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भारत का वो राज्य जहां कुत्तों और इंसानों में जारी है जंग... लाखों डॉग बाइट के मामले, जानिए क्या कहता है कानून?

केरल में इन दिनों इंसान और जानवर के बीच एक अजीब सी जंग छिड़ गई है. इंसान ये जंग उस जानवर के साथ लड़ रहा है, जिसकी वफादारी की मिसालें दी जाती हैं. केरल में कुछ कुत्तों ने इंसानों पर हमले किए, अब बदला लेने के लिए कहीं कुत्तों को गोली मारी जा रही है तो कहीं चौराहे पर उन्हें फांसी दी जा रही है.

केरल में लगातार लोगों पर कुत्ते हमले कर रहे हैं केरल में लगातार लोगों पर कुत्ते हमले कर रहे हैं
शिबिमोल/सुप्रतिम बनर्जी
  • तिरुअनंतपुरम,
  • 04 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 12:41 PM IST

इंसान और जानवर के बीच दोस्ती और दुश्मनी की कहानी सदियों पुरानी है. इसी तरह केरल में इन दिनों इंसान और जानवर के बीच एक अजीब सी जंग छिड़ गई है. इंसान ये जंग उस जानवर के साथ लड़ रहा है, जिसकी वफादारी की मिसालें दी जाती हैं. केरल में कुछ कुत्तों ने इंसानों पर हमले किए, अब बदला लेने के लिए कहीं कुत्तों को गोली मारी जा रही है तो कहीं चौराहे पर उन्हें फांसी दी जा रही है.

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8 सितंबर 2022, सुबह 10 बजे, कन्नूर - केरल

गली में एक बच्चा साइकिल से घूम रहा है, जबकि दो लडके पैदल ही आगे बढ रहे हैं. वो कुछ दूर जाते हैं और फिर बांयी ओर मुड जाते हैं. लेकिन अगले ही पल सीसीटीवी कैमरे में जो कुछ कैद होता है, वो बेहद डरावना है. दोनों लड़के सिर पर पांव रख कर वापस अपने घर की ओर दौड़ते हुए दिखाई देते और अगले ही पल खतरनाक कुत्तों का एक झुंड उनका पीछा करता हुआ दिखता है. दोनों लड़के भागते हुए किसी तरह गेट के अंदर घुसने में कामयाब हो जाते हैं. और किसी तरह घर का गेट बंद कर देते हैं. तब कुत्तों का झुंड भी वापस लौट जाता है. कुत्तों का शोर सुन कर आस-पास के लोग इकट्ठा हो जाते हैं और फिर कुत्तों के हमले से बच्चों के बच जाने पर राहत की सांस लेते हैं.

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11 सितंबर 2022, 3 बजकर 15 मिनट, केरल - कोझीकोट

घर के बाहर बच्चे खेल रहे हैं. एक बच्चा साइकिल पर राउंड लगा रहा है. तभी अचानक एक कुत्ता बिजली की तेज़ी से उस बच्चे की तरफ लपकता है और इससे पहले कि बच्चा कुछ समझ पाता सीधे उस पर छलांग लगा कर उसे साइकिल से नीचे गिरा देता है. घबराया बच्चा अब कु्ते से बचने की कोशिश करने लगता है, लेकिन उससे संभलने का मौका तक नहीं मिलता और कुता उसे बुरी तरह काटने लगता है. उसकी नन्हीं-नन्हीं बांह पर पर अपने नुकीले दांत गड़ा देता है. और जब तक बच्चे की चीख-पुकार सुन कर घर के लोग बाहर निकलते हैं, कुता बच्चे को छोड़ कर भाग निकलता है.

17 सितंबर 2022, दोपहर 2 बजकर 50 मिनट, कोट्टयम - केरल

वहां तो एक लावारिस कुत्ता घर में ही घुस आया. और एक लड़की पर बुरी तरह हमला करता है. उसे नोंचता है. उछल-उछल कर काटता है. लड़की शोर मचाती है, कुत्ते को मारती है. उससे बचने की कोशिश करती है, मगर कोई फायदा नहीं होता. और आखिरकार लड़की को जख्मी करने के बाद कुत्ता घर से बाहर निकल जाता है.

