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लाल बत्ती की हसरत, 'मैडम सर' का भौकाल, फर्जीवाड़े की फेहरिस्त... इस गलती ने डुबोई IAS पूजा खेडकर की लुटिया!

एक पुरानी कहावत है कि मुजरिम कितना भी शातिर क्यों न हो, एक गलती जरूर करता है. उसी एक गलती की वजह से उसका सारा भांडा फूट जाता है. ये कहानी पूजा खेडकर की है, जो चंद रोज पहले तक आईएएस की ट्रेनिंग कर रही थी. उनका हर तरफ जलवा ही जलवा था.

आईएएस मैडम साहिबा को अब जेल जाने से कोई रोक ही नहीं सकता. आईएएस मैडम साहिबा को अब जेल जाने से कोई रोक ही नहीं सकता.
aajtak.in
  • पुणे,
  • 20 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 8:20 PM IST

एक पुरानी कहावत है कि मुजरिम कितना भी शातिर क्यों न हो, एक गलती जरूर करता है. उसी एक गलती की वजह से उसका सारा भांडा फूट जाता है. ऐसी ही एक गलती पूजा खेडकर ने की, जो चंद रोज पहले तक आईएएस की ट्रेनिंग कर रही थी. उनका हर तरफ जलवा ही जलवा था. आईएएस मैडम की शान में पीछे खड़े पुलिस वाले, लाल नीली बत्ती वाली कार और नंबर प्लेट के ऊपर लिखा महाराष्ट्र सरकार, उनका भौकाल देखकर आम लोग सहम जाते थे. लेकिन उनको सरकारी लाल बत्ती वाली गाड़ी का इस कदर शौक था कि उसे पाने के लिए कुछ दिनों का इंतजार भी भारी पड़ रहा था.

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बस इसी लाल नीली बत्ती ने उनकी बत्ती ऐसी गुल कर दी कि आईएएस मैडम साहिबा को अब जेल जाने से कोई रोक ही नहीं सकता. महीने भर से पूरे देश में डॉक्टर बनाने वाले नीट एग्जाम की धांधली को लेकर यूं ही हंगामा मचा हुआ है. अब उसी हंगामे के बीच खामोशी से यूपीएससी एग्जाम की धांधली को लेकर ऐसा शोर उठा है कि देखते ही देखते ट्रेनी आईएएस पूजा खेडकर का नाम हर चैनल और अखबारों की सुर्खियों में है. यूपीएससी की जांच में पता चला है कि पूजा ने परीक्षा में चयन के लिए नियमों के तहत मान्य अधिकतम सीमा से भी अधिक बार परीक्षा दी और उसका लाभ उठाया है. 

यूपीएससी जांच से यह पता चला है कि पूजा खेडकर ने अपना नाम, अपने पिता और माता का नाम, अपनी तस्वीर/हस्ताक्षर, अपनी ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और पता बदलकर अपनी फर्जी पहचान बनाकर स्वीकार्य सीमा से अधिक प्रयास का धोखाधड़ी से लाभ उठाया. यूपीएससी ने उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का फैसला किया है. इसके तहत थाने में एफआईआर कराई जा रही है. सिविल सेवा परीक्षा 2022 के नियमों के तहत उनकी उम्मीदवारी रद्द करने और भविष्य की परीक्षाओँ में शामिल होने पर प्रतिबंध लगाने के लिए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है.

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यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन की इस जांच से साफ हो गया है कि आईएएस बनने के लिए पूजा खेडकर ने तमाम तरह की धोखाधड़ी की है. दरअसल यूपीएससी के एग्जाम में बैठने के लिए अलग-अलग कैटेगरी के तहत उम्मीदवारों को अलग-अलग मौके मिलते हैं. मसलन जनरल कैटेगरी का कोई भी उम्मीदवार 32 साल की उम्र से पहले तक कुल छह बार यूपीएससी का एग्जाम दे सकता है. ओबीसी कैटेगरी के तहत 35 साल की उम्र तक कुल 9 बार इम्तेहान देने की छूट है. जबकि एससी और एसटी कोटा के तहत 37 साल की उम्र तक यूपीएससी के इम्तेहान में बैठा जा सकता है.

