
Auraiya child kidnapping Case: 13 साल के एक बच्चे को अगवा करने के बाद बदमाश उसे एक ट्राली बैग में डालकर कार की डिग्गी में बंद कर देते हैं. लेकिन इसी दौरान किसी तरह से पुलिस अपहरणकर्ताओं तक पहुंच जाती है. मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी. दम घुटने की वजह से उस बच्चे की जान जा चुकी थी. इसके बाद शुरू होता है यूपी पुलिस का एनकाउंटर. और जब तक ये एनकाउंटर खत्म होता, तब तक सभी किडनैपर्स के पैरों में गोली लग चुकी थी.
यूपी पुलिस की सटीक निशानेबाजी
अवधेश कुमार, दीपक गुप्ता, अंकित, शोभन यादव, जतिन दिवाकर, रवि, आशीष और रियाज उर्फ मुन्ना ये नाम उन शातिर बदमाशों के हैं, जो बारी-बारी से पुलिस की गोली लगने के बाद अस्पताल में पहुंचे. ये सब अस्पताल के बेड पर लेटे हुए दिखाई दिए. आठों के आठ घायल हैं. आठों के आठ का या तो दाहिना पैर घायल है या फिर बांया पैर. दाहिने और बांये पैर को छोड़ दें, तो बाकी कहीं से भी ये जख्मी नहीं हैं. ना ही इनके जिस्म पर कोई चोट के निशान हैं. यूपी पुलिस का निशाना ही इतना सटीक था कि मजाल क्या कि उनकी मर्जी के बिना गोली एक इंच भी इधर से उधर हो जाए. गोली वहीं लगी, जहां वो मारना चाहते थे.
एनकाउंटर से पहले की कहानी
जी हां, ये आज के दौर के एनकाउंटर की वही जानी-पहचानी कहानी है. ये आठों बदमाश यूपी पुलिस के एनकाउंटर का शिकार हुए हैं. उन आठों की गिनती के साथ ये उन दो सौ से ज्यादा लोगों में शामिल हो चुके हैं, जिन्हें एनकाउंटर के नाम पर यूपी पुलिस ने एक ही जगह पर पैर में गोली मारी है. यूपी पुलिस के इस ओपन सीक्रेट एनकाउंटर के सच के बारे में इससे ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है. इसीलिए अब इस एनकाउंटर से पहले की कहानी पर चलते हैं. हालांकि एनकाउंटर से पहले यूपी पुलिस ने जो कुछ किया, उसके लिए उसकी तारीफ भी होनी चाहिए.
23 मार्च को घर से लापता हो गया था 13 साल का सुभान
दिल्ली से करीब चार सौ किलोमीटर दूर यूपी के औरैया जिले के एरवा कटरा में सर्राफा कारोबारी शकील अपने परिवार के साथ रहते हैं. होली से दो दिन पहले शनिवार यानी 23 मार्च को शकील का 13 साल का बेटा सुभान दोपहर में अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने घर से बाहर निकला था. लेकिन देर शाम तक वो घर नहीं लौटा. हर जगह तलाशने के बाद शनिवार की रात को ही सुभान के पिता ने थाने में अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा दी.
घर से गायब था पड़ोसी रियाज उर्फ मुन्ना
रिपोर्ट लिखने के फौरन बाद औरैया पुलिस तुरंत हरकत में आती है. घरवालों से पूछताछ करने पर पता चलता है कि इधर कुछ वक्त से पड़ोस में रहने वाला रियाज़ उर्फ मुन्ना सुभान के करीब आने की कोशिश कर रहा था. शनिवार को रियाज ने ही उसे मैच खेलने के लिए बुलाया था. इस सूचना पर पुलिस ने जब मुन्ना को तलाशा तो पता चला वो घर पर ही नहीं है. पुलिस का शक गहराया. इसी दौरान जांच में पता चला कि मुन्ना के साथ-साथ उसके तीन और दोस्त भी घर से गायब हैं.
औैरैया पुलिस ने किया नोएडा और दिल्ली पुलिस से संपर्क
अब पुलिस ने मुन्ना और उसके तीनों दोस्तों के मोबाइल की कॉल डिटेल में खंगालना शुरू किया, तो पहला क्लू यहीं से मिला. शक की वजह थी कि आखिर अचानक मुन्ना दिल्ली की तरफ क्यों जा रहा था? मुन्ना और उसके दोस्तों के मोबाइल के जरिए जब उनकी लोकेशन को ट्रैस करना शुरू किया गया, तो पता चला कि वो नोएडा और बुलंदशहर से होते हुए बाहरी दिल्ली की तरफ जा रहे हैं. औरैया पुलिस ने फौरन नोएडा पुलिस और फिर दिल्ली पुलिस से संपर्क साधा.
