
Gangs of Wasseypur: ये वासेपुर है, यहां कबूतर भी एक पंख से उड़ता है और दूसरे से अपनी इज्जत बचाता है...बॉलीवुड के दिग्गज निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' का ये डायलॉग उस इलाके की पूरी कहानी बयां कर देता है. झारखंड के धनबाद जिले में एक छोटा सा कस्बा वासेपुर है. शाम ढलते ही आज भी यहां लोग अपने घरों से निकलने में डरते हैं. यहां मौजूद कोयले की खदानों की वजह से करीब 6 दशक से यहां की दुनिया जरायम हो चुकी है. अलग-अलग समयावधियों में यहां कई गैंग सक्रिय रहे हैं. इस वक्त फहीम खान, प्रिंस खान, अखिलेश सिंह, आशीष मिश्रा से लेकर अमन सिंह, आशीष रंजन तक का गैंग सक्रिय है.
झारखंड के कोयलांचल में मौजूद इन सभी गैंग्स में से अमन सिंह का गैंग सबसे खतरनाक माना जाता था. गैंगस्टर अमन की बीते रविवार धनबाद जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई. हैरानी की बात ये है कि इस हत्याकांड की जिम्मेदारी उसके ही गुर्गे आशीष रंजन उर्फ छोटू ने ली है. छोटू ने अमन की हत्या के बाद एक ऑडियो क्लिप जारी किया है, जिसमें वो ये कहता हुई सुनाई दे रहा है, ''हां, अमन सिंह को मैंने ही मरवाया है. मैं इसकी तैयारी बहुत दिनों से कर रहा था. हमारी योजना थी कि कोर्ट में पेशी के दौरान उसे गोली मार देंगे, लेकिन हमारी साजिश की उसे भनक लग गई थी. मैं उसे अपना बड़ा भाई मानता था, लेकिन उसने मेरे साथ धोखा किया.''
अमन सिंह के गुर्गे छोटू के नाम से ऑडियो वायरल
छोटू के नाम से वायरल हो रहे ऑडियो में ये भी कहा गया है कि उसने ही जेल के अंदर हथियार पहुंचाया था. अमन की हत्या करने वाला आरोपी उसके दावे की पुष्टि कर देगा. उसका ये भी कहना है कि वो धनबाद के कारोबारियों से कोई मतलब नहीं रखेगा, लेकिन कोयले के व्यापार से उसे कोई हटा नहीं सकता. छोटू की इन बातों से समझा जा सकता है कि इस गैंगवार के पीछे की असली वजह कोयला ही है. अमन सिंह भी कोयले के कारोबार में बहुत सक्रिय था. वो बिहार और यूपी जाने वाले कोयले में धनबाद के कोयला तस्करों से 30 फीसदी कमीशन लेता था. कुछ महीने पहले तक छोटू अपने आका अमन के एक इशारे पर किसी की भी जान ले लेता था.
अमन सिंह की हत्या के पीछे नजर आ रही है साजिश
गैंगस्टर अमन सिंह काफी समय से अपनी जान पर खतरा बता रहा था. यही वजह है कि उसे कई बार अलग-अलग जेलों में शिफ्ट किया गया था. उसे कई गैंग्स से खतरा था. उसने कई रसूखदार लोगों की हत्याएं की थीं, वो लोग भी इसकी जान के पीछे पड़े हुए थे. उसकी हत्या के पीछे एक बड़ी साजिश नजर आ रही है. क्योंकि उसका हत्यारोपी सुंदर महतो कुछ दिनों पहले ही चोरी के आरोप में जेल में आया था. उसके पास मौजूद आधार कार्ड के अनुसार वो बोकारो का रहने वाला है. लेकिन पुलिस को लगता है कि उसका आधार कार्ड फर्जी है. बताया जा रहा है कि वो यूपी का रहने वाला है. उसे साजिश के तहत पहले झारखंड भेजा गया. फिर उस पर चोरी का आरोप लगाकर जेल लाया गया.
पुलिसवाले का बेटा ऐसे बना मुन्ना बजरंगी का शागिर्द
अमन सिंह उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के राजे सुल्तानपुर थाना क्षेत्र के कादीपुर गांव का रहने वाला था. वो पढ़ने-लिखने में बहुत अच्छा था. स्पोर्ट्स में भी उसकी रुचि थी. उसके पिता उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में सिपाही थे. वो उनकी तरह वर्दी पहनना चाहता था, लेकिन गांव में हुए एक झगड़े ने उसकी जिंदगी बदल दी. इस झगड़े की वजह से साल 2010 में वो पहली बार जेल गया. वहां उसकी मुलाकात उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी से हो गई. मुन्ना की छत्रछाया में आने के बाद उसे जरायम की दुनिया रास आने लगी. वो उसका शागिर्द बन गया और जुर्म का तालीम हासिल कर ली. इसके बाद तो वो मुन्ना बजरंगी के इशारे पर लगातार वारदातों को अंजाम देने लगा.
