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दाऊद का दोस्त, किडनैपिंग किंग, IAS बनने की ख्वाहिश रखने वाला बबलू ऐसे बना अंडरवर्ल्ड डॉन

सर्राफ अपहरण कांड में बरेली जेल में बंद अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव को आज (16 अक्टूबर) प्रयागराज की जिला अदालत में पेश किया जाएगा. उसे कल ही बरेली से प्रयागराज के लिए रवाना कर दिया गया था. कभी आईएएस बनने और सेना में जाने की चाहत रखने वाले बबलू श्रीवास्तव ने एक घटना की वजह से जरायम की दुनिया में कदम रख दिया.

अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव को प्रयागराज की जिला अदालत में पेश किया जाएगा. अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव को प्रयागराज की जिला अदालत में पेश किया जाएगा.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 16 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 7:48 AM IST

उसे रसूख बहुत पसंद था. इसलिए प्रशासनिक अफसर बनना चाहता था. आईएएस बनकर एक बेहतरीन जिंदगी जीना चाहता था. बड़े भाई जब भारतीय फौज में अधिकारी बने तो उसे वर्दी भी भाने लगी. वर्दी के चटख रंग के साथ मिलने वाला सम्मान उसे अच्छा लगता था. पिता शिक्षक थे, तो परिवार का माहौल हमेशा से पढ़ने-लिखने वाला ही रहा था. हायर एजुकेशन के लिए उसे उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से लखनऊ भेज दिया गया. वो कानून की पढ़ाई करने लगा. लेकिन लॉ कॉलेज में हुई एक घटना ने उसकी जिंदगी बदल दी. नफरत और बदले की आग में वो इस कदर जला कि देखते ही देखते ही अंडरवर्ल्ड डॉन बन गया. जी हां, हम बबलू श्रीवास्तव की बात कर रहे हैं, जिसकी जरायम की दुनिया में एक जमाने में तूती बोलती थी. उसे सर्राफ अपहरण कांड में आज प्रयागराज की जिला अदालत में पेश किया जाएगा.

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अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव को भारी सुरक्षा के बीच सड़क मार्ग से बरेली जेल से प्रयागराज के लिए रविवार को रवाना कर दिया गया था. उसकी सुरक्षा में 2 इंस्पेक्टर रैंक के अफसरों के साथ 50 पुलिसकर्मी मौजूद थे. चार गाड़ियों में सवार होकर पुलिस का काफिला जब निकला तो बबलू को डर सताने लगा. उसे पता है कि यूपी में आजकल अपराधियों की गाड़ी पलट जाती है, जिसमें वो मारे जाते हैं. यही वजह है कि वो बरेली से प्रयागराज नहीं जाना चाहता था. उसने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की अपील की थी. लेकिन इसकी अनुमति नहीं मिलने की वजह से उसे आना पड़ा. बबलू के डर की दूसरी वजह प्रयागराज भी है, जहां पुलिस सुरक्षा में माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी गई थी. बबलू ने भी हजारों दुश्मन बनाए हैं. अब उसे डर है कि कोई मौका देखकर उसकी हत्या न कर दे. 

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आईएएस बनने की चाहत लिए लखनऊ आया

बबलू श्रीवास्तव का असली नाम ओम प्रकाश श्रीवास्तव है. वो उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का रहने वाला है. जिला मुख्यालय के आम घाट कॉलोनी में उसका परिवार रहता था. बेहद सामान्य परिवार में पैदा हुआ बबलू शुरू से ही पढ़ने में तेज था. वो पहले आईएएस अफसर बनना चाहता था, लेकिन बड़े भाई विकास श्रीवास्तव के भारतीय सेना में कर्नल बनने के  बाद उसकी ख्वाहिश बदल गई. अब वो भी वर्दी पहनकर फौजी बनने का सपना देखने लगा. आगे की पढ़ाई और तैयारी के लिए लखनऊ चला आया. यहां लखनऊ के लॉ कॉलेज में दाखिले के बाद उसने अपनी तैयारी शुरू कर दी. साल 1982 की बात है. कॉलेज में चुनाव हो रहे थे. उसके एक दोस्त नीरज जैन ने महामंत्री पद के लिए पर्चा दाखिल कर दिया. बबलू भी उसके लिए प्रचार करने लगा. एक दिन विरोधी गुट के साथ झगड़ा हो गया. इसमें एक छात्र को चाकू मार दिया गया. 

