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सरकारी दौरा, सिस्टम से ठगी और PMO का नाम... जानिए किरन पटेल की साजिश की पूरी कहानी

जम्मू कश्मीर जैसे राज्य में तैनात सरकारी अफसरों को गुजराती ठग किरन पटेल पर शक क्यों नहीं हुआ? छह महीने तक ये पूरे सिस्टम को बेवकूफ कैसे बनाता रहा? तो चलिए हाल के वक्त में सिस्टम के इस सबसे बड़े ठग की पूरी दास्तान आपको बताते हैं.

गुजराती ठग किरन पटेल ने 4 बार जम्मू कश्मीर प्रशासन को बेवकूफ बनाया गुजराती ठग किरन पटेल ने 4 बार जम्मू कश्मीर प्रशासन को बेवकूफ बनाया
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 11:33 PM IST

एक शख्स ने जम्मू कश्मीर जैसे इलाके में जाकर छह महीने तक पूरे सिस्टम को अकेले बेवकूफ बनाए रखा. मगर कोई ऐसा कैसे कर सकता है. एक आम शख्स सरकारी सिस्टम, सिस्टम के प्रोटोकॉल और ब्यूरोक्रेसी के अंदरखाने की पूरी जानकारी कैसे और कहां से हासिल कर सकता है? इन सवालों के जवाब अभी मिलना बाकी है. हम बात कर रहे हैं गुजरात के शातिर ठग किरन पटेल की.

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चार सरकारी दौरे
किरन पटेल आपको याद तो होगा? ये वो शख्स है जिसकी सच्चाई जब बाहर आई तो आम लोग तो छोड़िये, प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठे आला अफसरों तक के होश उड़ गए थे. ये वही किरण पटेल है, जिसने खुद को पीएमओ का आला अफसर बता कर छह महीनें में जम्मू कश्मीर के चार सरकारी दौरे कर डाले. हर दौरा तीन से पांच दिन का था. इन चार दौरों के दौरान वो कम से कम दो आईएएस अफसरों से मिला. दर्जनों जूनियर अफसरों के साथ मीटिंग की. 

हथियारबंद सुरक्षा गार्ड और बुलेटप्रूफ गाड़ी
यही नहीं, उस शातिर ठग ने कम से कम गुजरात के तीन बिजनेसमैन की सरकारी अधिकारियों के साथ मीटिंग कराई और तो और दर्जन भर हथियारबंद सुरक्षा गार्ड और बुलेटप्रूफ गाड़ी में साहब एलओसी के करीब तक घूम आए थे. पांच सितारा होटल में सरकारी मेहमान बनकर रुके थे. 

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सबसे बड़े ठग की पूरी दास्तान
पर सवाल उठता ये है कि ये सब कुछ उसने किया कैसे? किया तो किया जम्मू कश्मीर जैसे राज्य में तैनात सरकारी अफसरों को इस पर शक क्यों नहीं हुआ? छह महीने तक ये पूरे सिस्टम को बेवकूफ कैसे बनाता रहा? तो चलिए हाल के वक़्त में सिस्टम के इस सबसे बड़े ठग की पूरी दास्तान आपको बताते हैं. वैसे तो जनाब फिलहाल जेल में हैं. और कायदे से अब सचमुच ऑफिशियली सरकारी मेहमान हैं. जेल पहुंचने से पहले गुजरात के इस ठग किरन पटेल ने जो कुछ पुलिस को बताया. उसकी पूरी कहानी कुछ यूं हैं.

हैरान कर देगी ये कहानी 
किरन पटेल की ठगी की ये कहानी शुरू होती है दो लोगों से. पहला आरएसएस के एक कार्यकर्ता त्रिलोक सिंह चौंहान और दूसरा 2015 बैच के आईएएस अफसर और फिलहाल पुलवामा में तैनात डिप्टी कमिश्नर बशीरुल हक चौधरी से. इन दोनों से ये कहानी कैसे शुरू होती है? उसे जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि किरन पटेल ने कब-कब कैसे-कैसे और किन-किन लोगों की मदद से छह महीने में चार बार जम्मू कश्मीर का दौरा किया. वो भी पीएमओ का एक आला अफसर बनकर. 

