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लॉरेंस बिश्नोई-गोल्डी बराड़... जानिए गैंगस्टर्स की ये जोड़ी सलमान खान के पीछे क्यों पड़ गई है? पहले रेकी, अब धमकी

तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई एक कुख्यात अपराधी है. जिसके खिलाफ एक नहीं दर्जनों मामले दर्ज हैं. वो जेल में बंद रहकर भी अपना गैंग ऑपरेट करता है. जिसकी कमान संभालते हैं गोल्डी बराड़ और उसका ममेरा भाई सचिन बिश्नोई.

पहले गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और अब गोल्डी बराड़ ने सलमान खान को धमकी दी है पहले गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और अब गोल्डी बराड़ ने सलमान खान को धमकी दी है
परवेज़ सागर
  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 2:01 PM IST

Salman Khan: बॉलीवुड सुपर स्टार सलमान खान को पहले गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और अब गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने धमकी दे डाली. सलमान को धमकी मिलने का ये सिलसिला साल 1998 से चला आ रहा है. ये वही साल था, जब काला हिरण शिकार मामले में सलमान खान का नाम आया था. अब सवाल उठता है कि आखिर कुख्यात अपराधी लॉरेंस बिश्नोई का इस मामले से क्या लेना-देना है? क्यों वो और उसका गैंग सलमान खान की जान का दुश्मन बना हुआ है? आइए जान लेते हैं, इस दुश्मनी की असल वजह.

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कौन है लॉरेंस बिश्नोई? 

तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई एक कुख्यात अपराधी है. जिसके खिलाफ एक नहीं सैकड़ों मामले दर्ज हैं. वो जेल में बंद रहकर भी अपना गैंग ऑपरेट करता है. जिसकी कमान संभालते हैं गोल्डी बराड़ और उसका ममेरा भाई सचिन बिश्नोई. ये दोनों कनाडा में बैठकर गैंग को चलाते हैं. इनके अलावा ऑस्ट्रीया में अनमोल और कनाडा में रहकर विक्रम बराड़ तमाम लेन-देन के मामलों को संभालता है.

पुलिस के मुताबिक, लॉरेंस के इस क्राइम नेटवर्क में करीब एक हजार लोग जुड़े हैं, जिसमें शार्प शूटर्स, केरीयर, सप्लायर, रैकी पर्सन, लॉजिस्टिक स्पोट बॉय, शेल्टर मेन और सोशल मीडिया विंग के सदस्य शामिल हैं. लॉरेंस इस गैंग का मास्टरमाइंड है तो गोल्डी बराड़ को इस गैंग में रीढ़ की हड्डी माना जाता है. पिछले साल पंजाबी गायक और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला की हत्या के पीछे भी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम आया था.

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काला हिरण और बिश्नोई समाज का कनेक्शन

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का संबंध बिश्नोई समाज है. जो मूलतः जोधपुर के पास पश्चिमी थार रेगिस्तान से ताल्लुक रखता है. यह समाज प्रकृति के प्रति प्रेम के लिए जाना जाता है. बिश्नोई समाज में जानवर को भगवान तुल्य मान जाता है और खासकर हिरण. इसी लिए इस समाज के लोग हिरण और अन्य पशुओं के लिए अपनी जान की बाजी लगाने से भी पीछे नहीं हटते हैं. वे काला हिरण की पूजा करते हैं.

दरअसल, ये लोग हिरण को भगवान की तरह मानते हैं और इसका संरक्षण करते हैं. राजस्थान के कुछ गांवों में आज भी महिलाएं हिरण के बच्चों को अपना दूध पिलाती हैं. कुछ साल पहले एक तस्वीर भी वायरल हुई थी, जिसमें एक महिला हिरण के बच्चे को अपना दूध पिला रही थी.

ऐसे लोगों को मिलता है शहीद का दर्जा

बिश्नोई समाज में प्रकृति के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले लोगों को शहीद का दर्जा देता है. बता दें कि इस समाज के कई ऐसे लोग भी हुए हैं, जिन्होंने जानवरों के लिए अपनी जान भी गंवाई है, उसमें गंगा राम विश्नोई जैसे कई नाम शामिल है. कुछ वर्षों पहले बिश्नोई समाज का एक युवक निहालचंद वन्यजीवों की रक्षा की कोशिश में शिकारियों से लड़ते हुए अपनी जान पर खेल गया था. बाद में इस घटना पर ‘विलिंग टू सैक्रीफाइस’ फिल्म भी बनी थी.

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बिश्नोई समाज के अहम नियम

दरअसल बिश्नोई बीस (20) और नोई (9) से मिलकर बना है और यह समाज 29 नियमों का पालन करता है. इन नियमों में एक नियम शाकाहारी रहना और हरे पेड़ नहीं काटना भी शामिल है. साथ ही ये लोग जम्भोजी को पूजते हैं. बिश्नोई समाज के लोग लगभग 550 साल से प्रकृति की पूजा करते आ रहे हैं. काला हिरण विलुप्त होती प्रजाति है जिसकी सुरक्षा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत की जाती है.

प्रकृति के रक्षा के लिए दे सकते हैं जान

वहीं चिपको आंदोलन में भी विश्नोई समाज का अहम योगदान है. बिश्नोई समाज आमतौर पर पर्यावरण की पूजा करने वाला समुदाय माना जाता है. ये बिश्नोई समाज ही था जिसने पेड़ों को बचाने के लिए अपने जान की आहुती दी थी. जोधपुर के राजा द्वारा पेड़ों के काटने के फैसले के बाद एक बड़े पैमाने पर बिश्नोई समाज की महिलाएं पेड़ो से चिपक गई थी और उन्हें काटने नहीं दिया. इसी के तहत पेड़ों को बचाने के 363 बिश्नोई समाज के लोगों के अपनी जान भी दे दी थी. 

