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पांच कोरोना वैक्सीन जिनसे दुनिया को हैं सबसे ज्यादा उम्मीदें

हाल ही में डब्ल्यूएचओ ने जोर देकर कहा था कि वह कभी ऐसी वैक्सीन का समर्थन नहीं करेगा, जो जल्दबाजी में विकसित की गई हो और प्रभावशाली के साथ सुरक्षित साबित न हुई हो.

दुनिया को है कोरोना वैक्सीन का इंतजार (प्रतीकात्मक फोटो) दुनिया को है कोरोना वैक्सीन का इंतजार (प्रतीकात्मक फोटो)
दीपू राय
  • नई दिल्ली,
  • 07 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 7:34 PM IST
  • 37 वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल के अलग-अलग फेज में
  • 188 वैक्सीन की निगरानी कर रहा है डब्ल्यूएचओ
  • 12 से 18 महीनों में कोरोना वैक्सीन आने की संभावना

दुनिया भर में कोरोना वायरस के 2.7 करोड़ केस हो चुके हैं. लाखों लोग अब तक इस महामारी की भेंट चढ़ चुके हैं और करोड़ों लोग की जान खतरे में है. ऐसे में दुनिया भर के लोग इस वायरस के खात्मे के लिए एक वैक्सीन या टीके का इंतजार कर रहे हैं. कई देश और कई कंपनियां वैक्सीन बनाने की दौड़ में हैं और कई वैक्सीन का ट्रायल अपने अंतिम चरण में हैं, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अभी तक किसी भी वैक्सीन को स्वीकृति नहीं दी है.

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वैक्सीन की उम्मीद और बढ़ गई, जब अमेरिकी स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने 50 राज्यों से कहा कि अमेरिकी चुनाव से ठीक दो दिन पहले 1 नवंबर तक कोरोना वैक्सीन के वितरण के लिए तैयार रहें. उधर, रूस इस महीने अपनी स्पुतनिक वी वैक्सीन बाजार में लाने को तैयार है.

हाल ही में डब्ल्यूएचओ ने जोर देकर कहा था कि वह कभी ऐसी वैक्सीन का समर्थन नहीं करेगा, जो जल्दबाजी में विकसित की गई हो और प्रभावशाली के साथ सुरक्षित साबित न हुई हो. डब्ल्यूएचओ का कहना है कि मौजूदा वक्त में 37 वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल के अलग-अलग फेज में हैं.

डब्ल्यूएचओ तकरीबन 188 वैक्सीन की निगरानी कर रहा है और इनमें से कुछ ट्रायल के फाइनल स्टेज में हैं. 188 में 9 अंतिम चरण में हैं. अंतिम चरण में कंपनियां हजारों वॉलंटियर पर अपने वैक्सीन का परीक्षण कर रही हैं, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि वे सुरक्षित हैं.

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डब्ल्यूएचओ की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन ने शुक्रवार को कहा, "हम कुछ ऐसी वैक्सीन से परिणाम की उम्मीद करते हैं जो तीसरे चरण में हैं और इस साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत तक आ सकती हैं. इसके बाद करोड़ों टीके का उत्पादन करने के लिए स्केलिंग की जरूरत होगी... वास्तव में कहें तो वैक्सीन संभवतः 2021 के मध्य तक आएगी."

आम तौर पर एक वैक्सीन विकसित होने और ट्रायल होने से लेकर आम आदमी के लिए मेडिकल शॉप तक पहुंचने में कम से कम तीन से चार साल लगते हैं. लेकिन कोरोना महामारी की आपात स्थिति के चलते अगले 12-18 महीनों में इसकी वैक्सीन बाजार में आने की संभावना है.

टॉप 5 वैक्सीन जिनसे हैं ज्यादा उम्मीदें

पांच टीके अब तक सबसे एडवांस स्टेज में हैं क्योंकि उनके शुरुआती ट्रायल का डेटा सकारात्मक रहा है. एडवांस स्टेज के इन टीकों के लिए निर्माण और तेजी से वितरण की रणनीतियां लगभग तय कर ली गई हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका

वैक्सीन टाइप: वायरल वेक्टर

अनुमानित उत्पादन: 2020 तक 1 अरब टीके 

सबसे ज्यादा उम्मीद यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन से है. ऑक्सफोर्ड की टीम ने 20 जुलाई को 'द लैंसेट' के परीक्षण का डेटा प्रकाशित किया. ट्रायल के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि इस वैक्सीन ने कुछ छोटे-मोटे साइड इफेक्ट्स के साथ इम्युनिटी को बढ़ाने में सफलतापूर्वक मदद की है.

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इस वैक्सीन का तीसरा चरण मई में शुरू हुआ है और अगले महीने में आपात स्थिति में इसे जनता के लिए बाजार में उतारने का लक्ष्य रखा गया है. इसका मतलब है कि रेग्युलेटरी बॉडीज की ओर से इसके आपातकालीन उपयोग की अनुमति मिल सकती है. हालांकि, इसके ट्रायल का तीसरा चरण अक्टूबर, 2022 में पूरा होगा.  