25 से 27 अक्टूबर 2022

यही वो पहली तारीख थी, जब किरन पटेल पहली बार श्रीनगर लैंड किया था. उसके साथ उसकी पत्नी और बेटी भी थी. पुलवामा के डिप्टी कमिश्नर बशीरुल हक चौधरी ने तब जम्मू कश्मीर पुलिस के एसएसपी (सुरक्षा) शेख जुल्फीकार को किरन पटेल के लिए एक बुलेट प्रूफ गाड़ी, दो एस्कॉर्ट गाड़ी और सशस्त्र सुरक्षा बल यानी एसएसबी के दर्जन भर सुरक्षा गार्ड मुहैया कराने का हुक्म दिया था. इसी के बाद श्रीनगर एयरपोर्ट से ही सुरक्षा काफिले के साथ पटेल को बाकायदा श्रीनगर के पांच सितारा ललित ग्रैंड होटल में पहुंचाया गया. अपने इस पहले दौरे के दौरान पटेल बीजेपी के कई लोकल नेताओं से मिला. जिसमें मीडिया इंचार्ज मंजूर भट्ट भी थे. उसने लोकल पत्रकारों से भी मुलाकात की. पूरी सरकारी मेहमानवाजी के बाद पूरी शान के साथ पहली ट्रिप पूरी कर वो अपने परिवार के साथ अहमदाबाद वापस लौट गया.

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6 से 8 फरवरी 2023

दूसरे दौरे में भी पटेल को वही सुरक्षा मुहैया करवाई जाती है. इस बार भी ये सुरक्षा उन्हीं डिप्टी कमिश्नर बशीरुल हक चौधरी के कहने पर दी गई थी. इस बार पटेल अपने परिवार के साथ नहीं बल्कि गुजरात के एक बिजनेसमैन अमित पांड्या के साथ आया था. अमित पांड्या गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात एडिश्नल पीआरओ हितेश पांड्या के बेटे हैं. पटेल के साथ बेटे का नाम सामने आने के बाद हितेश पांड्या को मुख्यमंत्री कार्यालय से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था. उन्होंने इस्तीफा दे भी दिया. उस दौरे के दौरान पटेल ने पांड्या और डिप्टी कमिश्नर चौधरी की मीटिंग भी कराई थी. मीटिंग के दौरान पांड्या ने डिप्टी कमिश्नर को घाटी में स्मार्ट टावर बनाने के लिए एक प्रेजेंटेशन भी दिया था.

टूरिज्म डिपार्टमेंट की तरफ से थे इंतजाम

अपने इस दूसरे दौरे के दौरान पटेल गुलमर्ग और कुलगाम घूमने गया था. वहां उसने वॉटरफॉल के भी मजे लिए. ये पूरा दौरा जम्मू कश्मीर टूरिज्म डिपार्टमेंट की तरफ से था. इसी दौरे के दौरान पटेल उरी भी गया था. LoC के सबसे करीबी पोस्ट अमन सेतु पर उसने तस्वीरें भी खिंचवाई. फिर इन्हें बाकायदा सोशल मीडिया पर भी डाल दिया था. जिनमें उसके इर्द गिर्द एसएसबी के सुरक्षा गार्ड खड़े दिखाई दे रहे थे. 

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24 से 28 फरवरी 2023

तीसरा दौरा उसने कुछ जल्दी ही कर डाला था. पहले दो दौरों की तरह इस बार भी डिप्टी कमिश्नर चौधरी के हुक्म पर वैसी ही सुरक्षा पटेल को दी गई थी. इस दौरे पर पटेल के साथ अमित पांड्या के अलावा डॉक्टर हार्दिक चंदाना भी मौजूद थे. डॉक्टर हार्दिक चंदाना भी गुजरात से हैं. डॉक्टर हार्दिक चंदाना पुलवामा में एक डॉक्टर कॉन्फ्रेंस रखवाना चाहते थे. इसके लिए बाकायदा पुलवामा के डीसी चौधरी के साथ मीटिंग भी रखी गई थी. अपने इस तीसरे दौरे के दौरान पटेल ने जय सीतापारा के साथ भी मीटिंग की. जय भी गुजरात से हैं और उनका स्टील का कारोबार है. हालांकि वो रहते कश्मीर में हैं. पटेल ने मीटिंग के दौरान जय से वायदा किया कि वो कश्मीर में कोल्ड स्टोरेज खुलवाने में उनकी मदद करेगा. ताकि कोल्ड स्टोरेज में सेबों को रखा जाए और फिर उसे कश्मीर से अहमदाबाद भेजा जाए. पुलिस ने पांड्या चंदाना, और जय सीतापारा से भी लंबी पूछताछ की है. 

आईएएस अधिकारियों के साथ बैठक

पूछताछ में पता चला कि जालसाज पटेल ने इन्हें भी नहीं बख्शा. श्रीनगर दौरे के हवाई टिकट और होटल का बिल वो इन्हीं से वसूल करता था. इस तीसरे दौरे के दौरान पटेल पुलवामा के अलावा बड़गाम भी गया था. वहां वो कुछ आईएएस अफसरों से भी मिला था. इनमें से एक जम्मू कश्मीर टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी जेकेटीडीसी के एमडी मिंग शेरपा भी थे. पटेल ने मीटिंग के दौरान पांच सितारा सेंटूर होटल को फिर से डेवलप करने का भी सुझाव रखा था. 