नफरत और बदले की आग ने अपराधी बनाया

70-80 के दशक में लखनऊ में गैंगवार चरम पर था. उस वक्त अरुण शंकर शुक्ला 'अन्ना' का जरायम की दुनिया में जलवा था. लॉ कॉलेज में हुए झगड़े में घायल छात्र अन्ना का करीबी निकल गया. इस घटना से नाराज अन्ना ने झूठे केस में फंसाकर बबलू को जेल भिजवा दिया. कुछ दिनों बाद वो जमानत पर छूटकर बाहर आया तो अन्ना गैंग ने उसे चोरी के एक दूसरे झूठे केस में फंसवा दिया. बबलू को फिर जेल हो गई. इस घटना के बाद वो बेहद नाराज हो गया. उसके मन में अन्ना के लिए नफरत पैदा हो गई. अब वो किसी भी हाल में उससे बदला लेना चाहता था. जेल से बाहर आते ही उसने सबसे पहले अन्ना के विरोधी गैंग के मुखिया माफिया रामगोपाल मिश्र से मुलाकात की थी. उसके लिए काम करने लगा. उनदिनों अन्ना और रामगोपाल के बीच खूनी रंजिश चरम पर थी. हालांकि, बाद के दिनों में अन्ना की मां की पहल पर ये रंजिश खत्म हो गई थी. 

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ऐसे हुआ किडनैपिंग किंग के नाम से कुख्यात

अरुण शंकर शुक्ला 'अन्ना' और रामगोपाल मिश्र के बीच सुलह जैसी स्थिति देखकर बबलू श्रीवास्तव ने उनका गैंग छोड़ दिया. अब वो सारे गुर सीख चुका था, जिससे कि एक नया गैंग बनाया जा सके. उसने एक गैंग बनाकर किडनैपिंग का काम शुरू कर दिया. उसने उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और महाराष्ट्र तक अपनी पकड़ बना ली. वो लोगों का अपहरण कराकर उनसे फिरौती वसूल करता था. कई लोगों को अपहरण की धमकी देकर पैसे मांगता था. उसने कई छोटे-छोटे गैंग सक्रिय कर रखे थे, जो लोगों का अपहरण करके उसे सौंप देते थे. उसके बाद वो अपने हिसाब से उस 'पकड़' का सौदा करता था. इस तरह जरायम की दुनिया में वो किडनैपिंग किंग के नाम से कुख्यात हो गया. उसके काले कारनामों की लिस्ट बढ़ती जा रही थी. यूपी पुलिस ने भी उसके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी थी. पकड़े जाने के डर से वो भारत से भागकर नेपाल चला गया.

मुंबई ब्लास्ट के बाद दाऊद से दोस्ती में दरार

नेपाल में वो माफिया डॉन मिर्जा दिलशाद बेग के संपर्क में आया. उसके कहने पर वो साल 1992 में दुबई चला गया. वहां मिर्जा बेग के जरिए वो अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम तक पहुंच गया. मिर्जा बेग दाऊद के इशारे पर भारत के खिलाफ जासूसी का काम भी करता था. दाऊद से मुलाकात के बाद बबलू की ताकत बढ़ गई. अब वो किडनैपिंग को छोड़कर स्मगलिंग करने लगा. विदेश से हथियार और ड्रग्स की तस्करी में दाऊद का साथ देने लगा. इसी बीच साल 1993 में मुंबई में सीरियल ब्लास्ट हुआ, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो गई. इन धमाकों का मास्टरमाइंड दाऊद इब्राहिम को बताया गया. इस घटना ने बबलू को अंदर से तोड़ दिया. उसे समझ आ गया कि वो अपराधी नहीं बल्कि देशद्रोही के साथ मिलकर काम कर रहा है. मुंबई ब्लास्ट के बाद उसने दाऊद का साथ छोड़ दिया. उसके साथ डी कंपनी को छोड़ने वालों में छोटा राजन भी शामिल था.

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गाजीपुर के लड़के की पाकिस्तान में गूंज 

साल 2021 में भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकी लश्कर-ए-तैयबा चीफ हाफिज सईद पर एक जानलेवा हमला हुआ था. इसमें तीन लोग मारे गए थे. इसके साथ ही 20 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. इस हमले में अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव का नाम आया था. उस वक्त वो जेल में बंद था. पाकिस्तान के गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह ने खुद बबलू का नाम लिया था. उन्होंने बबलू को रॉ का फ्रंट मैन बताते हुए कहा था कि वो रॉ के टेरर फाइनेंसिंग और फैसिलेटिंग नेटवर्क को चलाता है. वैसे दबे जुबान कहा जाता है कि दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन से दुश्मनी लेने के बाद बबलू भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए काम करने लगा था. उसकी मदद से ही नेपाल के माफिया और पाकिस्तान के मददगार डॉन मिर्जा दिलशाद बेग को मार गिराया गया था. उसने मिर्जा बेग को फंसाने के लिए अपने गैंग की एक महिला अर्चना शर्मा को दुबई भेजा था.

साल 1995 में बबलू श्रीवास्तव को सिंगापुर से गिरफ्तार किया गया था. वो तबसे बरेली जेल में बंद है. उसके खिलाफ अपहरण और हत्या के साथ कई वारदातों में केस दर्ज है. समय समय इन मामलों की सुनवाई होती रहती है, जिसमें पेशी के लिए उसे जेल से बाहर आना पड़ता है.

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