पूजा खेडकर ने एग्जाम क्लीयर करने के लिए तय सीमा से ज्यादा बार इम्तेहान दिया है. इसके लिए हर बार उसने नए नाम और नए पहचान का सहारा लिया. यहां तक कि इम्तेहान में बैठने के लिए अपने मां-बाप का नाम तक बदल डाला. लेकिन ये धोखाधड़ी तो कुछ भी नहीं है. असली फर्जीवाड़ा तो कुछ और ही है. दरअसल पूजा ने साल 2022 में यूपीएससी का एग्जाम क्लीयर किया था. ऑल इंडिया रैंक था- 841. चूंकि वो इम्तेहान में ओबीपीसी नॉन क्रीमी लेयर के कोटे से बैठी थी और साथ ही दिव्यांगता को कोटे से आई थी, लिहाजा 841 रैंक के बावजूद उन्हें आईएएस की कैटेगरी में रखा गया था.

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इसके बाद में ट्रेनिंग के लिए सभी कामयाब छात्रों के साथ पूजा खेडकर भी मसूरी के लाल बहादुर शास्त्री प्रशासन अकादमी पहुंची. दो साल की ट्रेनिंग में अब कुछ महीने ही बचे थे. इसी बीच उन्हें ट्रेनी आईएएस अफसर के तौर पर असिस्टेंट कलेक्टर बना कर पुणे कलेक्टरेट ऑफिस में तैनाती दे दी गई. बस यहीं से असली कहानी शुरू हुई. हुआ यूं कि पुणे के कलेक्टर के ऑफिस में तैनाती का लेटर मिलते ही पूजा ने कलेक्टर के ऑफिस इंचार्ज को पहले फोन किया और फिर व्हाट्स एप मैसेज. उसने कहा कि वो वहां चार्ज लेने आ रही है. इसलिए उसके लिए उसके लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं कर दी जाएं.

मसलन लाल नीली बत्ती वाली सरकारी गाड़ी, बंगला, सुरक्षा के लिए कांस्टेबल और बाकी सरकारी इंतजाम कर दिया जाए. लेकिन मैडम के कहने पर भी कुछ हुआ नहीं. लिहाजा तय तारीख पर मैडम कलेक्टर ऑफिस पहुंची. शायद उन्हें पता था कि उस दिन कलेक्टर सुहास दिवासे शहर में नहीं हैं. कलेक्टर ऑफिस पहुंचते ही उन्होंने उनके कमरे पर कब्जा कर लिया. उनका नेम प्लेट हटा कर अपना नेम प्लेट लगा लिया. कुर्सी सोफा फर्नीचर सब बाहर कर दिया. लेटरहेड से लेकर विजिटिंग कार्ड तक छप चुका था. मैडम पहुंची भी पूरी टशन में थी. नीला लाल लगी बत्ती वाली ऑडी कार में. 

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उस कार के पीछे बाकायदा महाराष्ट्र सरकार भी लिखवा रखा था. अब यहां तक तो ठीक था. लेकिन अब अगले दिन जैसे ही कलेक्टर साहब दफ्तर पहुंचे, अपने ही कमरे का मंजर देख उनके होश उड़ गए. पता किया तो मैडम के बारे में पता चला. वो इस बात पर हैरान थे कि एक ट्रेनी आईएएस अफसर सीधे कलेक्टर का चार्ज कैसे ले सकती है? बात और शिकायत मुंबई में बैठे चीफ सेक्रेटरी साहब तक पहुंची. जांच हुई तो पता चला कि शिकायत सही है. आनन-फानन में मुंबई से नया आदेश निकला और मैडम को पुणे से वाशिम ट्रांसफर कर दिया गया. यहां मामला अब भी दब गया होता. 

लेकिन अब मैडम के साथ जो कुछ कलेक्टर ऑफिस में हुआ था, वो जानकारी घर तक पहुंच गई. मैडम की मम्मी को भी गुस्सा आ गया. कुछ लोकल अखबारों में बेटी की तस्वीर और खबर भी छप चुकी थी. मैडम की मम्मी अब मीडिया को ही धमकाने लगी. अब मीडिया भी कहां अर्दब में आने वाला था? खोद कर मैडम की मम्मी का चंबल की रानी वाला वो फोटो और वीडियो ढूंढ निकाला, जिसमें वो हाथ में पिस्टल लहराते किसी को धमका रही थी. ये मामला और तूल पकड़ गया. अब मम्मी के बाद बचे पापा, तो पता चला कि बेटी की तरह पापा दिलीप खेडकर भी कभी आईएएस अफसर थे. 