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2 मार्च  2023

तीसरे दौरे के सिर्फ दो दिन बाद चौथी बार किरन पटेल अहमदाबाद से श्रीनगर एयरपोर्ट लैंड करता है. एयरपोर्ट के बाहर उसके लिए सुरक्षा का वही काफिला मौजूद था. सुरक्षा काफिले के साथ पटेल ललित ग्रैंड होटल पहुंचता है. मगर होटल पहुंचने के कुछ देर बाद वो सचमुच सरकारी मेहमान बन जाता है. उसी होटल से पुलिस पटेल को गिरफ्तार कर लेती है. जिस वक्त पटेल को गिरफ्तार किया जा रहा था, तब वो कमरे के वॉशरूम में अपने विजिटिंग कार्ड को फ्लश कर रहा था. उसका वो विजिटिंग कार्ड जिस पर लिखा था एडिश्नल डायरेक्टर प्लानिंग एंड स्ट्रेटजी, पीएमओ.

त्रिलोक सिंह चौहान ने बुनी ठगी की कहानी

अब सवाल ये है कि छह महीने और चार दौरों के बाद पटेल का सच सामने आया कैसे? तो इसकी भी एक कहानी है. ठगी की इस कहानी की पहली कड़ी जाने अनजाने जो शख्स बुनता है, उसका नाम है त्रिलोक सिंह चौहान. चौहान आरएसस का कार्यकर्ता है और 2006 से ही जम्मू कश्मीर में काम कर रहा है. जुलाई 2022 में चौहान अमरनाथ यात्रा पर गया था. लेकिन लैंडस्लाइड की वजह से वो फंस गया. लोकल प्रशासन फंसे यात्रियों को निकालने की कोशिश कर रहा था. इसमें पुलवामा के डिप्टी कमिश्मर बशीरुल हक चौधरी आगे-आगे थे. इसी दौरान एक लोकल फोटोग्राफर ने चौहान की मुलाकात चौधरी से कराई. चौहान के बारे में जानने के बाद बीसी चौधरी ने बाकायदा उसे अमरनाथ गुफा के दर्शन भी करवाए. 

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चौहान ने डीसी से कराई थी ठग किरन पटेल की मुलाकात

इसी दोस्ती के दौरान ही एक बार डीसी ने चौहान से दिल्ली में बैठे ताकतवर लोगों से मिलवाने की बात कही. किरण पटेल त्रिलोक सिंह चौहान को 2016 से जानता था. अक्टूबर 2022 में ही पटेल ने चौहान से जम्मू कश्मीर के कुछ अफसरों से मिलवाने की बात कही. इसी के बाद चौहान ने पटेल को डीसी चौधरी से मिलवाया. पटेल ने चौधरी को बताया कि वो पीएमओ में तैनात है. इसी के बाद जब 25 अक्टूबर 2022 को पटेल पहली बार श्रीनगर के दौरे पर गया, तब पुलवामा के डीसी चौधरी ने ही एसएसपी (सुरक्षा) जुल्फिकार से कह कर उसे सुरक्षा मुहैया करवाई थी. इतना ही नहीं, चौधरी पटेल से मिलने ललित ग्रैंड होटल भी गये थे. चूंकि त्रिलोक सिंह चौहान ने पटेल को डिप्टी कमिश्नर चौधरी से मिलवाया था, इसलिए चौधरी को पटेल पर जरा भी शक नहीं हुआ. 

बड़गाम के डीसी फखरूद्दीन हामिद ने की छानबीन

पटेल पर पहला शक तब गया जब वो तीसरी बार 24 से 28 फरवरी के दरम्यान श्रीनगर गया था. इस दौरान वो बड़गाम भी गया था. बड़गाम के दौरे पर ही पहली बार बड़गाम के डिप्टी कमिश्नर फखरूद्दीन हामिद को किरन पटेल पर कुछ शक हुआ. इसी के बाद 24 फरवरी को ही फखरुद्दीन हामिद ने खुद ही किरन पटेल की जांच शुरू कर दी. सबसे पहले उन्होंने पीएमओ का वेबसाइट चेक किया, लेकिन पीएमओ के वेबसाइट में किरन पटेल नाम का कोई भी अफसर मौजूद नहीं था. अब डीसी का शक यकीन में बदलने लगा. इसके बाद उन्होंने अपने सोर्सेस से पहले पीएमओ और फिर बाद में कई दूसरे डिप्टी कमिश्नर से किरन पटेल के बारे में पूछताछ की. 

