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कोलकाता डॉक्टर रेप-मर्डर: संजय रॉय को उम्रकैद, 50 हजार का जुर्माना, कोर्ट ने नहीं माना रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस

Kolkata Doctor Rape and Murder Case: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए डॉक्टर रेप-मर्डर केस में संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. इसके साथ ही 50 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है. 

 डॉक्टर रेप-मर्डर केस में संजय रॉय को मिली उम्रकैद की सजा... डॉक्टर रेप-मर्डर केस में संजय रॉय को मिली उम्रकैद की सजा...
aajtak.in
  • कोलकाता,
  • 20 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 4:43 PM IST

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए डॉक्टर रेप-मर्डर केस में संजय रॉय को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. इसके साथ ही 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है. सजा का ऐलान करते वक्त अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिरबन दास ने कहा कि ये रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस नहीं है. इसलिए इस मामले में वो अपराधी को उम्रकैद की सजा सुना रहे हैं.

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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिरबन दास ने कहा, ''सीबीआई ने मौत की सजा की मांग की है. बचाव पक्ष के वकील ने की प्रार्थना की है कि मौत की जगह दूसरी सजा दी जाए. यह अपराध दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता है.'' उन्होंने आगे कहा, ''पीड़िता की मौत अस्पताल में ड्यूटी के दौरान हुई. वो उसका कार्यस्थल था. इसलिए डॉक्टर के परिवार को मुआवजा मिलना चाहिए, जो कि राज्य की जिम्मेदारी है.''

संजय रॉय को उम्रकैद की सजा देने के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़िता के परिजनों को 17 लाख मुआवजा देने का निर्देष दिया. इस पर पीड़िता के माता-पिता ने कहा कि उन्हें किसी तरह का मुआवजा नहीं चाहिए. संजय रॉय को बीएनएस की धारा 64, 66 और 103 (1) के तहत के दोषी पाया गया है. इन धाराओं के तहत अपराधी को अधिकतम फांसी या उम्रैकद का प्रावधान है. लेकिन जज ने उम्रकैद की सजा दी है. 

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सजा सुनाने से पहले जज ने संजय रॉय से कहा, ''मैंने तुम्हें पहले ही बताया था कि तुम पर लगाए गए सभी आरोप जैसे बलात्कार और हत्या के आरोप साबित हो चुके हैं.'' इस पर संजय रॉय ने कहा, ''मुझे बिना किसी वजह के फंसाया गया है. मैं हमेशा रुद्राक्ष की माला पहनता हूं. यदि मैं अपराध करता तो क्राइम सीन पर ही माला टूट जाती. मुझे बोलने नहीं दिया गया. कई कागजों पर जबरदस्ती साइन करवाए गए.''

संजय रॉय ने कहा- मैंने अपराध नहीं किया, लेकिन दोषी ठहराया गया

संजय रॉय ने दावा किया, "जब सीबीआई ने इस मामले को अपने हाथ में लिया, तो यहां रेलवे अस्पताल में मेडिकल जांच कराई गई, लेकिन उसमें कुछ भी नहीं दिखा." जज ने जब उसके परिवार के बारे में पूछा, तो उसने कहा कि उसकी मां है, लेकिन गिरफ्तारी के बाद कोई भी उससे मिलने नहीं आया. गिरफ्तारी से पहले वो पुलिस कैंप में रहता था. उसने कहा कि उसने अपराध नहीं किया है, लेकिन उसे दोषी करार दिया गया. 

सीबीआई के वकील ने कोर्ट में कहा, "यह एक ऐसा मामला है जो दुर्लभतम श्रेणी में आता है. समाज में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए संजय रॉय को अधिकतम सजा दी जानी चाहिए." संजय रॉय के वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष को ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत करने चाहिए, जो यह साबित कर सकें कि दोषी के सुधार की कोई संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि वो फांसी के अलावा सजा के लिए प्रार्थना करते हैं." 