सलमान खान को धमकी दिए जाने की वजह

अभिनेता सलमान खान का नाम साल 1998 में काला हिरण शिकार मामले में आया था. तभी से बिश्नोई समाज सलमान खान का विरोध करने लगा था. उनकी फिल्मों का बहिष्कार करने लगा था. यहां तक कि उनकी फिल्मों के गाने तक इस समाज में नहीं सुने जाते थे. सलमान उनके लिए एक बुरे आदमी बन चुके थे. इस समाज के आम लोग भले ही सलमान के खिलाफ ज्यादा आवाज़ नहीं उठा पाए थे, लेकिन गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई जब सुर्खियों में आया और अपराध की दुनिया में उसका सिक्का चलने लगा तो उसने सलमान खान को जान से मारने की धमकी दे डाली.

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यहां तक कि कई बार ऐसा भी हुआ कि जब काला हिरण शिकार में मामले में सलमान खान को जोधपुर कोर्ट में पेश होना था, तो उसी वक्त धमकी मिलने की वजह से लॉरेंस बिश्नोई गैंग या उसके किसी गुर्गे की धमकी मिलने के बाद सलमान सुरक्षा का हवाला देकर कोर्ट में पेशी पर नहीं पहुंचे थे.

सलमान खान के घर की रेकी

जून 2021 में भी एजेंसियों ने जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई  से कड़ी पूछताछ की थी. उसी दौरान एक ऐसा खुलासा हुआ था, जिसने मुंबई पुलिस की नींद उड़ा दी थी. ये खुलासा था सलमान खान की हत्या की साजिश का. लॉरेंस ने अपना जुर्म कुबूल करते हुए बताया था कि उसने सलमान खान को मारने के लिए राजस्थान के गैंगस्टर संपत नेहरा को जिम्मेदारी दी सौंपी थी.

सलमान का मारना चाहता था गैंगस्टर संपत

इसके बाद गैंगस्टर संपत नेहरा मुंबई गया और उसने सलमान खान के घर की रेकी की थी. लेकिन ज्यादा दूरी होने की वजह से वो सलमान खान तक नहीं पहुंच पाया था. रेकी के दौरान ही संपत सलमान को निशाना बनाना चाहता था. मगर उसके पास पिस्टल थी, जिससे वो ज्यादा दूरी से शूट नहीं कर सकता था. इसके बाद एक बार फिर संपत नेहरा ने अपने गांव के दिनेश फौजी के जरिए एक स्प्रिंग रायफल मंगवाई थी. स्प्रिंग रायफल लारेंस बिश्नोई ने अपने जानकार अनिल पांड्या से 3 से 4 लाख रुपये की कीमत में खरीदी थी. वो रायफल दिनेश फौजी के पास रखी थी, जिसे पुलिस ने ट्रेस कर लिया और फिर संपत नेहरा को भी गिरफ्तार कर लिया गया था.

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क्या है काला हिरण शिकार मामला?

बात साल 1998 की है. सितंबर-अक्टूबर के महीने में जोधपुर में फिल्म 'हम साथ साथ हैं' की शूटिंग चल रही थी. आरोप है कि इसी दौरान सलमान खान अपने साथी कलाकारों के साथ भवाद गांव की तरफ शिकार करने के लिए गए थे. जहां 27-28 सितंबर 1998 की रात घोड़ा फार्म हाउस में काले हिरण का शिकार किया गया. जिसका इल्जाम सलमान खान पर लगा था. इसके लिए उन्हें दोषी भी करार दिया गया था. 

1 अक्टूबर 1998

जोधपुर का कांकाणी गांव. रात के करीब 2 बजे थे. तभी खेतों के आसपास अंधेरे में हेडलाइट की रोशनी चमकी. सफेद रंग की जिप्सी एक ही इलाके में लगातार घूम रही थी. गांव के लोगों को समझते देर नहीं लगी कि यहां शिकारी आ धमके हैं. इसी दौरान गोली चली. गोली की आवाज सुनते ही गांववालों का शक यकीन में बदल गया. आधी रात को गोली चलने की आवाज सुनकर सभी गांव वाले जग गए और लाठी डंडों के साथ उस तरफ दौड़ पड़े जिधर से गोली चलने की आवाज आई थी. जब गांव वाले मौके पर पहुंचे तो देखा दो काले हिरणों का शिकार किया गया है. गांववालों ने एक जिप्सी को वहां से भागते देखा.

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जिप्सी में मौजूद थे सलमान

ग्रामीणों ने उस जिप्सी का पीछा किया जिसमें कुछ नौजवान लड़के-लड़कियां सवार थे. लेकिन वे लोग जिप्सी लेकर वहां से भाग खड़े हुए. बाद में ग्रामीणों की शिकायत पर इस मामले में केस दर्ज किया गया. बाद में एक चश्मदीद ने पुलिस को बताया था कि शिकार करने जिप्सी में नौजवानों के बीच मौजूद सलमान खान को लोगों ने फौरन पहचान लिया था. 

15 अक्टूबर 1998

केस दर्ज था, लिहाजा कार्रवाई भी शुरू हो चुकी थी. इस संबंध में वन अधिकारी ललित बोड़ा ने जोधपुर के लूणी पुलिस थाने में 15 अक्टूबर 1998 को सलमान खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी. इस मामले में 4 अलग-अलग केस दर्ज हुए थे.

सजा और जमानत

बाद में इस मामले में सलमान खान दोषी करार दिए गए थे. जबकि उनके साथी कलाकारों को बरी कर दिया गया था. कुल मिलाकर सलमान खान को इस मामले में 4 बार जेल जाना पड़ा था. हालांकि हर बार वो जमानत पर रिहा हो गए थे.
 

 

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