
Rajasthan Gangrape & Suicide Case: ऊपर तस्वीर में एक ऐसी रेप पीड़िता है, कायदे से जिसका चेहरा छुपाने की जरूरत नहीं थी. लेकिन क्या करें? क़ानून आड़े आ रहा था. कानून भी अजीब है. रेप की शिकार लड़कियों और औरतों के चेहरे को छुपाता है. और रेप करने वालों को बचाता है. या फिर खुद ही उनके चेहरे छुपा देता है. ये तस्वीर राजस्थान की रहनेवाली 18 साल की आभा की है. जिसने कुछ रोज पहले अपने सामने मीडिया के तमाम माइक रख कर कानून के मुंह पर तमाचा मारा था. लेकिन अफसोस ना अब उसे कानून से कोई शिकायत है, ना पुलिस से नफरत. साथ ही कानून और पुलिस को भी अब डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आभा अब कभी नहीं बोलेगी. क्योंकि अब वो हमेशा-हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है.
पुलिस थाने पर गांववालों का धरना
तमाम मीडिया वालों को बुला कर अपनी आखिरी बात कहने के कुछ घंटे बाद ही आभा ने खुद अपनी जिंदगी खत्म कर ली. आभा के जीते जी उसकी जो बात किसी ने नहीं सुनी, लेकिन अब उसकी कहानी सामने आने पर हंगामा बरपा है. जो आभा जीते जी अपने और अपनी भाभी के लिए इंसाफ मांग रही थी. अब उसी लेटी हुई खामोश आभा को इंसाफ दिलाने के लिए उसकी अर्थी के साथ पूरा गांव इस वक्त एक पुलिस स्टेशन के बाहर बैठा है. आभा भले ही मर चुकी है, लेकिन मौत के बाद भी उसकी लाश के इर्द गिर्द से उठता शोर अब भी गूंगे बहरे कानून और इंसाफ को झकझोरने और जगाने की कोशिश कर रही है.
फिल्मी कहानी बनी हकीकत
साल 2017 में एक फिल्म आई थी 'काबिल'. इस फिल्म के हीरो और हिरोईन यानी ऋतिक रोशन और यामी गौतम का किरदार नेत्रहीन था. फिल्म में एक कॉर्पोरेटर का बेटा यामी के किरदार का रेप करता है. ऋतिक और यामी थाने जाकर रिपोर्ट लिखाते हैं. लेकिन पुलिस कुछ नहीं करती. इसके बाद हौसला बढ़ता है तो कॉर्पोरेटर का बेटा दोबारा यामी के घर में घुस कर उसका रेप करता है. अब कानून और सिस्टम से हार चुकी यामी की किरदार खुदकुशी कर लेती है.
दो मौत और सिस्टम की नाकामी
बस यूं समझ लीजिए कि आभा की कहानी इससे कुछ अलग नहीं है. बस, फर्क इतना है कि इस कहानी में कानून अंधा निकला. और इसी अंधे कानून की वजह से दो लोगों को खुदकुशी करनी पड़ी. जी हां, आभा से पहले उसकी भाभी स्वाति को भी जब कानून और पुलिस से उसके सुलगते सवालों के जवाब नहीं मिले, तो वो खुद ही जिंदा आग में जल उठी. ये कहानी सिर्फ दो मौत की कहानी नहीं है, बल्कि ये खाकी, खादी, कानून, इंसाफ, सिस्टम हरेक के मुंह पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ है. तो चलिए जीते जी आभा की, जिस कहानी को उसकी तमाम कोशिशों के बावजूद कोई नहीं सुन पाया, आज हम सब सुनते हैं.
आभा ने मीडिया को सुनाई थी आपबीती
बात सिर्फ दो दिन पहले तीन अप्रैल की सुबह की है. राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ इलाक़े में आज तक के संवाददाता हरनेक सिंह को एक फोन आता है. फोन आभा नाम की लड़की ने किया था. उसने गुजारिश करते हुए कहा कि उसे मीडिया के जरिए कुछ कहना है. हरनेक सिंह तीन और चैनल के रिपोर्टर के साथ आभा के घर पहुंच जाते हैं. वहां आभा अपनी कहानी सुनाती है.
