
उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जिले महाराजगंज का हाल चौंकाने वाला है. यहां कोरोना की दूसरी लहर का असर अब दिखने लगा है. कोरोना संक्रमण के केसों में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है. इसी जिले के निराला गांव में 30 लोग संक्रमित पाए गए, तो वहीं दूसरे गांवों की स्थिति भी अच्छी नहीं है.
महाराजगंज जिले के महादेवा गांव में तीन लोग संक्रमित पाए गए, जिनमें एक की मौत हो गई. गांव में कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया है और अब यहां प्रशासन की ओर से पूरे गांव की एंटीजन रैपिड टेस्टिंग की जा रही है. सिर्फ टेस्टिंग ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से पूरे गांव को आयुष दवाइयों की किट और काढ़ा भी मुहैया करवाया जा रहा है, ताकि लोग बुखार, सर्दी जुकाम जैसी बीमारियों से सुरक्षित रह सकें.
गांव में सुबह से दोपहर तक जितने लोगों ने टेस्ट करवाया, उनमें से कोई भी संक्रमित नहीं निकला. महाराजगंज के एसडीएम राजेश जायसवाल का कहना है, "जिस गांव में संक्रमित मरीज मिले हैं या किसी की कोरोना वायरस से मौत हुई है, वहां कंटेनमेंट जोन घोषित किया जा रहा है. टेस्टिंग के साथ-साथ सैनिटाइजेशन की व्यवस्था और दवाइयों का वितरण किया जा रहा है." वहीं स्वास्थ्य कर्मी डॉक्टर यामिनी त्रिपाठी का कहना है कि जो लोग महामारी के लक्षण से प्रभावित हैं उनके लिए काढ़ा और आयुष किट दी जा रही है, जिसमें पांच दवाइयों का मिश्रण है, जो सर्दी बुखार जुखाम जैसी बीमारियों के लिए कारगर है और कोरोना से बचाव में मददगार है. तीन संक्रमित मरीज और एक व्यक्ति की कोविड-19 से मृत्यु के बाद प्रशासन ने गांव में कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया है.
जिला पंचायत और ग्राम सभा प्रशासन की ओर से गांव में घर-घर सैनिटाइजेशन भी करवाया जा रहा है. सैनिटाइजेशन के लिए दमकल विभाग की मदद भी ली जा रही है. इस मुहिम में लगा दमकल विभाग का ट्रक गांव में कीचड़ में फंस गया. भारी मशक्कत के बाद फायर डिपार्टमेंट के सैनिटाइजर से भरे टैंकर को बाहर निकाला गया. अंदरूनी इलाकों में स्वास्थ्य कर्मचारियों और ग्राम सभा के कर्मचारियों द्वारा घर-घर जाकर सैनिटाइजेशन अभियान चलाया जा रहा है.
जिला पंचायत अधिकारी केबी वर्मा के मुताबिक गांव में संक्रमित मरीजों के मिलने के बाद कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है, जिसके बाद प्रशासन के निर्देशों के तहत घर-घर सैनिटाइजर का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि संक्रमण के प्रभाव को कम किया जा सके. गांव के सत्येंद्र दुबे कहते हैं कि जब से संक्रमण फैला है और गांव में एक शख्स की मौत हुई है, तब से महामारी को लेकर के डर का माहौल है. इसी के लिए लोग घरों में ही दुबक गए हैं. सत्येंद्र के मुताबिक लोगों ने अब मास्क पहनना गांव में शुरू कर दिया है और एक दूसरे से दूरी भी बनाने लगे हैं.
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इसलिए नहीं नीचे नहीं आ रहा ग्राफ
महाराजगंज द्वारा जारी किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 8 मई को 121 नए संक्रमित मरीज सामने आए थे, तो 9 मई को संक्रमित मरीजों की संख्या 284 थी. 10 मई को 171 मरीज सामने आए थे. 11 मई को 211 ने संक्रमित मरीज सामने आए, जबकि 11 मई को 2629 लोगों पर टेस्टिंग की गई. अकेले महाराजगंज जनपद में कुल पॉजिटिव केस 10119 हैं और वर्तमान समय में 1302 ऐक्टिव केस हैं, जिनमें 1104 लोग होम आइसोलेशन में हैं. 11 मई तक महाराजगंज जनपद में 107 संक्रमित व्यक्तियों की मौत कागज पर दर्ज की जा चुकी है. कागजी आंकड़ों पर अगर ये संख्या है, तो वास्तविक स्थिति का अंदाजा खुद लगा लीजिए. जिले के 20% स्वास्थ्य कर्मी भी संक्रमित हैं. यहां तक कि जिले के चीफ मेडिकल ऑफिसर और डिप्टी चीफ मेडिकल ऑफिसर भी संक्रमण की चपेट में हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में टेस्टिंग की संख्या अगर इसी तरह बढ़ाई गई, तो संक्रमण का सही आकलन लगाया जा सकेगा. इसके बाद संक्रमण पर लगाम भी लगाई जा सकेगी. गांव में लोग दहशत में है, टेस्टिंग करवाने से कन्नी काटते हैं, टीकाकरण अभियान सुस्त रफ्तार पर है, ऐसे में कोरोना वायरस के खिलाफ उत्तर प्रदेश की लड़ाई अभी लंबी है.