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पीड़िता के माता-पिता ने जज से की थी फांसी की सजा की मांग

पीड़िता के माता-पिता के वकील ने भी अधिकतम सजा की मांग करते हुए कहा कि संजय रॉय एक सिविक वालंटियर होने के नाते अस्पताल की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार था, लेकिन उसने खुद ही उस पीड़ित के साथ जघन्य अपराध किया जिसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी उस पर थी. सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में संजय रॉय को ही असली अपराधी बताया था. इसके साथ ही इसको गैंगरेप की बजाए रेप बताया था. 

चार्जशीट के अनुसार संजय रॉय ने अकेले ही इस वारदात को अंजाम दिया था. पीड़िता से लिए गया सीमन का सैंपल उससे मैच हो गया था. सीएफएसएल रिपोर्ट से पुष्टि हुई थी कि सीमन संजय रॉय का ही है. कई भौतिक-परिस्थितिजन्य साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर साबित हुआ कि वारदात उसने ही किया है. 9 अगस्त 2024 को क्राइम सीन से मिले छोटे बाल को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया था. 

कोलकाता कांड को सुलझाने में तीन चीजें सबसे अहम साबित हुईं

फोरेंसिक रिपोर्ट में ये बाल संजय रॉय के बताए गए थे. करीब 100 गवाहों, 12 पॉलीग्राफ टेस्ट, सीसीटीवी कैमरों, फॉरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन, ईयरफोन और आरोपी के बयान के बाद चार्जशीट फाइल की गई. इसमें सीबीआई ने भी ये साफ कर दिया है कि ट्रेनी जूनियर डॉक्टर के साथ रेप हुआ था, ना कि गैंगरेप. चार्जशीट के मुताबिक, इस केस को सुलझाने में तीन चीजें सबसे अहम साबित हुई हैं. 

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इनमें पहली, अस्पताल के सेमिनार रूम के बाहर सीसीटीवी कैमरे से मिली तस्वीरें हैं. इन तस्वीरों में 9 अगस्त की सुबह 4 बजे संजय रॉय सेमिनार हॉल के अंदर जाता दिखाई देता है. आधे घंटे बाद वो बाहर निकल जाता है. इस दौरान सेमिनार हॉल में संजय के अलावा ना और कोई दूसरा गया, न बाहर आया. दूसरी, सेमिनार हॉल से मिला संजय रॉय का मोबाइल का ईयरफोन. जो बाद में उसी के ब्लूटूथ से कनेक्ट हो गया था. 

मेडिकल कॉलेज के सेमीनार हॉल में संजय ने की थी दरिंदगी

तीसरी, सबसे अहम चीज फॉरेंसिक रिपोर्ट थी. ट्रेनी जूनियर डॉक्टर के नाखुन में मिले खून से संजय का डीएनए मैच कर गया. इसके अलावा सीमन का डीएनए भी संजय रॉय से मैच कर गया था. प्राइवेट पार्ट से भी संजय का ही डीएनए सैंपल मिला था. चार्जशीट के मुताबिक, वारदात वाली रात संजय रॉय ने काफी शराब पी रखी थी. उसी नशे में वो रात करीब चार बजे अस्पताल के तीसरी मंजिल पर पहुंचा. 

इस बात से अंजान कि सेमिनार हॉल में ट्रेनी जूनियर डॉक्टर सो रही है, वो वहां पहुंच गया. वहां उसे ट्रेनी डॉक्टर दिखाई दी. इसके बाद वो उसके साथ जबरदस्ती करने लगा. डॉक्टर बचने की कोशिश करती रही. संजय रॉय ने उसका मुंह और गला दबा दिया. उसने जब ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप किया, तब वो बेहोश थी. पीड़ित के जिस्म पर 16 बाहरी और 9 अंदरुनी चोट थी. खुद को बचाने के दौरान उसने संजय पर हमला भी किया था.

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