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नौकरी से रिटायर होते-होते 40 करोड़ से ज्यादा की संपति के मालिक बन बैठे. इतना पैसा आया था तो सोचा कि सत्ता का सुख भी भोग लूं. इसलिए अभी इसी साल हुए लोकसभा चुनाव में भी कूद पड़े. चुनाव तो हार गए, पर चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को सौंपी संपत्ति का ब्यौरा अब खुद उनके साथ-साथ उनकी आईएएस बेटी के गले पड़ गया. चूंकि संपत्ति के ब्यौरे में अपने अलावा उन्होंने पत्नी और बेटी की भी जानकारी दी थी, तो पता चला पूरा परिवार आधा अरबपति है. जिस बेटी ने ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर के कोटे से यूपीएससी का इम्तेहान पास किया, उसके नाम 17 से 20 करोड़ की संपत्ति है.

इस संपत्ति से लाखों रुपए किराया भी आता है. अब यूपीएससी के इम्तेहान में बैठने वाले नॉन क्रीमी लेयर के छात्रों का पैमाना ये है कि उनकी आमदनी सालाना 8 लाख से कम होनी चाहिए, तो लाल नीली बत्ती की छटपटाहट में करोड़ों की संपत्ति सामने आ गई. सवाल उठने लगे कि गरीबी का ये कौन सा कोटा है? जो करोड़पतियों के हिस्से आता है. अब बात निकल चुकी थी, तो दूर तक जानी ही थी. अब मीडिया और मीडया के कैमरे पूजा के खानदान की तरफ घूम चुके थे. मां का लहराता पिस्टल, कानून के लपेटे में आ चुका था. लिहाजा अब गाज़ मां पर गिरी. मां को भी अहसास हो चुका था.

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लिहाजा अचानक मां गायब हो गई, लेकिन पुलिस तो पुलिस ठहरी. ढूंढ और सूंघ कर निकाल ही लिया. अब मां गिरफ्तार है और जेल में है. बीवी और बेटी की हरकतों से बाप को अंदाजा हो चुका था कि देर सवेर मेरा भी नंबर आएगा. लिहाजा गिरफ्तारी से बचने के लिए वो अदालत पहुंच गए. अतंरिम जमानत मांगने के लिए. बेटी की वजह से बाप की जायदाद जब जमाने के सामने आई, तो अहसास हो चुका था कि नौकरी से इतनी कमाई और इतनी संपत्ति तो ईमानदारी से कमाई ही नहीं जा सकती. लिहाजा अब उनकी भी फाइल खुल चुकी थी. आईएएस रहते हुए उन्होंने रिश्वत खाई, उसकी जांच हो रही है.

ये तो रही मां-बाप की कहानी, अब जरा आईएएस मैडम की सुन लीजिए. नाम, पता, जात, मां-बाप, फोन नंबर, ईमेल आईडी, इन सबका फर्जीवाड़ा छोड़िए, मैडम के ऊपर जिस सबसे बड़े फर्जीवाड़े का इल्जाम है, वो है खुद को दिव्यांग बताने का. दरअसल यूपीएससी एग्जाम में बैठने के दौरान पूजा खेडकर ने खुद के दिव्यांग होने का एक सर्टिफिकेट दिया था. इस मेडिकल सर्टिफिकेट के मुताबिक उन्हें मानसिक दिक्कत है और नजरें कमजोर. रौशनी जा रही है. मानसिक दिक्कत के बारे में उन्होंने बताया कि उन्हें चीज़ें याद नहीं रहती. यूपीएससी मे ऐसे छात्रों के लिए बाकायदा दिव्यांग कोटा होता है. 

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यहां तो मैडम पूजा के पास कोटा का दो-दो हथियार था. एक ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर का हथियार और दूसरा दिव्यांगता का हथियार. इन दोनों हथियारों के बलबूते पर उन्होने यूपीएससी का इम्तेहान क्लीयर किया और 2022 में ऑल इंडिया रैंक 841 के साथ आईएएस बन गई. हालांकि रिटन और इंटरव्यू को मिलाकर पूजा के जो कुल नंबर आए थे, अगर वही नंबर किसी जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट को आता, तो सवाल ही नहीं था कि वो ये इम्तेहान पास कर पाती. आईएएस बनते ही मैडम अब मसूरी पहुंच गई. ट्रेनिंग शुरू हो गई, लेकिन यूपीएससी के भी अपने कुछ कायदे कानून हैं. 

