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मुंबई में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद एक बार फिर जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम सुर्खियों में आ गया है. इससे पहले पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के हाई-प्रोफाइल मर्डर में भी उसका नाम आया था. जुर्म दुनिया में धाक जमाने नाले इस क्राइम नेटवर्क की कमान गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके बेहद करीबी गोल्डी बराड़ के हाथ में है. इन दोनों दोस्तों के गठजोड़ से भारत में शुरू हुआ उनका गैंग अब एक बड़े इंटरनेशनल क्राइम सिंडिकेट में बदल गया है. इन दोनों के बाद इस गैंग में अनमोल बिश्नोई और सचिन बिश्नोई के नाम टॉप लिस्ट में शामिल हैं, जो लॉरेंस के सलाखों के पीछे होने के बावजूद इस गिरोह का संचालन करते हैं.
कौन है गोल्डी बराड़?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सतविंदर सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को आतंकवादी करार दे रखा है. उसके खिलाफ पंजाब और हरियाणा में 54 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 24 जबरन वसूली से जुड़े हैं. ये जानकारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने चंडीगढ़ जिला अदालत में दायर एक चार्जशीट में दी थी. एनआईए ने खुलासा किया था कि गोल्ड़ी बराड़ विभिन्न आपराधिक और आतंकवाद से संबंधित गैंगस्टर गतिविधियों में शामिल एक विशाल नेटवर्क संचालित करता है.
गोल्डी बराड़ पर अपना गैंग चलाने के लिए भारतीय व्यापारियों से बड़ी रकम वसूलने का आरोप है. वर्तमान में, वह पंजाब, चंडीगढ़ और अन्य जगहों पर अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए उत्तरी राज्यों में मौजूद गैंगस्टर नेटवर्क पर निर्भर है. उसके खिलाफ दर्ज 54 मामलों में से 40 पंजाब और 14 हरियाणा के हैं.
बराड़ पर पहला मामला 2012 में फरीदकोट में आर्म्स एक्ट और मारपीट के आरोपों के तहत दर्ज किया गया था, हालांकि उसे बरी कर दिया गया था. अब उस पर आर्म्स एक्ट के तहत 18 मामले, हत्या के 12 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत तीन मामले दर्ज हैं. 1994 में पैदा हुए बराड़ पुलिस पृष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखता है. लेकिन परिवार के इतर उसने अलग रास्ता चुना और कनाडा से, खासकर पंजाब में काम करते हुए बीए की डिग्री हासिल की.
गोल्डी बराड़ तब चर्चा में आया था, जब उसने फेसबुक पोस्ट के जरिए गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी ली थी. शुरुआत में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह ने मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी ली थी. हालांकि, बाद में बराड़ ने टेलीविजन पर अपना जुर्म कबूल कर लिया था, जिसमें लॉरेंस के सहयोगी विक्की मिदुखेरा की हत्या में मूसेवाला की कथित भूमिका का हवाला दिया गया था. पिछले साल बराड़ ने बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान को निशाना बनाने की बात कबूल करते हुए कहा था कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि सलमान उनका अगला निशाना है.
रैपर हनी सिंह को भी गोल्डी से जान से मारने की धमकी वाला वॉयस नोट मिला था. इसके बाद फौरन हनी सिंह शिकायत दर्ज कराने के लिए दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे. 1 मई, 2024 को खबरें सामने आईं थीं कि बराड़ की अमेरिका में गोली मारकर हत्या कर दी गई है. अमेरिकी पुलिस ने गोल्डी बराड़ की मौत की खबरों को खारिज कर दिया था.