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सीनियर अफसरों को डीसी ने भेजी थी रिपोर्ट

हैरत की बात ये थी कि कोई भी किरन पटेल को नहीं जानता था. इसी दौरान एक मार्च को बड़गाम के ही दूधपथरी डेवलपमेंट अथारिटी के सीईओ ने बताया कि एक मार्च को किरन पटेल फिर से आ रहा है. ये सुनते ही फखरुद्दीन हामिद ने उसे किसी भी तरह से एंटरटेन करने से मना कर दिया. इसी के साथ-साथ अगले ही दिन यानी 2 मार्च को उन्होंने किरन पटेल की रिपोर्ट अपने सीनियर अफसरों को भेज दी. 

सीआईडी की जांच में हुआ सच का खुलासा

इससे पहले फरवरी के आखिरी हफ्ते में ललित ग्रैंड होटल के कुछ स्टाफ ने पटेल को लेकर सीआईडी को कुछ जानकारी दी थी. होटल स्टाफ ने सीआईडी को बताया कि एक शख्स जो खुद को पीएमओ का आला अधिकारी बताता है उसका बर्ताव बेहद अजीब है. उसे देखकर लगता नहीं है कि वो बड़ा अफसर है. मामला कुछ गड़बड़ लग रहा है. सीआईडी ने तब तक अपनी तफ्तीश शुरू की और फरवरी के खत्म होते होते इस नतीजे पर पहुंच गई कि पटेल एक जालसाज है. लेकिन तब तक पटेल श्रीनगर से अहमदाबाद जा चुका था.

ऐसे हुई गिरफ्तारी

अब एक तरफ बड़गाम के डीसी की रिपोर्ट और दूसरी तरफ सीआईडी की रिपोर्ट सामने आ चुकी थी और ये साफ हो चुका था कि किरन पटेल छह महीने से सिस्टम को ठग रहा है. लेकिन तब तक वो श्रीनगर छोड़ चुका था. उधर किरन पटेल अब तक अंधेरे में था. उसे पता ही नहीं था कि उसका भांडा फूट चुका है. लिहाजा 2 मार्च को पांचवीं बार वो श्रीनगर का दौरा प्लान करता है. पुलवामा के डीसी चौधरी भी अब तक उसकी असलियत से अनजान थे. लिहाजा 2 मार्च को श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचते ही पटेल फिर से सुरक्षा के काफिले के बीच होटल ललित ग्रैंड पहुंचता है.

बाथरूम में घुस गए थे एसपी

उसके आने की खबर पहले से ही थी. लिहाजा जैसे ही वो होटल में चैकइन करता है, श्रीनगर के एसपी अपनी टीम के साथ कमरे में धावा बोल देते हैं और पटेल को गिरफ्तार कर लेते हैं. गिरफ्तारी के वक्त पटेल पुलिस वालों से गुजारिश करता है कि उसे एक मिनट के लिए वॉशरूम जाने दें. वो वॉशरूम चला जाता है. लेकिन एसपी को शक था. लिहाजा, पीछे-पीछे वो भी वाशरूम में घुस जाते हैं. अंदर पटेल पीएमओ के अपने विजिटिंग कार्ड को फ्लश कर रहा था. 

सिस्टम की लापरवाही उजागर

कायदे से प्रोटोकॉल के तहत किसी अफसर के किसी राज्य के दौरे के दौरान दी जाने वाली सुरक्षा और बिछाए जाने वाले रेडकार्पेट का फैसला गृह मंत्रालय के एडिश्नल चीफ सेक्रेटरी करते हैं. किसी भी दौरे के दौरान ऐसे अफसरों को एंटरटेन करने से पहले संबंधित विभाग या पुलिस को गृह मंत्रालय के एडिश्नल चीफ सेक्रेटरी का आदेश आता है वो भी लिखित में. इसके बाद खुफिया विभाग के इस इनपुट पर कि उस अफसर की जान को कितना खतरा है? उसी हिसाब से उसे सुरक्षा दी जाती है. जबकि पटेल के केस में ऐसे किसी भी नियम का कोई पालन नहीं किया गया. यहां तक कि गृह मंत्रालय भी छह महीने में हुए इन चार दौरों के बारे में अंधेरे में था. 

गुजरात में भी ठगी

किरण पटेल को कश्मीर की जेल से निकालकर फिलहाल गुजरात ले जाया गया है. वजह ये है कि उसने सिर्फ कश्मीर के अफसरों को ही नहीं ठगा बल्कि गुजरात में भी अपनी कलाकारी दिखा चुका था. कम से कम तीन मामले गुजरात में भी उसके खिलाफ दर्ज हैं.
 

 

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