
श्रद्धा वॉल्कर और आयुषी यादव. श्रद्धा 27 साल की थी, आयुषी 21 की थी. इन दो लड़कियों ने अभी अपने सपने बुनने ही शुरू किए थे कि दोनों ही मार दी गईं. दोनों को ही अपनों ने मारा. एक को पिता ने, एक को प्रेमी ने. श्रद्धा को उसके उस प्रेमी ने टुकड़े टुकड़े कर दिए जिसे उसने प्रेम के सपने दिखाए थे, आयुषी को तो उस पापा ने मारा जिनकी गोद में किलकारियां भरती हुईं वो बच्ची से बड़ी हुई थी.
दिल्ली की ये दो कहानियां दिल दुखाने वाली, रुलाने वाली और सोचने के लिए मजबूर कर देने वाली हैं.
आयुषी यादव की कहानी
दिल्ली से आगरा जाने वाली यमुना एक्सप्रेस वे पर फर्राटा भरने वाली कारों की रफ्तार रोमांच पैदा करती है. 18 नवंबर को इसी एक्सप्रेस वे के किनारे सर्विस रोड पर एक लाल रंग की बड़ी ट्राली दिखी तो लोग चौक गए. ये जगह मथुरा के नजदीक राया में मौजूद एग्रीकल्चरल रिसर्च सेंटर के पास की थी. लोगों ने इस बड़ी सी लाल ट्रॉली के पास पहुंचकर देखा तो वे सहम गए.
तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी गई. 18 नवंबर बारह बजे तक पुलिस यहां पहुंच चुकी थी. जब इस लाल ट्रॉली को खोला गया तो पुलिस के होश उड़ गए. इस लाल ट्रॉली में एक युवती की लाश रखी हुई थी.
मथुरा पुलिस के अनुसार इस लड़की की लंबाई 5 फीट 2 इंच थी. लड़की को गोली मारी गई थी. फिर उसे प्लास्टिक में लपेटकर बैग में बंद कर दिया गया था. इस बैग में लाल रंग की दो साड़ियां भी रखी हुई थीं.
टीवी स्क्रीन पर श्रद्धा की तस्वीरें देखकर हैरान हो रहे लोगों ने जब इस बॉडी को देखा तो वे हिल गए. एक-एक कर हुए दो कत्ल से लोग काफी गुस्से में थे.
इस बीच मथुरा पुलिस ने अपना काम शुरू कर दिया था. 72 घंटे बाद पुलिस ने जो दावा किया है, और जो खुलासा किया है वो निहायत ही डराने वाला है.
ट्राली में जिस लड़की की बॉडी बंद थी उसका नाम आयुषी यादव था. 21 साल की आयुषी यादव दिल्ली के बदरपुर में अपने परिवार के साथ रहती थी.
आयुषी को पापा ने मारी गोली- पुलिस
मथुरा पुलिस का दावा है कि पिता ने ही बेटी को गोली मारी थी. पुलिस के अनुसार आयुषी घर से बिना बताए कहीं चली गई थी जैसे ही वह घर पहुंची पिता नितेश यादव ने आपा खो दिया और अपनी ही बेटी को गोली मार दी. इसके बाद हत्यारे पिता ने रात में ही बेटी के शव को ठिकाना लगाने की साजिश रच डाली. उसने शव को ट्रॉली में रखा और कार में डालकर मथुरा के राया इलाके में फेंक आया.
इस खौफनाक खुलासे के बाद पुलिस ने पिता को हिरासत में ले लिया है और मामले की तफ्सील से जांच शुरू कर दी है. आयुषी के शव की शिनाख्त उसकी मां और भाई ने की है.
20 हजार मोबाइल पुलिस ने किया ट्रेस
युवती की शिनाख्त के लिए यूपी पुलिस की सर्विलांस टीम ने करीब 20 हजार मोबाइल फोन ट्रेस किए. इन मोबाइलों की लोकेशन भी सर्विलांस टीम ने खंगाली. जेवर, जाबरा टोल, खंदौली टोल के अलावा हाथरस, अलीगढ़ और मथुरा आने वाले मार्गों पर लगे 210 सीसीटीवी से फुटेज भी खंगाले. जिसके बाद पुलिस को सफलता मिली. कार्यवाहक एसएसपी एमपी सिंह ने बताया कि मां और भाई ने पोस्टमार्टम गृह पर पहुंचकर आयुषी होने की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि ये परिवार मूल रूप से गोरखपुर का रहने वाला बताया जा रहा है.
युवती की शिनाख्त के लिए पुलिस ने दिल्ली एनसीआर, अलीगढ़ और हाथरस में जगह-जगह मृतका के पोस्टर भी लगवाए थे. पुलिस की करीब आठ टीमें युवती की पहचान में जुटी हुई थीं. ये टीमें गुरुग्राम, आगरा, अलीगढ़, हाथरस, नोएडा और दिल्ली पहुंची तो मामले का खुलासा हुआ.
पुलिस ने फिलहाल इसे हॉरर किलिंग का मामला बताया है लेकिन आयुषी के कत्ल के इर्द-गिर्द कई सवाल घूम रहे हैं जिसका जवाब पुलिस को तलाशना है. क्या आयुषी रिलेशनशिप में थी? अगर हां तो इससे पिता को क्या नाराजगी थी? क्या आयुषी की कत्ल की कहानी से उसकी मां और भाई वाकिफ हैं?