लॉरेंस और गोल्डी की मुलाकात
लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बरार की पहली मुलाकात चंडीगढ़ में उनके कॉलेज के दिनों में हुई थी. लॉरेंस बिश्नोई का ताल्लुक राजस्थान के एक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार से है. लॉरेंस बिश्नोई ने पंजाब विश्वविद्यालय में दाखिला लेने से पहले ही आपराधिक गतिविधियों में हाथ आजमाना शुरू कर दिया था. 2010 के दशक की शुरुआत में उसके जबरन वसूली के रैकेट और हिंसक कारनामों ने ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया था, जिससे वो उत्तर भारत के अंडरवर्ल्ड में एक ख़तरनाक अपराधी के तौर पर पहचान बनाने लगा था.
पंजाब के फरीदकोट का मूल निवासी सतिंदर सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ भी इसी तरह की पृष्ठभूमि से आता है, उसके पिता की वजह से उसके एक स्थानीय कांग्रेस नेता से राजनीतिक संबंध बन गए थे. चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान कॉलेज में गोल्ड़ी बराड़ और लॉरेंस की मुलाक़ात हुई थी. आपसी महत्वाकांक्षा और इलाके में जबरन वसूली रैकेट को पर कब्जा करने की इच्छा ने दोनों की दोस्ती को मजबूत बनाने का काम किया. गोल्डी बराड़, जल्द ही बिश्नोई का भरोसेमंद सहयोगी बन गया था, जो खास तौर पर पंजाब में गैंग से जुड़े कई काम संभालता था.
लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के बीच यह रिश्ता समय के साथ-साथ मज़बूत होता गया, क्योंकि वे दोनों राज्य की सीमाओं से परे अपने आपराधिक अभियान का विस्तार करने के लिए एक समान सोच रखते थे. जहां लॉरेंस बिश्नोई जेल के अंदर से सभी ऑपरेशन को अंजाम देता था, वहीं गोल्ड़ी बराड़ जबरन वसूली, धमकियों और ज़मीन पर हिंसा से जुड़ी तमाम वारदातों को अंजाम देता था.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैंग का विस्तार
लॉरेंस बिश्नोई और गोल्ड़ी बराड़ की जोड़ी की महत्वाकांक्षाएं जल्द ही भारत की सीमा से आगे निकल गईं. गोल्डी बराड़ साल 2017 में देश छोड़कर भाग गया था. अपने खिलाफ बढ़ते आपराधिक मामलों से बचने के लिए उसने कनाडा में शरण ली थी. विदेश में एक बार उसने दूर से ही ऑपरेशन को कॉरडिनेट करना शुरू कर दिया, लॉरेंस और भारत में गैंग के तमाम सदस्यों के संपर्क में रहने के लिए उसने एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों और तरीकों का इस्तेमाल किया.
गोल्डी के कनाडा शिफ्ट हो जाने से गैंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने में मदद मिली. गैंग के प्रमुख खिलाड़ी अब भारत और कनाडा दोनों में रहकर काम कर रहे हैं. मई 2022 में पंजाबी सिंगर और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला की हत्या ने उनकी अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर भारत की तमाम एजेंसियों का ध्यान केंद्रित किया. गोल्डी बराड़ ने लॉरेंस बिश्नोई के सीधे आदेश के तहत कनाडा से हत्या की साजिश रचने की जिम्मेदारी खुले तौर पर ली, जो उस समय जेल में बंद था. इस साहसिक दावे ने पूरे भारत में सनसनी फैला दी, जिससे लॉरेंस के गैंग की अंतरराष्ट्रीय पहुंच का खुलासा भी हुआ.
इस वक्त हालात ये हैं कि लॉरेंस गैंग का नेटवर्क अब कई देशों में जबरन वसूली, चारगेट किलिंग और तस्करी में लगा हुआ है. कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों में इस गैंग की पहुंच और गुर्गे मौजूद होने के कारण लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ का क्राइम सिंडिकेट कानून प्रवर्तन एजेंसियों से काफी हद तक बचने में कामयाब रहा है, अक्सर परदे के पीछे रहकर काम करने के लिए ये गिरोह उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करता हैॉ.
कौन है अनमोल बिश्नोई?
