकता है और अगले साल 10 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो सकती है.