तस्वीर का दूसरा पहलू 

कुत्तों के हमले से बौखलाए केरल के लोगों ने अब कुत्तों की लाशें बिछाने की शुरुआत कर दी हैं. कहीं कुत्तों को गोली से उड़ाया जा रहा है. कहीं बीच चौराहे पर उन्हें फांसी दी जा रही है. कहीं जहरीली मिठाइयों से उनकी लाशों के ढेर लगाई जा रहे हैं. दूसरे लफ्ज़ों में कहें तो कभी इंसान का सबसे पुराना और वफादार दोस्त समझे जानेवाले कुते अब केरल में इंसानों के दुश्मन नंबर वन बन चुके हैं. और सर्वावाइवल की इस लड़ाई में इंसान कुत्तों पर भारी पड़ रहे हैं. शहर-शहर गली-गली जहां भी कुते दिखाई दे जाते हैं, इंसान उन्हें मिटाने पर आमादा हो जाता है. और ये मामले राज्य के किसी एक हिस्से के नहीं, बल्कि तकरीबन पूरे केरल के हैं. उस केरल के, जिसे दुनिया गॉड्स ओन कंट्री यानी ईश्वर के अपने देश के तौर पर जानती है.

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केरल की नई मुसीबत

एंटी क्लाइमेक्स की सबसे चौंकानेवाली तस्वीर केरल के कासरगोड की हैं. सफेद लूंगी, टी शर्ट, सिर पर टोपी और हाथ में एयर गन लिए एक शख्स यहां बच्चों के आगे आगे चल रहा हैं. जबकि पीछे डरे सहमे बच्चे एक दूसरे का सहारा लेकर आगे बढ़ रहे हैं. और यहां भी वजह वही है. राज्य के दूसरे हिस्सों की तरह यहां भी आवारा कुत्तों के हमले से केरल के लोग और खास कर बच्चे इतने सहमे हुए हैं कि वो घर से निकलना ही नहीं चाहते. ऐसे में इन बच्चों को नजदीकी मदरसे तक पहुंचाने का इस शख्स को बस यही तरीका समझ में आया है. केरल के कासरगोड से आए इस वीडियो के बाद अब प्रशासन ने इस शख्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. लेकिन केरल की इन अलग-अलग तस्वीरों में वहां पैदा हुई इस नई मुसीबत की झलक साफ देखी जा सकती है.

केरल में हैं लाखों कुत्ते

अब इस हालात के लिए कुत्तों को जिम्मेदार ठहराया जाए या इंसानों को. इसका फैसला तो हम आप पर छोड़ते हैं, लेकिन इतना ज़रूर है कि कुत्तों से निपटने में इंसान इस हद तक आगे निकल जाएगा, ये सोचना ज़रा अजीब लगता है. केरल में कुत्तों के इंसानों का और इंसानों के कुत्तों का दुश्मन बन जाने का ये मामला कितना गंभीर है, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पूरे केरल में करीब 2 लाख 90 हज़ार आवारा कुते हैं. आवारा कुत्तों की संख्या की बात करें, तो ये नंबर टॉप टेन राज्यों में भी नहीं आता. 

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महज 1 साल में करीब 2 लाख लोगों को कुत्तों ने काटा 

इस साल अब तक 1 लाख 96 हजार से ज़्यादा लोगों को कुत्तों ने काट खाया है. जो पिछले साल के मुकाबले दुगने से भी ज्यादा है. राज्य में अब तक 21 लोगों की रेबीज़ से मौत हो चुकी है. रेबीज़ यानी वो बीमारी जो आम तौर पर कुत्तों या ऐसे ही किसी दूसरे जानवर के काटने से होती है. इसमें 12 साल की वो लड़की भी शामिल है, जिसने रेबीज़ ना होने के लिए वैक्सीन की तीन खुराक भी ली थी. ये केरल में कुत्तों के बढ़ते खौफ और उनकी वजह से पैदा हो रही मुसीबत की निशानी तो है ही, रेबीज़ के वैक्सीन और उसके असर पर भी एक बड़ा सवाल है.

