
उत्तर प्रदेश में प्रयागराज, प्रतापगढ़ और लखनऊ सहित कई जिलों में जमीनों पर अवैध कब्जे करके अरबों की संपत्ति बनाने वाले माफिया गैंगस्टर अतीक अहमद के काले कारनामों में उसका पूरा कुनबा शामिल था. इसमें उसके परिजनों के साथ रिश्तेदार तक शामिल थे. पत्नी, बच्चे से लेकर बहन, बहनोई, साले तक उसकी शह पर गैर-कानूनी काम किया करते थे. इनमें एक नाम काफी चर्चित है. उसने अतीक और उसके भाई अशरफ के दम पर कानून की नाक में दम कर रखा था. वो सरकारी और गैर-सरकारी जमीनों पर कब्जा करता. उसे जबरन बेच कर पैसे कमाता. अतीक और अशरफ को जब जेल की सजा हुई तो उनके लिए उसने ऐसा जाल बिछाया कि उन्हें वहां भी लग्जरी सुविधाएं मिलने लगी.
पुलिस का पहरा कड़ा हुआ तो दुबई भाग गया. मौका देखकर वापस उत्तर प्रदेश आ गया. उसे अतीक और अशरफ के साम्राज्य को संभालने के साथ खुद की हैसियत भी बनानी थी. लग्जरी लाइफ जीने के लिए पैसा कमाना था. लेकिन गर्लफ्रेंड्स के चक्कर में फंसकर बर्बाद हो गया. एक गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए दिल्ली जाते वक्त पुलिस ने उसे धर दबोचा. आज वो बरेली जेल में बंद है. उसके खिलाफ पुलिस सख्त एक्शन लेने जा रही है. जी हां, हम अतीक के भाई अशरफ के साले सद्दाम की बात कर रहे हैं, जिसके काले कारनामें अपने जीजाओं से भी बड़े हैं. प्रयागराज के थाना पुरामुफ्ती के गांव हटवा स्थित 50 करोड़ की वक्फ संपत्ति पर कब्जा कर बेचने के मामले में पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई कर रही है.
जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज पुलिस इस मामले में सद्दाम का वारंट बी बनवाने जा रही है. इसके लिए बहुत जल्दी कोर्ट में अर्जी देने वाली है. वारंट बी के जरिए उसे बरेली जेल से प्रयागराज लाया जाएगा, जहां उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा. इस मामले में सद्दाम के साथ मुतवल्ली असियम और उसकी पत्नी जिन्नत मुख्य आरोपी हैं, जबकि अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा और उसका एक भाई जैद मास्टर सह आरोपी हैं. बताया जा रहा है कि इस मामले में पुलिस की सक्रियता को देखकर मुतवल्ली अपनी पत्नी के साथ फरार हो गया है. पुलिस ने उसके घर पर दबिश दी थी, लेकिन दोनों वहां मौजूद नहीं थे. आरोपियों ने अमेरिका में रह रहे एक शख्स की जमीन बिना उससे रजिस्ट्री कराए दूसरे को बेच दी थी.
जानिए क्या होता है वारंट बी?
किसी भी जेल में बंद आरोपी के लिए वारंट बी जारी किया जाता है. किसी मामले में जब जांच अधिकारी कोर्ट को बताता है कि अमुक आरोपी की उससे संबंधित केस में पेशी करानी है, तब कोर्ट वारंट बी जारी करती है. वारंट बी मिलने के बाद संबंधित आपराधिक मामले में जांच कर रही पुलिस उस जेल प्रशासन को सूचित करती है, जहां आरोपी कैद होता है. इस वारंट के जरिए पुलिस आरोपी के उस जेल से लेकर अपने वहां आती है. स्थानीय कोर्ट में पेश कर उससे पूछताछ करने के लिए रिमांड मांगती है. वारंट बी के जरिए ही अतीक अहमद को अहमदाबाद जेल और अशरफ को बरेली जेल से प्रयागराज लाया गया था. इसी दौरान 15 अप्रैल को तीन लोगों ने एक अस्पताल के पास उन दोनों को गोली मार दी थी.
जुर्म की दुनिया में ऐसे आया सद्दाम
अतीक अहमद के छोटे भाई अशरफ की शादी जैनब फातिमा से हुई थी. ससुराल में जैनब और अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन के बीच अक्सर मनमुटाव रहता था. अतीक परिवार में सबसे बड़ा और दबंग था, इसलिए शाइस्ता की ज्यादा चलती थी. ये बात जैनब को पसंद नहीं थी. वो दुखी होकर अपने मायके चली गई. उसके बाद कभी अपने ससुराल नहीं लौटी. पत्नी के जाने के बाद अशरफ भी ज्यादातर अपने ससुराल में रहने लगा. वहां उसने अतीक से अलग अपना गैर कानूनी काम शुरू कर दिया. जमीनों पर कब्जा करना और उसे जबरन बेच देना, उनका पुराना धंधा था, जिसे उसने वहां भी जारी रखा. उसके काले कारनामों में उसके साले सद्दाम ने भी साथ देना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे उसका भरोसेमंद बन गया.
