
भारतीय विदेश मंत्रालय आज 64 देशों के विदेश मिशनों के प्रमुखों को लेकर भारत बायोटेक और बायोलॉजिकल ई पहुंचा है. ये दोनों कंपनियां कोरोना वैक्सीन 'कोवैक्सीन' पर काम कर रही है. राजनयिकों को वैक्सीन पर काम कर रहे वैज्ञानिकों की ओर से अब तक हुई प्रगति के बारे में बताया जा रहा है.
भारत बायोटेक उन तीन कंपनियों में शामिल हैं, जिन्होंने भारत सरकार से आपातकालीन इस्तेमाल के लिए कोरोना वैक्सीन की मंजूरी मांगी है. भारत बायोटेक के अलावा सीरम इंस्टिट्यूट और फाइजर इंडिया ने भी सरकार को आवेदन दिया. भारत बायोटेक के टीके का तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है, जिसमें 25 हजार वॉलंटियर्स शामिल हैं.
वहीं, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कंपनी ने ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई वैक्सीनके इस्तेमाल की अनुमति मांगी है. कंपनी ने वैक्सीन को लोगों के हित में और चिकित्सा जरूरतों की पर्याप्त पूर्ति नहीं होने का हवाला देते हुए अनुमति देने का आग्रह किया है.
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आईसीएमआर के मुताबिक, इंस्टीट्यूट इस वैक्सीन की 4 करोड़ खुराक पहले ही निर्मित कर चुका है और डीसीजीआई से इसे स्टोर करने का लाइसेंस भी ले चुका है. कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा था कि पुणे स्थित SII भारत को पहले वैक्सीन देने को लेकर ध्यान केंद्रित करेगी.
इधर, फाइजर इंडिया को भारत में आपातकालीन स्थिति में कोरोना वैक्सीन इस्तेमाल करने की अनुमति मिल गई है. भारत में कोरोना वैक्सीन के लिए आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण के डीसीजीआई से मंजूरी मिलने के बाद यह देश की पहली दवा फर्म बन गई है ,जो अब कोरोना वैक्सीन का आधिकारिक तौर पर इस्तेमाल कर सकती है.