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IS खुरासान की मैगजीन का पहला संस्करण जारी, भारत में फिदायीन हमला करने आए आतंकी को बनाया कवर बॉय

काबुल एयरपोर्ट पर फिदायीन हमला करने वाला हमलावर साल 2017 में भारत में एक बड़े मिशन के लिए दिल्ली आया था और वो मिशन था दिल्ली में बड़ा फिदायीन हमला करना. वो दिल्ली में बहुत बड़ा हमला करने के लिए रेकी कर चुका था.

इस मैगजीन में एक फिदायीन हमलावर की कहानी को कवर स्टोरी बनाया गया है इस मैगजीन में एक फिदायीन हमलावर की कहानी को कवर स्टोरी बनाया गया है
अरविंद ओझा
  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 6:30 PM IST
  • आतंकी संगठन की नई मैगजीन का पहला अंक जारी
  • काबुल एयरपोर्ट पर हमला करने वाले फिदायीन पर कवर स्टोरी
  • साल 2017 में भारत में हमला करना चाहता था वही फिदायीन

इस्लामिक स्टेट खुरासान ने अपनी मैगजीन वॉयस ऑफ खुरासान (Voice of Khurasan) का पहला अंक जारी किया है. जिसमें अफगानिस्तान से भारत में फिदायीन हमला करने आए आतंकी को कवर बॉय बनाया गया है. ये आतंकी अफगानिस्तान में पैदा हुआ और पाकिस्तान में हायर एजुकेशन हासिल कर चुका है. उसे एक मिशन के तहत भारत में फिदायीन हमला करने भेजा गया था लेकिन भारतीय एजेंसी ने उसे पकड़ कर अमेरिकी एजेंसी CIA के हवाले कर दिया था. 

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वही नौजवान आतंकी आखिरकार साल 2020 में जेल से छुटने के बाद काबुल एयरपोर्ट पर मानव बम बनकर पहुंचा और 13 अमेरिकी फौजियों को मौत के घाट उतार दिया. आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान ने Voice of Khurasan नाम से अपनी एक मैगजीन रिलीज की है. जिसमें उस आतंकी पर कवर स्टोरी की गई है. इस प्रोपगेंडा मैगजीन में आतंकी संगठन ने अफगानिस्तान में तालिबान राज और उसपर अपने जरिए किए गए हमलों और हमलावरों के बारे में लिखा है.

आप जानकर हैरान होंगे कि काबुल एयरपोर्ट पर फिदायीन हमला करने वाला हमलावर साल 2017 में भारत में एक बड़े मिशन के लिए दिल्ली आया था और वो मिशन था दिल्ली में बड़ा फिदायीन हमला करना. वो दिल्ली में बहुत बड़ा हमला करने के लिए रेकी कर चुका था. फिदायीन जैकेट भी उसके पास पहुंच चुका था लेकिन हमला को अंजाम देने से ठीक 7 दिन पहले भारतीय एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार कर हमले को टाल दिया था.

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वॉयस ऑफ खुरासान Voice of Khurasan मैगजीन में उस फिदायीन हमलावर के भारत मिशन की कहानी छपी है. इसके बाद 'आज तक' भी उन अफसरों से बातचीत कर चुका है, जिन्होंने दिल्ली में इस फिदायीन हमलावर को साल 2017 में गिरफ्तार किया था.

आतंकी मैगजीन में प्रकाशित स्टोरी के मुताबिक उस नौजवान फिदायीन हमलवार का नाम अब्दुर्रहमान लागोरी (Abdurrahman Lagori) था. वह साल 1996 में अफगानिस्तान के एक बेहद सपन्न परिवार में पैदा हुआ था. कुछ सालों बाद वो पाकिस्तान चला गया. जहां उसने अपना बचपन बिताया. पढ़ाई की और पाकिस्तान के इस्लामाबाद में जर्नलिज्म का कोर्स पूरा किया. 

लागोरी इतना होनहार स्टूडेंट था कि पूरी यूनिवर्सिटी में उसके चर्चे होते थे. इस्लामाबाद में पढ़ाई के दौरान कई इंटरनेशनल कांफ्रेंस में उसे स्पीच देने के लिए बुलाया जाता था. वो इतिहास और करंट अफेयर्स पर लगातार रिसर्च करता था. उसे उर्दू, इंग्लिश भाषा का अच्छा ज्ञान था और अरेबिक भाषा की अच्छी समझ थी.

साल 2016 में अब्दुर्रहमान लागोरी अफगानिस्तान वापस गया. जहां उसकी मुलाकात खुरासान के आतंकियों से हुई. उस वक्त ये आतंकी संगठन नया था और अफगानिस्तान में अपने पैर पसार रहा था.