फिजर/बॉयोएनटेक

वैक्सीन टाइप: जेनेटिक-कोड

अनुमानित उत्पादन: 2020 के अंत तक 10 करोड़ टीके

खबरों के अनुसार फार्मास्युटिकल कंपनी फिजर (Pfizer) ने कहा है कि वह अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से अपनी कोरोना वैक्सीन के लिए आपात उपयोग करने के अधिकार की मांग करेगी. कंपनी ने संकेत दिया है कि इसकी वैक्सीन अगले महीने आ सकती है. ये वैक्सीन फिजर और जर्मनी की बॉयोएनटेक मिलकर बना रही हैं जिसके शुरुआती ट्रायल में सामने आया है कि ये कोरोना से लड़ने में मदद कर रही है.

इसके फेज 3 का ट्रायल अमेरिका में जुलाई में शुरू हुआ. अक्टूबर में कंपनी आपातकालीन प्रयोग के लिए अनु​मति लेने के लिए आवेदन देगी. हालांकि, इसका भी अंतिम चरण अक्टूबर, 2022 में पूरा होने की उम्मीद है.

मॉडर्ना/NIAID

वैक्सीन टाइप: जेनेटिक-कोड

अनुमानित उत्पादन: 2021 के शुरु​आत तक 50 करोड़ टीके

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज (NIAID) के साथ साझेदारी में बायोटेक कंपनी मॉडर्ना mRNA-1273 नाम की वैक्सीन बना रही है. इसका फेज 3 का ट्रायल 27 जुलाई को शुरू हुआ, जिस दिन फिजर ने अपना तीसरे चरण का ट्रायल शुरू किया था. इसके अंतिम चरण का ट्रायल अमेरिका में हो रहा है जिसमें 30,000 वॉलंटियर शामिल हैं.

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इसका शुरुआती नतीजा अगले तीन महीने में आने की संभावना है. मॉडर्ना अक्टूबर में इसके इमरजेंसी प्रयोग की अनुमति के लिए आवेदन करने की योजना भी बना रही है. हालांकि, इसका भी अंतिम चरण अक्टूबर, 2022 में पूरा होगा.

सिनोफार्म 

वैक्सीन टाइप: वायरस-बेस्ड

अनुमानित उत्पादन: एक साल में करीब 22 करोड़ टीके

चीन की सरकारी मालिकाना वाली फार्मा कंपनी सिनोफार्म, सरकारी एजेंसियों वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स और बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स के साथ दो वैक्सीन पर काम कर रही है. बहरीन, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में इसकी वैक्सीन का परीक्षण किया जा रहा है और आगे पेरू, मोरक्को और अर्जेंटीना में भी किया जा सकता है.

कंपनी ने साल 2020 के खत्म होने से पहले इसे पब्लिक के लिए उपलब्ध करवाने का लक्ष्य तय किया है.

गेमालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट

वैक्सीन टाइप: वायरल वेक्टर

अनुमानित उत्पादन: सितंबर, 2020 से सालाना 50 करोड़ टीके सालाना

11 अगस्त को, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने घोषणा की कि रूस ने सबसे पहले कोरोना वायरस वैक्सीन का टीका बना लिया है. हालांकि, उसी समय रूस के बाहर के कई वैज्ञानिकों ने इसकी ट्रायल प्रक्रिया के बारे में सवाल उठाया. इसे रूस का गेमालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट विकसित कर रहा है, जिसे स्पुतनिक वी नाम दिया गया है.

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इसके बारे में रूस ने शुक्रवार को लैंसेट मेडिकल जर्नल में प्रारंभिक दो चरण के ट्रायल की जानकारी दी है. जर्नल में कहा गया कि ये वैक्सीन दो फॉर्म्यूलैशन के साथ दो बार में 21 दिनों के अंदर एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को प्रेरित करती है और 42 दिनों के भीतर इसका कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होता.

इसके अलावा सिनोवैक, कैनसिनो, जॉनसन & जॉनसन, नोवावैक्स भी वैक्सनी विकसित करने की कतार में हैं.

भारत के रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी के निर्माण में सहयोग करने की संभावना है. भारत के स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने हाल ही में कहा, "जहां तक वैक्सीन स्पुतनिक वी का संबंध है, दोनों देश संपर्क में हैं."

कोरोना वायरस धीरे-धीरे भारत जैसे देशों के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो रहा है. 7 सितंबर, 2020 को भारत ने ब्राजील को पीछे छोड़ दिया और दुनिया में महामारी से दूसरा सबसे प्रभावित देश बन गया. भारत में एक दिन में 90 हजार तक नए केस आ रहे हैं. इसके साथ ही देश में 42 लाख से ज्यादा केस हो चुके हैं.

भारत पहले से ही, खासकर कम से कम विकसित देशों के लिए तमाम तरह के टीकों की मैन्युफैक्चरिंग और वितरण का हब रहा है. भारत में पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया दुनिया के सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनियों में से एक है. सबसे ज्यादा उम्मीद ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन से है और इसके साथ सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने एक करोड़ टीके बनाने के लिए समझौता किया है.

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