मंत्री के रिश्तेदार समेत तीन युवकों ने लूटी अस्मत
इस कहानी की शुरुआत साल भर पहले होती है. आभा की भाभी स्वाति कॉलेज में पढ़ रही थी. घर से कॉलेज वो बस से जाया करती थी. उसी बस में तीन और लड़के अपने कॉलेज जाया करते थे. इन लड़कों के नाम हैं अशोक, लालचंद और श्योचंद. इनमें से श्योचंद राजस्थान के कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा का रिश्तेदार है. बस में आते जाते तीनों लड़कों से स्वाति की दोस्ती हो जाती है. फिर एक रोज़ मौका मिलते ही तीनों स्वाति के साथ जबरदस्ती करते हैं. और इस दौरान मोबाइल पर उन पलों को रिकॉर्ड भी कर लेते हैं. ताकि स्वाति पुलिस या घरवालों से इस बारे में कुछ ना कहे.
महीनों चलता रहा ब्लैकमेलिंग का खेल
इसके बाद तीनों ने इसी धमकी के साथ स्वाति को छोड़ दिया. दो बच्चों की मां स्वाति इस हादसे डर गई. उसे लगा कि अगर उसके वीडियो उसके गांव और ससुरालवालों तक पहुंच गए, तो उसकी शादीशुदा जिंदगी खत्म हो जाएगी. लिहाजा वो खामोश हो गई. इसके बाद स्वाति को नोचने खसोटने का ये सिलसिला महीनों चलता रहा. इज्जत की खातिर स्वाति अब तक खामोश थी. लेकिन फिर अचानक एक रोज़ वही तीनों लड़के स्वाति को धमकी देते हैं कि अब वो अपनी ननद आभा से उन्हें मिलाए, उससे फोन पर बात कराए. वरना वीडियो लीक कर देंगे. स्वाति अपना घर टूटने के डर से आभा को सारी बात बता देती है.
23 दिसंबर 2023 - स्वाति और आभा संग एक साथ दरिंदगी
अब स्वाति के साथ-साथ उसकी ननद आभा भी पूरी तरह से उन तीनों लड़कों के चंगुल में फंस चुकी थी. आभा नहीं चाहती थी कि उसकी भाभी की जिंदगी खराब हो. पर उसे पता नहीं था कि अब खुद उसकी जिंदगी भी अजाब हो चुकी है. ये सिलसिला भी महीनों चलता रहा. घर की इज्जत की खातिर दोनों अब तक खामोश थी. लेकिन फिर तभी 23 दिसंबर 2023 को जब स्वाति और आभा घर लौट रही थी, तब रास्ते में तीनों लड़के फिर से टकरा जाते हैं. इस बार तीनों पहली बार एक साथ दोनों की आबरू लूटते हैं.
स्वाति ने पेट्रोल डालकर खुद को जलाया
लुटती हुई आबरू के बीच स्वाति अपने सामने अपनी ननद को भी लुटती देख रही थी. उससे ये बर्दाश्त नहीं हुआ. इसके बाद उसी शाम स्वाति ने खुद पर पेट्रोल डाल कर खुद को जिंदा जला लिया. हालांकि उसकी सास और कुछ लोगों की उस पर नजर पड़ गई और उन्होंने फौरन आग बुझा दी. लेकिन तब तक स्वाति 80 फीसदी झुलस चुकी थी. बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया. लेकिन फिर दो महीने बाद 23 फरवरी स्वाति ने दम तोड़ दिया.