अनमोल बिश्नोई उर्फ भानु कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भाई है. वह गायक-राजनेता सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी आरोपी है. साल 2023 में, एजेंसी ने उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. रिपोर्ट के अनुसार, वह फर्जी पासपोर्ट पर भारत से भाग गया था. वह कथित तौर पर अपने ठिकाने बदलता रहता है और पिछले साल उसे केन्या और इस साल कनाडा में देखा गया था. एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, उस पर 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह जोधपुर जेल में सजा काट चुका है. उसे 7 अक्टूबर 2021 को जमानत पर रिहा किया गया था.
इसी साल 14 अप्रैल को सुपर स्टार सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर गोलीबारी की गई थी. इस मामले की जांच कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच ने वांछित आरोपी अनमोल बिश्नोई के खिलाफ गोलीबारी मामले में कथित संलिप्तता के लिए लुकआउट सर्कुलर (LOC) नोटिस जारी किया था. घटना के बाद उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर गोलीबारी की जिम्मेदारी ली थी.
कौन है सचिन बिश्नोई?
सचिन थापन बिश्नोई पंजाब के फाजिल्का जिले का रहने वाला है. पुलिस द्वारा दी गई जानकारी से पता चलता है कि लॉरेंस और सचिन दोनों एक ही गांव के हो सकते हैं. फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार, सचिन पंजाब में गौ रक्षा दल का सदस्य था. पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या में कथित रूप से शामिल सचिन बिश्नोई उर्फ सचिन थापन को अगस्त 2023 में अजरबैजान के बाकू से भारत प्रत्यर्पित किया गया था. सचिन ने न्यूज आउटलेट को दिए इंटरव्यू में कहा था कि लॉरेंस उसका मामा है और उसने खुद मूसेवाला को गोली मारी थी.
गैंग में अनमोल और सचिन की भूमिका
लॉरेंस का छोटा भाई अनमोल बिश्नोई और रिश्तेदार सचिन बिश्नोई उसके गैंग को ऑपरेट करने में अहम रोल निभाते हैं. माना जाता है कि गोल्डी की तरह अनमोल भी अधिकारियों से बचने के लिए भारत से भाग गया था. अब वह कथित तौर पर विदेश से जबरन वसूली जैसे काम मैनेज कर रहा है. वो यह सुनिश्चित करता है कि लॉरेंस बिश्नोई के सलाखों के पीछे रहने के दौरान भी गैंग को किसी तरह की कोई परेशानी ना हो खासकर पैसों के मामले और गैंग खर्च भी वो डील करता है.
जांच रिपोर्टों के अनुसार, लॉरेंस के रिश्तेदार सचिन बिश्नोई ने सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वह वर्तमान में फरार है और माना जाता है कि वह किसी अन्य देश में छिपा हुआ है, और वहीं से गैंग के काम कर रहा है.
भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने लॉरेंस गैंग पर शिकंजा कसने की तमाम कोशिशें की हैं, लेकिन इसके बावजूद ये लोग पकड़ में नहीं आ रहे हैं. अनमोल और सचिन गैंग के रोजमर्रा वाले कामों को संभालते हैं और गोल्डी बराड़ अंतरराष्ट्रीय स्तर समन्वय करता है. गैंग को मैनेज करता है. हालात ये बन चुके हैं कि लॉरेंस बिश्नोई का क्राइम सिंडिकेट लगातार फल-फूल रहा है, जो भारतीय एजेंसियों और अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.
लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ का गैंग अब अंतरराष्ट्रीय क्राइम बिजनेस बन गया है. लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़, अनमोल बिश्नोई और सचिन बिश्नोई जैसे शक्तिशाली लोगों के साथ यह गैंग भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी एक बड़ा खतरा बना हुआ है. राजनीतिक लोगों से गहरे संबंध और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल उन्हें कानून और प्रवर्तन एजेंसियों से बचने में मदद करता है. यही वजह है कि वे कानून की पकड़ से बचकर बॉर्डर के पार अपने नेटवर्क का विस्तार करने काम कर रहे हैं.