सीएम ने लोगों को आगाह किया

जाहिर हैं खूंखार कुत्तों के हमले से हालात कुछ ऐसे पैदा हो गए हैं कि अब कुत्तों को काबू करने की सरकार की काबिलियत पर भी सवाल उठने लगे हैं. इसी बीच केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने लोगों को आगाह किया है. उन्होंने कहा कि कुत्तों की परेशानी से निपटने के लिए लोगों को हिंसा का रास्ता छोड़ देना चाहिए. कुत्तों को मारना, उन्हें ज़हर देना, लटका देना, इस परेशानी का हल नहीं है. ऐसी हरकतें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएंगी. इस परेशानी से बचने के लिए सरकार ने आवारा कुत्तों के लिए वैक्सीनेशन ड्राइवर की शुरुआत कर दी है, जो 20 अक्टूबर तक चलेगी. जबकि कुत्ता पालकों से अपील है कि वो अपने कुत्तों को खुला ना छोडें और उनका रजिस्ट्रेशन जरूर कराएं.

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कुत्तों के मारे जाने के मामलों में तेजी

पिछले पांच सालों के दौरान आंकड़ों के आईने में कुत्तों के काटने के मामले केरल में लगातार भयावह होते जा रहे हैं. कुत्तों के मारे जाने के मामले इतनी तेजी से सामने आए हैं कि कई सेलिब्रिटीज ने इस पर अपने दर्द का इजहार किया है. इनमें क्रिकेटर शिखर धवन भी शामिल हैं, जिन्होंने पिछले दिनों एक ट्वीट कर केरल के लोगों से कुत्तों मारने अपने फैसले पर फिर से सोचने की अपील की थी. हालांकि धवन को इस मानवीय ट्वीट के लिए केरल के लोगों के गुस्से का भी शिकार होना पड़ा.

तिरुअनंतपुरम में सबसे ज्यादा मामले

इनमें 27,343 मामलों के साथ तिरुअनंतपुरम सबसे ऊपर है, जबकि इसके बाद 22,782 मामलों के साथ पालाक्कड का नंबर आता है. तीसरे नंबर पर कोल्लम है, जहां 21,692 डॉग बाइट के केसेज़ सामने आ चुके हैं, इसी तरह त्रिशूर में 20,664, वायनाड में 6351, जबकि ईडुकी में कुत्तों के काटने के 5494 मामले सामने आ चुके हैं.

कुत्तों के कत्ल के लिए सुप्रीम कोर्ट से मांगी इजाजत

मामले की नजाकत को इसी से समझा जा सकता है कि अब केरल सरकार ने खतरनाक हो चुके कुत्तों को मारने के लिए सुप्रीम कोर्ट से इजाजत मांगी है. हालांकि अदालत ने इस पर कोई आदेश देने से पहले इस मामले से जुडे तमाम पक्षकारों से उनका पक्ष रखने की बात कही है. 

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इंसान के दुश्मन कैसे बन गए कुत्ते

कुत्तों से सिर्फ़ केरल ही परेशान नहीं है. बल्कि दूसरे राज्यों में लोगों की जान कुत्तों से हलकान हुई पड़ी है. लेकिन फिर सवाल वही है कि आखिर रातों-रात ऐसा क्या हो गया कि कभी इंसान का सबसे पुराना और वफ़ादार दोस्त समझे जानेवाले कुते इंसानों के इतने बडे दुश्मन बन गए. आखिर रातों-रात ऐसा क्या हो गया कि कुतों ने इतनी बड़ी तादाद में इंसानों पर हमला करना शुरू कर दिया और कई मामलों में तो इंसानों की जान ही चली गई? 