इज्जत की खातिर स्वाति ने दी जान
इस बीच स्वाति के झुलसने के बाद स्वाति के घरवालों ने बिना सच्चाई जाने स्वाति के ससुरालवालों पर ही उसे जला डालने का आरोप लगाया. जिस पर पुलिस ने स्वाति के पति और ननद आभा समेत पूरे घरवालों पर मुकदमा दर्ज कर लिया. लेकिन मरने से ऐन पहले खुद स्वाति ने पूरे गांव वालों के सामने ये बयान दिया कि उसका पति, ननद और उसके ससुराल के लोग बेकसूर हैं. उसने खुद को आग इज्जत की खातिर लगाई थी. स्वाति की मौत के बाद अब आभा ने भी हिम्मत जुटाई और घरवालों को सारी कहानी बता दी.
मंत्री के रिश्तेदार को बचाने में जुटी राजस्थान पुलिस
इसके बाद आभा उन तीन लड़कों के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने थाने गई. और यहीं से अंधे कानून की अंधी कहानी की शुरुआत होती है. पहले तो पुलिस आभा पर दबाव डालती है कि वो एक या दो लड़के का ही नाम ले, तीनों का नहीं. खास कर उस लड़के का तो बिल्कुल नहीं, जो राज्य के मंत्री का रिश्तेदार है. यानी पुलिस खुद ही तय कर रही है कि किस रेपिस्ट को छोड़ना है और किसे बचाना है. इतना ही नहीं उन तीनों लड़कों को गिरफ्तार करने की बजाय उल्टे आभा से खुद इलाके का डीएसपी ऐसे ऐसे सवाल पूछ रहा था जिसे सुन कर आभा को लग रहा था जैसे एक बार फिर उसका बलात्कार हो रहा है.
डिप्टी एसपी और पुलिस वालों की बेशर्मी
अंधे कानून के अंधेपन का तमाशा अभी खत्म नहीं होता है. आभा के साथ गैंगरेप हुआ था. जाहिर है मेडिकल रिपोर्ट से उसकी सच्चाई सामने आ जाती. पर कानून को अपने हिसाब से नचाने वाले डिप्टी एसपी और उनके बहादुर पुलिस वालों की बेशर्मी देखिए कि मेडिकल टेस्ट के लिए आभा को उसके गांव से श्रीगंगानगर अकेले उस दिन अस्पताल भेजते हैं, जिस दिन अस्पताल में छुट्टी थी. कोई डॉक्टर तक नहीं था. अभी बेशर्मी खत्म नहीं हुई है. इसके बाद अगले दिन फिर आभा अपने गांव से शहर के उस अस्पताल तक पहुंचती है. खुद से. इस बार उसे थोड़ी सी देरी हो जाती है. बस, इस देरी के लिए उसके साथ ऐसा सलूक होता है, जैसे वो रेप विक्टिम नहीं, बल्कि खुद रेपिस्ट है.
रेप पीड़िता को ही धमाका रही थी राजस्थान पुलिस
हमाम के नंगेपन का आलम देखिए खाकी के साथ-साथ सफेद कोट वाले डॉक्टर साहब भी वैसे ही कानून का तमाशा बना रहे थे, जैसे खाकी वाले बड़े बाबू उन्हें बताते जा रहे थे. आभा पढ़ी लिखी थी. उसने निर्भया की कहानी भी सुन रखी थी. उसे लगता था कि अब देश बदल चुका है. पुलिस वाले किसी बलात्कारी को बख्शेंगे नहीं. इसलिए वो तमाम दुश्वारियों के बावजूद उसके और उसकी भाभी के गुनहगारों को सजा दिलाना चाहती थी. लेकिन आभा की ये जिद खाकी को काट रही थी. लिहाजा, अब नौबत ये आ गई कि आभा की भाभी के उस मुकदमे की धमकी दे कर जिसे खुद मरने से पहले उसकी भाभी झुठला चुकी थी, पुलिस वाले अब उल्टे आभा और उसके घरवालों को जेल भेजने की धमकी देने लगे.