श्रद्धा वॉल्कर की कहानी
श्रद्धा वॉल्कर की कहानी उस विश्वास के टुकड़े टुकड़े में बदलने की कहानी है जहां एक युवा लड़की प्रेम के वशीभूत होकर एक अजनबी को अपना सबकुछ सौंप बैठती है. एक कातिल और सनकी शख्स न सिर्फ उस लड़की के टुकड़े टुकड़े करता है बल्कि प्रेम नाम की भावना को भी छलनी-छलनी करके रख देता है.
प्यार, लिव-इन और फिर इससे पनपे फरेब और कत्ल की इस कहानी का हर चैप्टर श्रद्धा के प्रेमी आफताब अमीन पूनवाला के विश्वासघात की कहानी है.
डेटिंग से रिश्तों की शुरुआत
श्रद्धा और आफताब के रिश्तों की शुरुआत एक डेटिंग ऐप से हुई थी. साल 2018 में दोनों एक डेटिंग एप बंबल पर मिले थे. 2019 में दोनों लिव-इन में रहने लगे थे. श्रद्धा कॉल सेंटर में जॉब करती थी, तो वहीं आफताब ने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की है. वो फूड ब्लॉगर भी था.
श्रद्धा की निजी जिंदगी उथल-पुथल से भरी हुई
श्रद्धा की निजी जिंदगी के जो पन्ने खुल पाए हैं उससे पता चलता है कि वहां भी खूब उथल-पुथल मची हुई थी. श्रद्धा 2019 में अपने परिवार से अलग हुई तो इस परिवार का ताना-बाना बिखर गया. मां अगले ही साल यानी कि 2020 में चल बसी.
इधर श्रद्धा के पिता का 2016 से ही अपनी पत्नी से रिश्ता खराब था. बाद में श्रद्धा कुछ दिनों के लिए मां के घर आई तो जरूर लेकिन वो फिर लौट गई. अब श्रद्धा के पापा ही ज्यादातर उसके फेसबुक और वॉट्सऐप स्टेट्स से अपनी बेटी की खोज खबर जान पाते थे.
पिता को दिया बालिग होने का हवाला
आफताब के साथ रहने के लिए श्रद्धा ने अपने परिवार का विरोध सहा था. पिता समझाने लगे तो अपने बालिग होने का हवाला दिया और अपने जिंदगी के फैसले खुद करने की बात कही. पिता को दो टूक बोलकर अलग हो गई.
ऐसा करते करते तीन साल गुजर गए. अब श्रद्धा इस रिश्ते को शादी का नाम देना चाहती थी. इस दौरान दोनों के बीच कई बार लड़ाइयां भी हुईं, श्रद्धा के साथ आफताब ने मारपीट भी की. लेकिन श्रद्धा इस रिश्ते से बाहर निकलने का फैसला नहीं कर पाई. इस बीच दोनों कई जगहों पर घुमने गए.
आफताब से लड़ाइयां होने पर वो श्रद्धा से माफी मांग लेता, वो माफ भी कर देती थी. पर वो जानती नहीं थी कि इस माफी के पीछे भी आफताब की साजिश है.
यहां आफताब को समझने में गलती कर बैठी श्रद्धा
वो नहीं जानती थी कि जिस डेटिंग एप पर वो आफताब से मिली थी वहां कई और लड़कियां, कई और किरदार भी थे. आफताब की दिलचस्पी अब श्रद्धा से खत्म होकर दूसरी लड़कियों में हो गई थी. उसने रिश्तों को मिलने भावनात्मक एहसास पर धीरे धीरे फंदा कसना शुरू कर दिया था.
इसी साल मई में श्रद्धा आफताब के साथ अपना आशियाना बसाने के लिए मुंबई से दिल्ली आ गई. अब उसने आखिरी बार मुंबई छोड़ा था. श्रद्धा और आफताब 9 मई को दिल्ली आए और महरौली के छतरपुर में किराए के कमरे में रहने लगे. पुलिस के अनुसार 18 मई 2022 को आफताब ने श्रद्धा की हत्या कर दी. इसके बाद इस दरिंदे ने शव के 35 टुकड़े किए और अगले 6 महीने तक बारी बारी से इन टुकड़ों को महरौली के जंगलों में ठिकाने लगाता रहा.
आफताब ने इस दौरान प्रोफेशनल किलर जैसी हरकतें की. उसने गूगल पर हत्या के सबूत मिटाने के उपाय खोजे. ओटीटी पर सीरीज देखी.
आफताब की क्रूरता को देख लोग सन्न हैं, लोगों को विश्वास करना मुश्किल लगता है कि जिस लड़की के साथ उसने 3 से 4 साल गुजारी पहले वो उसकी हत्या और फिर उसके टुकड़े वो इतनी पेशेवर सफाई के साथ करेगा. लेकिन हत्यारे के दिमाग की साजिश और गहराई का अंदाजा तो मनोवैज्ञानिक भी नहीं लगा पाते हैं.