कुत्तों का मनोविज्ञान और इंसान का व्यवहार

इंसानों और कुत्तों के इस बदलते रिश्ते को समझने के लिए कुत्तों के मनोविज्ञान और इंसान के व्यवहार दोनों को समझने की जरूरत है. जानकारों की मानें तो अक्सर कुते प्लेफुल तरीके से यानी खेल-खेल में इंसानों पर झपटते हैं, लेकिन जैसे ही इंसान घबरा कर दौड़ने या भागने लगता है, कुत्ते हिंसक हो जाते हैं. कुत्तों से दूरी या फिर उनसे फ्रेंडली रिलेशन ना रखना भी कुत्तों के हमले की एक वजह हो सकती है. अक्सर कुत्ते किसी तेज भागती चीज या इंसान का पीछा करने लगते हैं, लेकिन अगर वही चीज़ या इंसान अपनी जगह पर रुक जाए, तो कुत्ता पीछे हट जाता है. कई मामलों में देखा गया है कि वहां इंसानों और कुत्तों के दरम्यान पनपे अविश्वास ने हालात को बद से बद तर बना डाला है. बहुत से पालक कुत्तों को पिंजरे में बंद रखते हैं, जिससे उनका व्यवहार बदल जाता है.

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क्या कहता है कानून

आवारा कुत्तों की सुरक्षा के लिए प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल एक्ट 1960 में कई प्रावधान हैं. इनमें कुत्तों की हत्या करने पर जुर्माने के साथ-साथ दो साल तक की सज़ा भी हो सकती है. इसके साथ ही कुत्तों को स्थानांतरित करने, सताने, भूखा रखने पर भी जुर्माने के साथ-साथ जेल की सज़ा मुमकिन है. इसी तरह पालतू कुत्तों की सुरक्षा के लिए पीसीए एक्ट की धारा 428 और 429 में कई प्रावधान हैं. इसमें कुत्तों को सताने या मारने पर दो साल तक की सज़ा और जुर्माना या फिर दोनों हो सकती है.

भारत में मौजूद हैं 1 करोड़ 2 लाख कुत्ते

पिनकीन नाम की एक वेबसाइट के मुताबिक भारत में 1 करोड़ 2 लाख से ज़्यादा पालतू कुत्ते हैं. अनुमान ये भी है कि ये तादाद 2023 तक बढ़ कर 3 करोड़ 10 लाख के आस-पास पहुंच सकती है. इसी तरह पेट होमलेसनेस नाम की एक संस्था की ओर से किए गए सर्वे के मुताबिक देश में करीब 62 मिलियन यानी 6 करोड़ से ज्यादा आवारा कुते हैं. और ये आंकडे बताते हैं कि कुत्ते भारत में सबसे आम पालतू जानवर हैं लेकिन कुत्तों के इस बढ़ते आंकड़ों के साथ-साथ कुत्तों के काटने से होनेवाली मौतों की संख्या घटती बढ़ती रही है, जो सालाना करीब हज़ार-पंद्रह सौ के आस-पास है.

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुत्तों के काटने से सिर्फ रेबीज़ ही नहीं बल्कि कई दूसरी तरह की बीमारियां भी होती हैं. मसलन-

कैपसोनाइटोफैगा- इस बीमारी में कुत्ते के काटने पर घाव पर फफोले, रेडनेस, सूजन और दर्द की शिकायत रहती है. इसके इलाज में देरी होने से संक्रमण फैलता है और इससे किडनी और हार्ट के डैमेज होने का भी खतरा रहता है.

सेप्सिस- कुत्ते के काटने पर इलाज ना करनेवाने पर सेप्सिस का संक्रमण हो सकता है. इसके बुखार, नींद की कमी, दर्द और बेचैनी होती है. इसमें डॉक्टर की सलाह जरूरी है.

रेबीज़- रेबीज वाले कुत्ते के काटने से इंसान को रेबीज हो सकता है. इसका संक्रमण खतरनाक होता है. जिससे जान भी जा सकती है. 

टेटनस- कुत्ते के काटने से टेटनस भी संभव है. इससे कई दिक्कतें पैदा हो जाती हैं. टेटनस से नसों और हड्डियों को भी नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है.

 

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