पुलिस ने हटाया मंत्री के रिश्तेदार का नाम
पर आभा जितना लड़ सकती थी. लड़ी. उसकी लड़ाई के आगे कानून को झुकना भी पड़ा. तीन में से दो गुनहगारों के खिलाफ गैंगरेप का केस दर्ज कर पुलिस ने उन्हें जेल भी भेज दिया. लेकिन तीसरे और सबसे ताकतवर गुनहगार की लड़ाई अब भी जारी थी. क्योंकि तीसरा गुनहगार कोई मामूली गुनहगार नहीं था. राज्य के एक मंत्री का रिश्तेदार था. लिहाजा पुलिस ने अपना पूरा फर्ज निभाते हुए उसे इस केस से दूर कर दिया. आभा इस तीसरे गुनहगार को भी सजा दिलाने के लिए लड़ती रही. लेकिन इस लड़ाई में कोई उसका साथ नहीं दे रहा था. उल्टे उसकी वजह से घर और घर के लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही थी. इस बात का अहसास अब आभा को होने लगा था.
आभा ने मीडिया को सुनाई आपबीती
लिहाजा, दो दिन पहले यानी तीन अप्रैल को उसने एक आखिरी फैसला लिया. वो अपनी आखिरी बात मीडिया के जरिए देश तक पहुंचाना चाहती थी. और इसीलिए उसने तीन अप्रैल की सुबह कुल चार रिपोर्टर को फोन किया. उनमें से एक आज तक के हरनेक सिंह थे. तीन अप्रैल दोपहर करीब 12 बजे आभा अपनी पूरी कहानी सुनाती है. रिपोर्टर और कैमरामैन आभा के घर से लौट आते हैं. हरनेक सिंह अपनी रिपोर्ट आज तक ऑफिस को भेज देते हैं.
आभा ने फांसी लगाकर की खुदकुशी
उधर, मीडिया से बात करने के बाद आभा उसी रात लगभग 12 घंटे बाद अपने घर में फांसी के फंदे पर झूल जाती है. फांसी पर झूलने से पहले वो अपनी कलाई भी काट लेती है. यानी वो खुद के जिंदा बच जाने की कोई भी गुंजाइश छोड़ना ही नहीं चाहती थी. काश... आभा आज तक को अपनी कहानी सुनाने के बाद थोड़ा इंतजार कर लेती. पर अफसोस ऐसा हो नहीं पाया. शायद वो अंधे बहरे और गूंगे कानून के उकता चुकी थी. उसे यकीन हो चला था कि जो इंसाफ उसे जीते जी नहीं मिल रहा शायद उसकी मौत उसे वो इंसाफ दिला दे. और कमाल देखिए आभा गलत भी नहीं थी.
पुलिस के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
आभा की मौत के बाद जैसे ही उसकी मौत और उसकी और उसकी भाभी की सच्चाई गांव और गांव के बाहर तक पहुंची, लोगों का नजरिया ही बदल गया. अब वही लोग उसकी लड़ाई को अपनी लड़ाई बना कर पुलिस के खिलाफ सड़क पर उतर आए. पुलिस को भी अहसास था कि आभा और स्वाति की मौत का असली जिम्मेदार उन तीनों के अलावा खुद पुलिस भी है. लिहाजा, अब खुद पुलिस के पास भी अपने बेशर्म चेहरे को छुपाने का कोई रास्ता नहीं बचा था. मजबूरन उन्हें उस तीसरे गुनहगार को भी गिरफ्तार करना ही पड़ा. जी हां, आभा की मौत के ठीक 24 घंटे बाद उस तीसरे गुनहगार को पुलिस गिरफ्तार कर लेती है, जिसे वो अब तक खुद ही भगाती और बचाती रही थी.
पता नहीं ये सवाल पूछना चाहिए कि नहीं. मालूम भी नहीं है कि ये सवाल अच्छा है या बुरा है. पर जेहन से ये सवाल जाने का नाम ही नहीं ले रहा है. सवाल ये कि अगर आभा ने अपनी जान न दी होती, तो क्या ये तीसरा गुनहगार पकड़ा जाता?
(सूरतगढ़, श्रीगंगानगर से हरनेक सिंह की रिपोर्ट)