
चीन सिर्फ भारत और ताइवान से नहीं उलझ रहा बल्कि वो जापान से भी तनातनी कर रहा है. वो जापान के द्वीपों पर कब्ज़ा करने की कोशिश में है. इसी बीच जापान ने अपने समंदर में अमेरिका के साथ मिलकर एक नए युद्धाभ्यास की शुरुआत कर दी है. ऑपरेशन कीन स्वार्ड नाम के इस युद्धाभ्यास का मकसद है चीन को रोकना. साथ ही ये संदेश भी देना कि अगर उसने अपनी हदों को तोड़ने की कोशिश की तो कहीं इसी समंदर से महायुद्ध की शुरुआत ना हो जाए.
चीन ताइवान पर कब्जा करना चाहता है. वो भारत के अंदरुनी मामलों में दखल देने की गुस्ताख़ी करता है. पूरे साउथ चाइना सी को अपना बताता है. साउथ चाइना सी के किनारे बसे देशों में घुसपैठ करता है. ईस्ट चाइना सी में जापानी द्वीप पर भी दावेदारी ठोकता है. और तो और रह-रह कर वो रूस के एक शहर को भी अपना बताता है.
ज़ाहिर है चीन के इस रवैये से हर कोई आजिज आ चुका है और इसीलिए समंदर में चीन को रोकने की तैयारी पूरे जोर शोर से चल रही है. जापानी जल क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागीरी रोकने के लिए जापान और अमेरिका ने एक बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. ये युद्धाभ्यास एक साथ तीनों मोर्चों पर यानी समंदर, जमीन और आसमान में हो रहा है और इसी अभ्यास का नाम है कीन स्वॉर्ड.
इस युद्धाभ्यास का मकसद है चीन को जापानी जलक्षेत्र में घुसने और जापानी द्वीपों पर दावा ठोकने से रोकना. लेकिन ये तो एक ही युद्धाभ्यास है. अभी अगले महीने बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में मालाबार सैन्य अभ्यास की तैयारी है. जो चीन की विस्तारवादी नीति के जवाब का हिस्सा है. इस सैन्य अभ्यास में क्वाड के चारों सदस्य देश भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल होने वाले हैं और कीन स्वॉर्ड युद्धाभ्यास से परेशान चीन मालाबार एक्सरसाइज की ख़बर से हलकान हो रहा है.
अमेरिका अरब सागर से लेकर साउथ चाइना सी तक कड़ी नजर रख रहा है. हालांकि साउथ चाइना सी में लगातार अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा चीन ने अभी भी अपना युद्धाभ्यास जारी रखा है. चीनी नौसेना ने अभी हाल ही में भारत के पश्चिम में स्थित अदन की खाड़ी में लाइव फायर ड्रिल की. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपने ट्विटर हैंडल पर इसकी जानकारी देते हुए इसका एक प्रोपेगैंडा वीडियो भी जारी किया है.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अभी हाल ही में मरीन सैनिकों से कहा था कि वो युद्ध के लिए हर पल तैयार रहें. इसके बाद चीन ने ताइवान पर हमले की तैयारी में अपने दक्षिण पूर्व तट पर उन्नत हाइपरोसोनिक मिसाइल डीएफ 17 की तैनाती भी शुरू कर दी. लेकिन यहां चीन को वाक ओवर मिलने की गुंजाइश तो थी नहीं, सो ताइवान की रक्षा के लिए अमेरिकी युद्धपोत ने साउथ चाइना सी में लंगर डाल दिया. अमेरिकी युद्धपोत ने ताइवान स्ट्रेट में गश्त लगाकर साफ कर दिया कि अगर चीन ने ताइवान की ओर नजर उठाकर भी देखा तो अंजाम बुरा होगा.
असल में जापान और अमेरिका का युद्धाभ्यास चीन को एक करारा जवाब है. हाल ही में ईस्ट चाइना सी में युद्धाभ्यास कर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने वाले चीन को जापान ये बताना चाहता है वो किसी भी आपात स्थिति में ड्रैगन का सिर कुचल सकता है. पिछले महीने योशिहिदे सुगा के जापान के प्रधानमंत्री बनने के बाद कीन स्वार्ड पहला बड़ा युद्धाभ्यास है. चीन ईस्ट चाइना सी में कई जापानी द्वीपों को अपना बताता है. अक्सर वह इन इलाकों में घुस आता है.
वैसे तो कीन स्वॉर्ड नाम का यह युद्धाभ्यास हर दूसरे साल होता है. इस युद्धाभ्यास में अमेरिका और जापान के दर्जनों युद्धपोत, सैकड़ों विमान और करीब 46 हजार सैनिक हिस्सा लेते हैं. इस बार ये युद्धाभ्यास 5 नवंबर तक चला. इसमें पहली बार साइबर और इलेक्ट्रानिक वारफेयर ट्रेनिंग को शामिल किया गया है. जापान का सबसे बड़ा हेलिकॉप्टर कैरियर कागा और अमेरिकी युद्धपोत USS रोनाल्ड रीगन इस युद्धाभ्यास में शामिल है.
कागा हेलिकॉप्टर करियर के टॉप मिलिट्री कमांडर जनरल कोजी यामाजाकी के मुताबिक जापान के आसपास सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई है. इसलिए जापान और अमेरिका को अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना पड़ रहा है. कागा हेलिकॉप्टर करियर की लंबाई 814 फीट है. यह हाल ही में साउथ चाइना सी और हिन्द महासागर की गश्त लगाकर लौटा है. अगले साल में इसमें कुछ और बदलाव किया जाएगा ताकि एफ 35 स्टील्थ लड़ाकू विमान भी इस पर आ सकें.
ईस्ट चाइना सी में सेनकाकू और दियायू द्वीप के आसपास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से जापान की चिंता बढ़ती जा रही है. इन दोनों जापानी द्वीपों को चीन अपना बताता है. चीन के खिलाफ मजबूत मोर्चा बनाने के लिए जापानी प्रधानमंत्री ने इसी महीने वियतनाम और इंडोनशिया की यात्रा की थी. भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड का गठन भी इसी मोर्चेबंदी का हिस्सा है. क्वाड को मिनी नाटो बनाने का लक्ष्य है. संदेश साफ है अगर चीन नहीं मानता है और समंदर में इसकी ये हरकतें जारी रहती हैं, तो शायद यहीं से महायुद्ध की शुरुआत हो जाए.