डिप्टी मेयर के मर्डर के बाद यूं बना कुख्यात गैंगस्टर
साल 2015 में अमन सिंह ने आजमगढ़ के रहने वाले एक डॉक्टर की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस हत्याकांड की वजह से उसके नाम का सिक्का चलने लगा था. अब वो मुन्ना बजरंगी की तरह कुख्यात हो चुका था. उसने उत्तर प्रदेश से बाहर अपने पांव पसारने शुरू कर दिए. मुन्ना बजरंगी की तरह वो लोगों की सुपारी लेकर हत्याएं करने लगा. साल 2017 में झारखंड के धनबाद में पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह सहित चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस वारदात के समय बदमाशों ने 100 से ज्यादा राउंड गोलियां चलाई थी. इस खौफनाक हत्याकांड में अमन सिंह का नाम सामने आया. दावा किया गया कि उसने बीजेपी विधायक संजीव सिंह के इशारे पर वारदात को अंजाम दिया है.
कोयलांचल में धाक जमाकर वसूलने लगा था रंगदारी
झारखंड के झरिया से विधायक संजीव सिंह मृतक नीरज सिंह के चचेरे भाई थे. पुलिस ने उनको इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड माना था. पुलिस ने इस मामले में शूटर अमन सिंह, कुर्बान अली, शिबू उर्फ सागर, चंदन सिंह उर्फ सतीश को गिरफ्तार कर लिया था. इस वारदात के बाद पूरे धनबाद में अमन सिंह का खौफ हो गया. वो जेल के अंदर से ही अपना नेटवर्क चलाने लगा. उसके गुर्गे एक इशारे पर किसी को धमकी तो किसी की जान ले लेते थे. इस तरह उसने कोयलांचल में अपनी धाक जमाकर रंगदारी वसूलनी शुरू कर दी. कोयला तस्करों से हिस्सा लेने लगा. यहां से मिले पैसों से उसने झारखंड, बिहार, वेस्ट बंगाल, उत्तर प्रदेश से लेकर नेपाल तक अकूत संपत्ति बनाई. साल 2022 में इसका खुलासा हुआ था.
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नाराज हुआ तो रांची के जेलर की हत्या की सुपारी दे दी
पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड में अमन सिंह को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार करके धनबाद लाया गया था. उसकी अकड़ ऐसी थी कि वो पुलिसवालों को भी कुछ नहीं समझता था. उसके मामले की जांच कर रहे एक इंस्पेक्टर ने जब सख्ती दिखाई, तो उसने उसे भी धमकी दे दी. पूछताछ के बाद उसे धनबाद से रांची की सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया. वहां जाने के बाद किसी बात पर जेलर से उसका विवाद हो गया. इससे नाराज होकर अमन ने जेलर की हत्या की साजिश रच डाली. उसने अपने सबसे खास गुर्गे अभिनव प्रताप सिंह को इसकी जिम्मेदारी दे दी. लेकिन वो इस वारदात को अंजाम नहीं दे पाया. इस बात का खुलासा तब हुआ, जब रंगदारी के एक मामले में पुलिस अमन सिंह से पूछताछ की थी.
अमन सिंह का गुरु था मुख्तार अंसारी का खास गुर्गा
शूटर मुन्ना बजरंगी बाहुबली रहे माफिया मुख्तार अंसारी का खास गुर्गा था. उसकी भी जेल के अंदर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उसे कोर्ट में पेशी के लिए झांसी से बागपत लाया गया था. उसका असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह था. वो जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव का रहने वाला था. उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे बड़ा आदमी बनाना चाहते थे, लेकिन उसने 5वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी. उसे जरायम की दुनिया रास आने लगी. छोटे-मोटे अपराध करने के बाद उसने अपनी साख बढ़ाने के लिए 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली मुख्तार अंसारी का हाथ पकड़ लिया. उसके गैंग में शामिल होकर ठेकेदारी और रंगदारी का काम देखने लगा. मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय की ठेकेदारी को लेकर अदावत जगजाहिर थी.
कृष्णानंद राय हत्याकांड में मुन्ना बजरंगी का नाम
माफिया बृजेश सिंह की शह पर कृष्णानंद राय का गैंग फल फूल रहा था. दोनों गैंग अपनी ताकत बढ़ा रहे थे. इनके संबंध अंडरवर्ल्ड के साथ भी जुड़ गए थे. कृष्णानंद राय का बढ़ता प्रभाव मुख्तार को रास नहीं आ रहा था. उन्होंने कृष्णानंद राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंप दी. मुख्तार से फरमान मिलने के बाद मुन्ना बजरंगी ने बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने की साजिश रच डाली. 29 नवंबर 2005 को मुख्तार के इशारे पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय को दिन दहाड़े मौत की नींद सुला दिया. उसने अपने साथियों के साथ लखनऊ हाइवे पर कृष्णानंद राय की दो गाड़ियों पर एके-47 से 400 गोलियां बरसाई थी.