
उत्तर प्रदेश के कानपुर का बहुचर्चित ज्योति मर्डर केस एक बार फिर सुर्खियों में है. इस मामले में कत्ल के साजिशकर्ता पीयूष श्यामदासानी की प्रेमिका मनीषा मखीजा को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरी कर दिया है. उस पर हत्या की साजिश रचने में सहभागी होने का आरोप था. लेकिन कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उसे आरोप मुक्त कर दिया है. इसके साथ ही ज्योति के पति पीयूष सहित पांच दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया है.
10 साल पहले हुए इस जघन्य हत्याकांड ने पूरे देश को झकोझर दिया था. किसी को भरोसा नहीं हो रहा था कि कोई पति इतनी निर्दयता के साथ अपनी पत्नी का कत्ल करा सकता है. शादी के बाद महज 20 महीने के अंदर आखिर उसके मन में पत्नी के लिए इतनी नरफत कैसे आई कि वो कातिलों से ये कहा कि जब वो उसकी पत्नी का कत्ल करेंगे, तो वो उसकी चीख सुनना चाहता है. आइए ज्योति हत्याकांड खौफनाक कहानी को जानते हैं.
रविवार, 27 जुलाई 2014. कानपुर उस दिन भी रोज की तरह कारोबार में मसरूफ था. दोपहर का वक्त था. तभी शहर के एक बड़े कारोबारी के बेटे पीयूष श्यामदसानी ने पुलिस को इत्तिला दी कि बाइक सवार बदमाशों ने उसकी पत्नी को कार समेत अगवा कर लिया है. उनके साथ मारपीट की गई है. बदमाशों ने इस वारदात को उस वक्त अंजाम दिया, जब वो 12:30 बजे अपनी पत्नी ज्योति के साथ होंडा अकॉर्ड कार में सवार होकर कार्निवल नामक एक रेस्टोरेंट से घर लौट रहा था.
इस घटना की सूचना पुलिस को देने वाला शख्स कोई मामूली नहीं था, बल्कि शहर के अरबपति कारोबारी ओम प्रकाश दासानी का छोटा बेटा था. लिहाजा पूरा पुलिस अमला हरकत में आ गया. शहरभर में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई थी. पुलिस अब पीयूष की कार और पत्नी ज्योति को तलाश कर रही थी. पीयूष का रो-रो कर बहुत बुरा हाल था. वो पांडुनगर में अपने बंगले पर आ चुका था. ज्योति के अगवा हो जाने ख़बर पूरे शहर में आग की तरह फैल चुकी थी.
पीयूष ने पुलिस को बताई थी ऐसी कहानी
दासानी परिवार के आवास पर उनके रिश्तेदार और कारोबारी जुटने लगे थे. पुलिस के तमाम आला अफसर भी मौके पर पहुंच चुके थे. कानपुर के आईजी, डीआईजी और एसएसपी पीयूष से घटना के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश कर रहे थे. पीयूष ने बताया कि वो अपनी पत्नी के साथ होंडा अकॉर्ड कार से करीब 11.30 बजे रेस्टोरेंट से निकले थे. रास्ते में उनकी पत्नी ज्योति ने लॉन्ग ड्राइव पर जाने की बात कही थी. पीयूष उसे मना कर दिया था.
ज्योति के दोबारा जिद करने पर पीयूष उसे कंपनी बाग चौराहे से रावतपुर रोड की तरफ ले गया. तभी चार बाइक सवार अनजान बदमाशों ने उनकी कार रास्ते में जबरन रुकवा ली. बदमाशों ने उनकी कार को चारों तरफ से घेर लिया. पीयूष को कार से जबरन बाहर खींचकर उसकी पिटाई कर दी.
पीयूष के मुताबिक इसके बाद उनमें से तीन बदमाश उसकी पत्नी ज्योति को उसी की कार में जबरन बैठाकर वहां से फरार हो गए. जब बदमाश ज्योति को अगवा करके ले जा रहे थे, तो उसने ज्योति के मोबाइल पर दो से तीन बार कॉल की थी. तभी किसी ने फोन कॉल रिसीव कर ली. दूसरी तरफ से ज्योति की तेज आवाज़ आ रही थी. वो बचाओ-बचाओ चिल्ला रही थी. बदमाश उसे गाली देते हुए मारने की धमकी दे रहे थे. इसके बाद फोन कट गया. दोबारा फिर कॉल नहीं मिल सकी.