ऐसे चलता है गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का साम्राज्य
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई इस वक्त साबरमती सेंट्रल जेल के उच्च सुरक्षा वाले वार्ड में बंद है. लेकिन उसने अपना जाल बट्टा कुछ ऐसे फैलाया कि अब वो जेल के अंदर रहे या फिर बाहर, उसे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. कहने का मतलब ये कि वो जेल में बैठे-बैठे ही बड़ी आसानी से जो चाहता है, वो करता है. जेल में बैठे-बैठे ही वो अपने दुश्मनों के नाम की सुपारी निकालता है और जेल में बैठे-बैठे ही करोड़ों की वसूली करता है. एनआईए की पूछताछ में उसने अपने काम करने की पूरी मॉडस ऑपरेंडी और उसका एक-एक सच खोल कर रख दिया था.
फोन कॉल पर करोड़ों की उगाही
दिल्ली की तिहाड़ जेल के अलावा राजस्थान के भरतपुर, पंजाब के फरीदकोट जेस में रहते हुए भी उसने उत्तर भारत के कारोबारियों करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की. कभी उसने राजस्थान के कारोबारियों से, कभी उसने चंडीगढ़ के कम से कम 10 क्लब मालिकों से, कभी अंबाला के सभी मॉल मालिकों से, कभी शराब कारोबारियों से और कभी दिल्ली और पंजाब के सटोरियों से करोड़ों की उगाही की. जेल में लॉरेंस के गुर्गे ऐसे कारोबारियों और धंधेबाज़ों के नंबर लेकर आते थे, और लॉरेंस के नाम पर जानेवाले एक एक फोन कॉल पर करोड़ों रुपये उसके बताए ठिकाने पर पहुंच जाते थे.
ऐसे वसूली रैकेट चलाता है लॉरेंस का गैंग
एनआईए सूत्रों की मानें तो गोल्डी बराड़, काला राणा, गुरलाल बराड़ और काला जठेड़ी जैसे गैंगस्टर अक्सर ऐसे नंबर लॉरेंस को मुहैया करवाते रहे हैं. इनमें गुरलाल बराड़ का तो खैर कत्ल हो चुका है, लेकिन बाकी गैंगस्टरों की ओर से ये सिलसिला अब भी जारी है. लॉरेंस ने अपने सिंडिकेट की बारीकियों का खुलासा करते हुए बताया है कि उसका जाल राजस्थान तक फैला हुआ है. वहां के कई क्रशर मालिकों और स्टोन करोबारियों से भी उसके गैंग ने करोड़ों रुपये वसूल किए हैं. लॉरेंस की ओर से गैंगस्टर आनंदपाल के भाई विक्की सिंह और मंजीत सिंह उसके लिए राजस्थान में वसूली करते हैं.
हथियारों की तस्करी
लेकिन ये तो रही गैंग की कमाई की बात.. लॉरेंस के गैंग से जुड़े गुर्गे और खुद लॉरेंस सालों से अपने गैंग के लिए हथियारों की तस्करी करता रहा है. उसने कबूला है कि साल 2018 से 2022 तक उसने यूपी के खुर्जा से अपने करीबी गैंगस्टर रोहित चौधरी के मार्फत आर्म्स सप्लायर कुर्बान चौधरी उर्फ शहजाद से हथियारों की मोटी खेप खरीदी थी. इनमें करीब 2 करोड़ रुपये के 25 हथियार शामिल थे. इन हथियारों में 99 एमएम की पिस्टल से लेकर एके 47 जैसे खौफनाक हथियार भी थे, आम लोगों के लिए जिनके इस्तेमाल पर रोक है. लेकिन तस्करी के जरिए लॉरेंस का गैंग ऐसे हर हथियार जुटाता रहा है.