यूपीएससी चाहता था कि पोस्टिंग से पहले पूजा दिव्यांगता के अपने सारे रिपोर्ट सौंप दे. इसके लिए यूपीएससी ने बाकायदा एम्स में उनकी जांच कराने का फैसला किया. ये रूटीन जांच है. यूपीएससी सिर्फ सरकारी अस्पतालों की रिपोर्ट को ही मानता है. इस रिपोर्ट के जरिए इस बात की तस्दीक करना चाहता था कि पूजा को सचमुच मानसिक बीमारी है और उनकी नजरें कमजोर हैं. पूजा के मेडिकल टेस्ट के लिए यूपीएससी ने कुल छह बार एम्स में डॉक्टरों से अप्वाइंटमेंट लिया. लेकिन वो हर बार बहाना बना कर टेस्ट से बचती रही. पहली बार 22 अप्रैल 2022 को उसे टेस्ट के लिए कहा गया.

पूजा खेडकर ने कोरोना का बहाना बनाकर जाने से इनकार कर दिया. इसके बाद 26 मई 2022 को दूसरी बार एम्स जाने को कहा गया. वो तब भी नहीं गई. फिर 1 जुलाई 2022, 26 अगस्त 2022, 2 सितंबर 2022 और 25 नवंबर 2022 को भी टेस्ट के लिए एम्स जाने को कहा गया. इस दौरान उसका एमआरआई भी किया जाना था, ताकि ये पता किया जा सके कि उसकी रौशनी जाने की वजह क्या है. लेकिन वो बार-बार यूपीएससी के कहने के बावजूद टेस्ट के लिए नहीं गई. कुछ वक्त बाद उसने एक प्राइवेट अस्पताल का मेडिकल सर्टिफिकेट यूपीएससी को सौंप दिया. यूपीएससी ने रिपोर्ट लेने से इनकार कर दिया. 

इसी के बाद यूपीएससी ने पूजा का मामला कैट यानी सेंट्रल ए़़डमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के पास भेज दिया. कैट ने भी पूजा की दिव्यांगता को लेकर प्राइवेट हॉस्पीटल के मेडिकल सर्टिफिकेट को मानने से इनकार कर दिया. कायदे से इसके बाद पूजा की कहीं तैनाती नहीं होनी चाहिए थी. लेकिन हैरत अंगेज तौर पर इसी साल जून में उसको महाराष्ट्र कैडर देते हुए पुणे में ट्रेनी आईएएस अफसर के तौर पर असिस्टेंट कलेक्टर बना कर भेज दिया गया. उसकी इस तैनाती का फरमान डीओपीटी यानी डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग की तरफ से जारी किया गया था. डीओपीटी सीधे प्रधानमंत्री के अधीन आता है. 

अब सवाल ये है कि जब पूजा खेडकर ने दिव्यांगता का सबूत यूपीएससी के सामने रखा ही नहीं. यूपीएससी के बार-बार कहने पर मेडिकल टेस्ट कराया ही नहीं, जिसके रिपोर्ट को मानने से कैट तक ने इनकार कर दिया. उस पूजा को पोस्टिंग कैसे दे दी गई? जानकारों की मानें तो यहां गलती यूपीएससी से नहीं बल्कि डीओपीटी से हुई है. क्या डीओपीटी में पूजा या उसके परिवार का कोई जानकार बैठा है? इसकी जांच भी होनी चाहिए. वैसे जांच की शुरुआत हो चुकी है. यूपीएससी के हुक्म पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पूजा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है. 

पुलिस ने जिन धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, उनके तहत गिरफ्तारी तय है. यूपीएससी ने भी साफ कर दिया है कि उसने धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा किया है. इसीलिए उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया है. जवाब आते ही ना सिर्फ पूजा का रिजल्ट रद्द होगा, बल्कि उनके नाम के आगे या पीछे लगा आईएएस का तमगा भी हट जाएगा. यानी कुल मिलाकर, जिस आईएएस के तमगे के साथ लाल-नीली बत्ती वाली गाड़ी पाने की बेसब्री में पूजा खेडकर ने एक छोटी सी गलती की थी, वही छोटी सी गलती उसे कहां से कहां पहुंचा गई.  वो कुछ दिन सब्र कर लेती, तो क्या पता ये सारा फर्जीवाड़ा कभी सामने ही न आ पाता.

इनपुट- पुणे से ओंकार वाबले के साथ मनीषा झा और सुप्रतिम बनर्जी.

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