पीयूष के पुलिस स्टेशन पहुंचने की कहानी
पीयूष ने बताया कि उसने रास्ते से गुजरने वाले कई लोगों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की. बड़ी मशक्कत के बाद एक बाइकवाले ने उसे लिफ्ट दी और रावतपुर पहुंचा दिया. वहां से पीयूष पुलिस स्टेशन पहुंचा और वारदात की जानकारी दी. इसी बीच उसने अपने पिता और भाई को फोन पर घटना के बारे में बताया. पुलिस के तीनों बड़े अधिकारियों के सामने पीयूष का जब बयान दर्ज किया जा रहा था, तभी दोपहर के 1:30 बजे पुलिस ने उसकी होंडा अकॉर्ड कार बरामद कर ली.
उसी कार के अंदर ज्योति भी मौजूद थी, लेकिन जिंदा नहीं मुर्दा. उसका कत्ल हो चुका था. उसकी लाश खून से सनी हुई थी. उसका जिस्म किसी तेजधार हथियार से गोदा गया था. कार में इस कदर खून फैला था कि ज्योति के कपड़ों का रंग भी पहचान में नहीं आ रहा था. ये ख़बर मिलते ही पीयूष दासानी के घर पर कोहराम मच गया. पूरे शहर को पता चल चुका था कि अरबपति कारोबारी की बहू का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया है. तमाम बड़े अफसर मौके पर पहुंच चुके थे.
2012 में हुई थी पीयूष और ज्योति की शादी
पीयूष के पिता ओम प्रकाश देश के जाने-माने बिस्कुट निर्माता है. वो परिवार में सबसे छोटा है. नवंबर 2012 उसकी शादी जबलपुर के नैपियर टाउन निवासी प्लास्टिक कारोबारी शंकर लाल नागदेव की 24 वर्षीय बेटी ज्योति के साथ हुई थी. पीयूष भी अपने पिता के साथ बिस्कुट कारोबार से ही जुड़ा था. उसकी पत्नी ज्योति गृहणी थी. ज्योति की लाश बरामद होने के बाद पुलिस ने फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुला लिया था. आस-पास के इलाके में आरोपियों के सुराग तलाश किए जा रहे थे.
पुलिस के पास पीयूष का बयान मौजूद था. कार और पत्नी की लाश भी बरामद हो चुकी थी. लेकिन कातिल और कत्ल की वजह अभी तक पुलिस के लिए पहेली ही थे. पुलिस ने ज्योति की लाश बरामद करने के बाद उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया था. वहां पता चला कि ज्योति का कत्ल किसी चाकूनुमा तेजधार हथियार से किया गया था. उसके जिस्म पर चाकू से गोदे जाने के एक नहीं दो नहीं, बल्कि 17 निशान थे. कातिल किसी भी हाल में उसको जिंदा नहीं छोड़ना चाहता था.
ज्योति पर 17 बार किए गए जानलेवा वार
लिहाजा उस पर एक के बाद एक 17 बार वार किए गए थे. या यूं कहें के उसके जिस्म को छलनी कर दिया गया था. हर तरफ से खून रिसकर जमता जा रहा था. अभी तक पुलिस के हाथ इस मामले में कुछ नहीं लगा था. हालांकि जांच जारी थी. उधर, ज्योति का पोस्टमॉर्टम हो रहा था. पीयूष और उसका परिवार भी पोस्टमॉर्टम केंद्र पहुंच चुका था. इस दौरान कुछ पुलिस अफसरों ने गौर किया कि वारदात के वक्त और पोस्टमॉर्टम के समय पीयूष ने अलग-अलग टी-शर्ट पहन रखी थी.