अब्दुर्रहमान लागोरी पर खुरासान संगठन से जुड़ाव का असर ये हुआ कि उसका झुकाव इस संगठन की तरह होने लगा. इसके बाद उसने कलम छोड़ कर आतंकियों के साथ हथियार चलाने की ट्रेनिंग ली. बम बनाने की ट्रेनिंग ली और जल्द ही वो अमेरिकी फोर्सेज के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा बन गया.

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लागोरी हमले से पहले इस्लामिक स्टेट के फिदायीन हमलावरों का बयान रिकार्ड करता था और उनके घर वालों को भेजता था. फिर उसने खुद भी एक दिन मानव बम बनने का फैसला किया और अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना पर हमले के लिए तैयारी की. उसने फिदायीन जैकेट भी पहन लिया था लेकिन कुछ वजहों से उसे वो प्लान कैंसिल करना पड़ा.

साल 2017 में लागोरी को एक खास मिशन के तहत भारत की राजधानी दिल्ली भेजा गया. जहां उसे एक बड़ा फिदायीन हमला करना था. भारत आने के बाद प्लान के तहत उसने फरीदाबाद की एक नामी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया. जहां पढ़ाई करते हुए वो अपने एक साथी के साथ लगातार दिल्ली में अपने टारगेट की रेकी करता रहा. और आखिरकार उसने टारगेट को सलेक्ट कर लिया. इसके बाद उसने फिदायीन जैकेट भी तैयार कर ली. 

लेकिन हमले से 7 दिन पहले उसके साथी को भारतीय एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया और इसके बाद उससे पूछताछ के आधार पर लागोरी को यूनिवर्सिटी से गिरफ्तार किया गया. एजेंसी ने अब्दुर्रहमान से कई दिनों तक पूछताछ की. जिसमें अफगानिस्तान में चल रहे सैकड़ों इस्लामिक स्टेट के ट्रेनिंग कैंप के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद उसे अफगानिस्तान डिपोर्ट कर दिया गया.

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अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस पर अब्दुर्रहमान को अमेरिकी एजेंसी CIA ने हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की. उससे पूछताछ के बाद इस्लामिक स्टेट के कई ठिकानों की पहचान कर वहां हमले किए गए. जिसमें 300 से ज्यादा आतंकी मारे गए. अब्दुर्रहमान को 5 साल की सजा सुनाई गई और अफगानिस्तान की पुर-ए-चालाकी जेल में भेज दिया गया. जहां पहले से ही 200 आतंकी बंद थे.

जब अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा हो रहा था, उसी दौरान उस जेल को तोड़ दिया गया. जिसमें अब्दुर्रहमान लागोरी समेत 200 आतंकी बंद थे. अब वो जेल से पूरी तरह आजाद हो चुका था. लेकिन जेल के बाहर आते ही उसके परिवार ने समझाया कि अब वो आतंक और बुराई का रास्ता छोड़कर परिवार के व्यापार में हाथ बंटाए.

मगर अब्दुर्रहमान के मन में कुछ और ही चल रहा था. फिर एक दिन उसने फिदायीन जैकेट पहन ली और बतौर यात्री वो काबुल एयरपोर्ट जा पहुंचा. उस वक्त अमेरिकी फौज तालिबान राज आने के बाद अफगानिस्तान छोड़कर काबुल एयरपोर्ट से जा रही थी. लागोरी वहां जाकर यात्रियों की उस लाइन में खड़ा हो गया, जो एयरपोर्ट के अंदर जाने के लिए थी. अमेरिकी सेना के जवान तमाम यात्रियों की तलाशी ले रहे थे. लाइन आगे बढ़ती जा रही थी. जैसे ही लागोरी अमेरिकी सेना के जवानों के करीब पहुंचा. उसने जैकेट का डेटोनेटर बटन दबा दिया. जोरदार धमाका हुआ और उस धमाके में 13 अमेरिकी जवान मारे गए और लागोरी भी ढेर हो गया.

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वॉयस ऑफ खुरासान मैगजीन ने जो खुलासा फिदायीन अब्दुर्रहमान लागोरी के बारे में किया है. उसकी पुष्टि भारतीय एजेंसी से जुड़े अफसरों ने भी 'आज तक' से की है.

दरअसल, खुरासान इस फिदायीन हमलावर की कहानी अपनी मैगजीन में छाप कर लोगों को रेडक्लाइज करना चाहता है. ताकि ज्यादा से ज्यादा भटके और गुमराह नौजवान अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISKP) ज्वाइन करें या जहां हैं, वहीं रहते हुए ISKP के लिए काम करें. 

इंडियन एजेंसी के हाथ ये मैगजीन लग चुकी है. अब इस बात की जांच की जा रही है कि ये मैगजीन कहां से छपी है? इसका इंडियन कनेक्शन क्या है? आपको बता दें कि इस आतंकी मैगजीन के खिलाफ एनआईए ने FIR दर्ज कर ली है. NIA ने देशभर से दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर खुलासा किया था कि मैगजीन में कुछ कंटेंट पकड़े गए लोगों के जरिए लिखा गया था.

 

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