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जीजा के लिए जेल में ऐसे बनाई पैठ
इसी बीच अतीक अहमद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. पुलिस कार्रवाई तेज हुई तो बचने के लिए उसका जीजा अशरफ भी फरार हो गया. अब सद्दाम के सामने खुला मैदान था. अपने जीजाओं के मार्गदर्शन में उसने वसूली का काम शुरू कर दिया. इसके साथ ही जमीनों पर कब्जे करके बेचने का काम भी जारी रखा. इससे सद्दाम ने खूब पैसा कमाया. अकूत संपत्ति बना ली. अशरफ जब बरेली जेल में पहुंचा तो उसने उसके लिए सेटिंग शुरू कर दी. सबसे पहले बरेली में एक शानदार मकान किराए पर लिया. वहां ऐशो-आराम की सारी चीजें रखीं. उसके बाद जेल के अफसरों और कर्मचारियों से संबंध बनाने शुरू किए. उनको अपने घर बुलाता. उनकी अय्याशी कराता. पैसे देता. इस तरह उसने जेल में पैठ बना लिया.
जेल में रची गई थी हत्या की साजिश
सद्दाम ने अपनी सेटिंग के जरिए बरेली जेल में बंद अशरफ को सुख सुविधा की तमाम चीजें उपलब्ध कराई थीं. इतना ही नहीं बाहर से आने वाले उसके लोग अशरफ से जेल में घंटों मिलते थे. जेल में बैठकर साजिश रची जाती थी. लोगों को रंगदारी के लिए धमकी दी जाती थी. अशरफ से मिलने वालों के लिए एक पर्ची दी जाती थी. इसके जरिए आधा दर्जन लोग एक बार में जाकर उससे एकांत में मुलाकात कर सकते थे. उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी शूटर्स ने भी 11 फरवरी को अशरफ से मुलाकात की थी. उससे मुलाकात के 13 दिन बाद ही 24 फरवरी को प्रयागराज में उमेशपाल की हत्या की गई थी. इसी मामले में सद्दाम के खिलाफ पुलिस ने मंगलवार 21 नवंबर को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया है.
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अतीक की हत्या के बाद दुबई फरार
इसी साल 15 अप्रैल को अतीक अहमद और अशरफ की हत्या होने के बाद पुलिस ने उसके गुर्गों की तलाश तेज कर दी. डर के मारे सद्दाम दुबई भाग गया. बताया जाता है कि वेस्ट बंगाल के किसी एयरपोर्ट से उसने फ्लाइट ली थी. उसके सिर पर पहले से ही 25 हजार रुपए का इनाम रखा गया था, जिसे 17 अप्रैल को बढ़ाकर 50 हजार कर दिया गया. इसके बाद अब एडीजी जोन इनाम की राशि 1 लाख रुपए कर दी. अतीक का मामला ठंडा होने पर सद्दाम सितंबर में वापस आ गया. पुलिस को जैसे ही सूचना मिली उनके कान खड़े हो गए. पुलिस को पता चला कि उसकी कई गर्लफ्रेंड्स हैं, जिनसे वो अक्सर बात किया करता है. इनमें से तीन लड़की प्रयागराज और एक दिल्ली में रहती थी.
दिल्ली की गर्लफ्रेंड के चक्कर में धराया
यूपी एसटीएफ ने चारों लड़कियों के फोन नंबरों को सर्विलांस पर लगा दिया. इसी बीच पुलिस को सूचना मिली की सद्दाम अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने दिल्ली पहुंचा है. मोबाइल लोकेशन के आधार पर एसटीएफ की टीम ने उसे 28 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया. सद्दाम के खिलाफ सात मुकदमे दर्ज हैं. इसमें चार प्रयागराज और तीन बरेली में दर्ज हैं. इन मुकदमों में तीन मामले धोखाधड़ी और जालसाजी के हैं. उस पर पहला मुकदमा बारादरी थाने में धोखाधड़ी का लिखा गया था. इसके बाद दूसरा मुकदमा बरेली के थाना बिथरी चैनपुर में रंगदारी, षड्यंत्र रचने, गवाहों को धमकाने के मामले में दर्ज किया गया था. फिलहाल सद्दाम बरेली के सेंट्रल जेल में बंद है. प्रयागराज पुलिस उसे अपनी जेल में लाने के लिए बेकरार है.