पुलिस इस हाई प्रोफाइल में छोटी से छोटी बात पर ध्यान दे रही थी. इसी दौरान पुलिस ने उस रेस्टोरेंट की सीसीटीवी कैमरा फुटेज भी खंगाली, जहां वारदात से पहले पीयूष अपनी पत्नी ज्योति के साथ खाना-खाने के लिए गए थे. फुटेज देखने पर पुलिस को एक अजीब सी बात देखने को मिली. पुलिस ने पाया कि पीयूष और ज्योति वहां खाना तो साथ बैठकर खा रहे थे, लेकिन दोनों के बीच बिल्कुल भी बातचीत नहीं हो रही थी. इस दौरान पीयूष लगातार किसी से फोन पर बातें कर रहा था.
पीयूष की तरफ घूमने लगी थी शक की सुई
असल में इस हाई प्रोफाइल मर्डर केस की जांच पर खुद आईजी जोन आशुतोष पांडे नजर रख रहे थे. उनके निर्देशन में कई टीमें इस मामले की जांच में जुटी थीं. तकनीकी सर्विलांस का इस्तेमाल भी किया जा रहा था. पुलिस ज्योति और पीयूष से जुड़े हर पहलू पर नजर रख रही थी. यही वजह थी कि वारदात के कुछ घंटे बाद ही पोस्टमॉर्टम के वक्त पीयूष की बदली हुई टी-शर्ट पर पुलिसवालों का ध्यान गया था. इसके बाद रेस्टोरेंट की सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया.
कानपुर के तत्कालीन आईजी आशुतोष पांडे के मुताबिक, पुलिस के पास पीयूष पर शक करने की कई वजहें थीं. पहली पीयूष ने डिनर के वक्त कोई और टी-शर्ट पहन रखी थी, जबकि पत्नी के पोस्टमॉर्टम के वक्त वो दूसरी टी-शर्ट पहनकर आया था. दूसरी वजह ये कि बकौल पीयूष ज्योति को अगवा करते वक्त बदमाशों ने उनके साथ मारपीट की थी, लेकिन उसके शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं पाए गए थे. तीसरा अपहरण की सूचना देने में पीयूष ने एक घंटा क्यों लगाया था.
इस लड़की से घंटों बातें किया करता था पीयूष
उसके पास मोबाइल फोन भी था और मौका-ए-वारदात के करीब ही महज 500 मीटर दूर एक पुलिस चौकी भी मौजूद थी. चौथी वजह ये कि पीयूष के बयान में एकरूपता नहीं थी. ज्योती के कत्ल की सूचना उसके घरवालों को भी दे दी गई थी. इसके बाद जबलपुर के प्लास्टिक कारोबारी शंकर लाल नागदेव अपनी पत्नी और बेटे के साथ कानपुर में मौजूद अपनी बेटी की ससुराल में पहुंच चुके थे. वहां बेटी की लाश देखकर उनका कलेजा फट गया. वे दहाड़े मारकर रो रहे थे.
ज्योति की मां कंचन वहीं बेहोश होकर गिर पड़ी थीं. इस वारदात को तीन दिन बीत चुके थे. पुलिस ज्योति और पीयूष के मोबाइल की सीडीआर भी हासिल कर चुकी थी. पीयूष की कॉल डिटेल में पुलिस को एक नंबर मिला, जिस पर वो घंटों बातें किया करता था. पुलिस ने उस नंबर की छानबीन की तो पता चला वो नंबर किसी मनीषा मखीजा नाम की लड़की का था. पुलिस ने ये भी पाया कि वारदात के दिन पीयूष और उस लड़की ने कॉल्स के अलावा एक दूसरे को 150 मैसेज किए थे.
कानपुर के बड़े कारोबारी की बेटी निकली मनीषा
पीयूष की पिछले कई दिनों में सैकड़ों बार उससे बातचीत हुई थी. वॉट्सएप और मैसेजिंग के जरिए भी दोनों के बीच बातचीत होती थी. पुलिस ने फौरन मनीषा मखीजा की कुंडली खंगाल डाली. पता चला कि मनीषा एक पान मसाला कंपनी के मालिक हरीश मखीजा की बेटी है. जो पीयूष की बिस्कुट कंपनी के बड़े डीलर भी थे. पुलिस को अब पूरा मामला समझ आने लगा था. तस्वीर साफ होती जा रही थी. पुलिस शक सही साबित होता जा रहा था. पुलिस के हाथ केस का एक सिरा आ चुका था.