ऐसे शातिर बदमाशों तक पहुंची पुलिस
इस दौरान औरैया पुलिस ने पाया कि मुन्ना लगातार चार लोगों से फोन पर बातें कर रहा है. और वो चारों दिल्ली के अपराधी हैं. ये इनपुट औरैया पुलिस ने दिल्ली पुलिस से साझा किया. अब दिल्ली पुलिस दिल्ली के उन चारों बदमाशों के मोबाइल के जरिए उनका लोकेशन ट्रेस करने में जुट गई. इसी दौरान उन्हें पता चला कि उन चारों का लोकेशन दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में है. इस बीच औरैया पुलिस की एक टीम पहले ही दिल्ली के लिए रवाना हो चुकी थी. अब दिल्ली पुलिस की मदद से वो लोग पश्चिम विहार के उस इलाके में पहुंचते हैं, जहां चारों का लोकेशन मिल रहा था. इत्तेफाक से मोबाइल ने चारों का जो लोकेशन बताया था, ठीक उसी जगह पर चार लड़के एक कार के साथ खड़े थे. पुलिस ने चारों को मौके पर ही दबोच लिया. पकड़े गए आरोपियों में एक अवधेश और उसके बाकी तीन साथी थे.
अवधेश ने खोला राज
दरअसल, सुभान को अगवा करने के बाद मुन्ना अपने तीन साथियों के साथ औरैया से दिल्ली पहुंचा था. दिल्ली आने के बाद उसने सुभान को अवधेश और उसके गैंग के हवाले कर दिया. प्लान ये था कि सुभान के घरवालों से जब फिरौती की रकम मिल जाएगी, तब सुभान को दिल्ली में ही रिहा कर दिया जाएगा. जबकि फिरौती की रकम औरैया में ही एक जंगल में वसूलने का प्लान था. मुन्ना सुभान को अवधेश गैंग के हवाले कर पुलिस से बचते बचाते वापस औरैया पहुंच चुका था. दिल्ली पुलिस को अवधेश और उसका गैंग तो मिल गया, लेकिन मुन्ना और सुभान का मिलना अभी बाकी था. इसी के बाद जब अवधेश से सुभान के बारे में पूछा गया, तो उसने बताया कि सुभान कार की डिग्गी में है.
ट्राली बैग में सुभान की मौत
पुलिस ने कार की डिग्गी को जब खोला तो देखा कि अंदर एक नीले रंग का ट्रॉली बैग है, बैग खोलने पर उन्हें अंदर सुभान मिला. उसके दोनों हाथ पैर बंधे हुए थे और वो पूरी तरह से बेसुध था. पुलिस उसे फौरन दिल्ली के संजय गांधी अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने सुभान को मुर्दा करार दिया. दरअसल, ट्रॉली बैग में बंद कर डिग्गी में डाल देने की वजह से सांस रुकने के चलते सुभान की मौत हो चुकी थी.
पुलिस ने फैलाया जाल
दिल्ली पहुंचने के बाद अब औरैया पुलिस अवधेश और उसके साथियों को लेकर वापस औरैया जा रही थी. रास्ते में जब चारों से पूछताछ होती है, तो पता चलता है कि मुन्ना और उसके बाकी तीन साथी औरैया में ही कहीं छुपे हुए हैं. पर वो कहां हैं, उन्हें उनकी लोकेशन नहीं मालूम. लेकिन अवधेश ये जरूर बताता है कि फिरौती की रकम एरवा कटरा के जंगल में वसूली जानी थी. इस जानकारी के बाद अब औरैया पुलिस अवधेश से कहती है कि वो फोन कर मुन्ना को उसी जंगल में बुलाए.
एरवा कटरा के जंगल में एनकाउंटर
सोमवार को शहर के एरवा कटरा जंगल में पुलिस की कई टीमें अवधेश और उसके साथियों को लेकर पहले से ही पहुंच जाती है. अब यहां से पुलिस की कहानी शुरू होती है. पुलिसिया कहानी ये कि जंगल में छुपे मुन्ना और उसके साथी जैसे ही अवधेश और उसके साथियों को पुलिस हिरासत में देखते हैं, वो मामला समझ जाते हैं. इसके बाद वो पुलिस टीम पर गोलियां चलाने लगते हैं. मुन्ना और उसके साथियों को गोली चलाता देख पुलिस हिरासत में पहले से ही मौजूद अवधेश और उसके बाकी तीन साथी भी पुलिस हिरासत से निकल भागते हैं.
आठ के आठ अपहरणकर्ताओं को लगी गोली
पुलिस फिर गोली चलाती है और मु्न्ना और अवधेश समेत सुभान की किडनैपिंग में शामिल आठ के आठ आरोपियों को गोली लगती है. वो भी पैर में. इस एनकाउंटर में हमेशा की तरह पुलिस की गाड़ियों पर भी कुछ गोलियां लगीं और तीन पुलिस वाले भी जख्मी हुए हैं. हालांकि जख्म मामूली हैं. सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं. लेकिन अब सुभान कभी लौट कर नहीं आएगा.
(औरैया से सूर्य शर्मा का इनपुट)