31 जुलाई 2014 ज्योति के कत्ल की वारदात को 4 दिन बीत चुके थे. पुलिस के पास अहम सुराग भी मौजूद थे. लिहाजा पुलिस ने बिना देर किए अरबपति कारोबारी के बेटे पीयूष को गिरफ्तार कर लिया. उससे पूछताछ शुरू की गई. वो पुलिस के सामने तमाम झूठ बोलता रहा. फिर पुलिस ने मनीषा को पूछताछ के लिए बुलाया. आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई तो उनकी सारी चालबाजी धरी रह गई. वो पुलिस के सवालों के सामने टूट गया. उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया.
पीयूष ने ही रची थी ज्योति के कत्ल की साजिश
पीयूष ने खुद पुलिस के सामने कबूल किया उसने ही अपनी पत्नी की हत्या की साजिश रची थी. इसमें उसका ड्राइवर अवधेश और नौकर रेणु भी शामिल थे. उन दोनों को इस मर्डर के लिए सुपारी दी गई थी. असल में पीयूष और मनीषा के बीच एक्सट्रा मैरिटल अफेयर था. पीयूष उससे शादी करना चाहता था. इसी वजह से वो ज्योति को रास्ते से हटाना चाहता था. वारदात के दिन पीयूष ने ज्योति को लॉन्ग ड्राइव के लिए ड्राइवर की व्यवस्था हो जाने की बात कही थी.
ज्योति जब तैयार हो गई तो उसने ड्राइवर अवधेश को बुलाया, उसके साथ रेणु कनौजिया भी कार में सवार हो गई थी. अवधेश कार चला रहा था, रेणु उसके बगल में बैठी थी. जबकि पीयूष और ज्योति पीछली सीट पर बैठे थे. इसी दौरान सीएस आजाद विश्वविद्यालय और रावतपुर के बीच अवधेश ने कार रोकी. अचानक ज्योति पर तेजधार हथियार से एक बाद एक 17 बार वार कर डाले. फिर पीयूष, अवेधश और रेणु कार को वहीं छोड़ कर निकल गए. इससे पहले सारे सबूत मिटा दिए थे.
ज्योति ने की थी सास-ससुर से पीयूष की शिकायत
इस केस से जुड़ी पुलिस की जांच रिपोर्ट में बताया गया था कि ज्योति को पीयूष के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के बारे में शक होने लगा था. उसने इस बारे में अपने सास-ससुर से भी शिकायत की थी. ज्योति ने उन्हें बताया था कि पीयूष रात में 1 बजे से 4 बजे के बीच कहीं चला जाता है और सुबह लौटता है. इस मामले की जांच पड़ताल के दौरान पुलिस के हाथ ज्योति की एक डायरी भी लगी थी. ज्योति और पीयूष दासानी का रिश्ता शादी के पहले दिन से ही ठीक नहीं था.
डायरी में ज्योति ने लिखा था कि वो दुनिया की निगाह में पीयूष की पत्नी है, किसे कहे और कैसे कहे कि वो पत्नी नहीं पत्नी जैसी है. पीयूष ने उसे कभी पत्नी का दर्जा नहीं दिया था, लेकिन वो परिवार की बदनामी के डर से ये बात किसी को नहीं बताती थी. हमेशा पत्नी की भूमिका निभाती रही. ज्योति ने डायरी में पीयूष पर उसे मानसिक रूप प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया था. 22 नवंबर 2020 इस मामले का खुलासा होने के बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.
पीयूष ने मनीषा के साथ मिलकर बनाया था प्लान!
बताया जाता है कि पीयूष की शादी ज्योति के साथ होने से गर्लफ्रेंड मनीषा काफी गुस्सा हो गई थी. लेकिन कुछ दिन बीत जाने के बाद दोनों के बीच फिर से अफेयर शुरू हो गया. इसी दौरान एक दिन ज्योति ने पति पीयूष के फोन पर मनीषा की कॉल अटेंड कर ली, जिसके बाद मनीषा ने पीयूष को कहा कि ज्योति को वह बर्दाश्त नहीं कर सकती. इसलिए दोनों ने मिलकर ज्योति को मारने का प्लान बनाया. लेकिन अब सबूतों के अभाव में हाई कोर्ट ने मनीषा को आरोपमुक्त कर दिया है.