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90 गांव, सात कत्ल और एक गुमनाम कातिल... इस खौफनाक सीरियल किलर को तलाश रही हैं यूपी पुलिस की 14 टीमें

बरेली में पांच महीनों में रह-रह कर अलग-अलग गांवों में महिलाओं की हत्या होती रही और गिनती छह तक पहुंच गई. तकरीबन सभी मामलों में क़ातिल ने 50 से 60 साल के एज ग्रुप की महिलाओं को ही अपना निशाना बनाया और सभी मामलों में क़त्ल का हथियार महिलाओं की साड़ी का पल्लू या फिर उनका दुपट्टा ही था.

पुलिस ने अब सीरियल किलर के तीन स्केच जारी किए हैं पुलिस ने अब सीरियल किलर के तीन स्केच जारी किए हैं
कृष्ण गोपाल राज/सुप्रतिम बनर्जी
  • बरेली,
  • 09 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 2:01 PM IST

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक इलाका ऐसा है, जहां महिलाएं बेहद खौफज़दा हैं. इन दिनों वहां की महिलाएं घर से बाहर निकलने से भी डरती हैं. वो अपने खेतों की तरफ जाने से बचती हैं. शाम होते ही वो अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेती हैं. वो महिलाएं ऐसा इसलिए करती हैं, क्योंकि वे भी सबकी तरह मौत से डरती हैं. ऐसी मौत जो बेमौत आती है. जिसकी वजह भी कोई नहीं जानता. वो मौत उस इलाके की महिलाओं को निशाना बनाती है और गुम हो जाती है. दरअसल, हम बात कर रहे हैं बरेली के उस इलाके की जहां पिछले कुछ महीनों में एक या दो नहीं, बल्कि आधा दर्जन से ज्यादा महिलाओं को बेरहमी के साथ मौत के घाट उतार दिया गया.

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नहीं मिला कातिल का सुराग 
पिछले साल यानी साल 2023 में जुलाई महीने की पहली तारीख को यूपी के बरेली में एक महिला की हत्या हो गई. हत्या शाही थाना इलाके के आनंदपुर गांव में हुई थी. क़ातिल ने करीब 55 साल की प्रेमवती की जान उसी की साड़ी की पल्लू से गला घोंट कर ली थी. पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन उसे क़ातिल का कोई सुराग नहीं मिला. 

एक-एक कर 6 महिलाओं का कत्ल
इसके बाद अगले पांच महीनों में रह-रह कर कुछ इसी तरह बरेली के अलग-अलग गावों में महिलाओं की हत्या होती रही और गिनती छह तक पहुंच गई. तकरीबन सभी मामलों में क़ातिल ने 50 से 60 साल के एज ग्रुप की महिलाओं को ही अपना निशाना बनाया और सभी मामलों में क़त्ल का हथियार महिलाओं की साड़ी का पल्लू या फिर उनका दुपट्टा ही था. लेकिन बरेली पुलिस हर मामले की अलग-अलग जांच करती रही और इनमें से एक भी मामले में वो क़ातिल का पता नहीं लगा सकी. 

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थानों में धूल फांकती रही इन मामलों की फाइलें
हां, इतना जरूर रहा कि इन पांच महीनों के दौरान तीन और महिलाओं का भी क़त्ल हुआ और उन मामलों को सुलझाने में पुलिस कामयाब रही. लेकिन बाकी के छह मामले अनसुलझे थे. अनसुलझे ही रहे. इस लिहाज़ से देखा जाए तो इस सिलसिले का आख़िरी क़त्ल अब से कोई आठ महीने पहले यानी नवंबर 2023 को हुआ था. जिन महिलाओं का क़त्ल हुआ, उनके घर वाले इंसाफ के लिए भटकते रहे, लेकिन पुलिस थानों में क़त्ल के उन मामलों की फाइल धूल फांकती रही.

2 जुलाई 2024, बरेली, उत्तर प्रदेश
लेकिन अब आठ महीने बाद कुछ ऐसा हुआ है जिसने एक बार फिर से पुलिस के कान खड़े कर दिए हैं. हुआ यूं कि इस बार फिर से बरेली के एक ग्रामीण इलाक़े में एक महिला की हत्या हो गई. हत्या उसी शाही थाना इलाके के एक गांव में हुई, जहां अब से कोई साल भर पहले इस सिलसिले की पहली हत्या हुई थी. इस बार भी क़ातिल ने कुछ उसी तरीके से 45 साल की एक महिला की जान उसी की साड़ी के पल्लू से गला घोंट कर ले ली. जिस तरीके से पहले महिलाओं की हत्या हुई थी.

सभी महिलाओं के कत्ल का एक जैसा तरीका
ज़ाहिर है ये सारी बातें अभी से नहीं बल्कि दूसरे या तीसरे क़त्ल के बाद से ही इस ओर ईशारा कर रही थी कि क़त्ल के इन मामलों के पीछे किसी ना किसी सीरियल किलर का ही हाथ है, क्योंकि तकरीबन सभी के सभी मामलों में ना सिर्फ़ क़त्ल का तरीका एक सा था, बल्कि हर मामले में क़ातिल का शिकार बनने वाली महिलाएं ही थी. और उनकी उम्र 50 से 60 साल के आस-पास थी. यानी इन सभी क़त्ल के मामलों में गजब की सिमिलैरिटी थी. तब से लेकर अब तक मीडिया ने इन सारे क़त्ल के मामलों को एक-दूसरे से जोड़ कर देखा और इनमें किसी सीरियल किलर का हाथ होने की आशंका जताता रहा. 

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पहले सीरियल किलिंग मानने को तैयार नहीं थी पुलिस
लेकिन हद है बरेली पुलिस, जिसने अब तक इन मामलों को सीरियल किलिंग का केस मानने की जरूरत ही नहीं समझी और सारे ही मामलों की जांच अलग-अलग करती रही. वो तो जब आठ महीने बाद फिर से बरेली के एक गांव में फिर से उसी मॉडस ऑपरेंडी से एक महिला का क़त्ल हो गया और बात बरेली से निकल कर सीधे लखनऊ के पुलिस मुख्यालय तक जा पहुंची.

ऐसे बच सकती थी कुछ महिलाओं की जान 
तब जाकर बरेली पुलिस को अहसास हुआ कि ये मामला सीरियल किलिंग का हो सकता है और तब जाकर पूरे साल भर बाद बरेली पुलिस ने इस मामले में संदिग्ध सीरियल किलर के ये स्केच तैयार करवाए यानी अगर बरेली पुलिस साल भर पहले यानी जुलाई 2023 में ही जाग जाती, तो शायद एक-एक कर इतनी महिलाओं का क़त्ल नहीं होता और रहस्यमयी सीरियल किलर की गिरफ्तारी पहले ही हो गई होती.

एक दूसरे से मिलते जुलते हैं दो स्केच
अब बरेली पुलिस की ओर से जारी संदिग्ध सीरियल किलर के स्केचेज सामने आए हैं. जाहिर है सीरियल किलर का शिकार बनने वाली महिलाएं तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन ये स्केच उन गांवों में रहने वाले लोगों की गवाही और निशानदेही पर तैयार किए गए हैं, जिन गांवों के आस-पास महिलाओं का क़त्ल हुआ. और कमाल देखिए कि ये तीनों के तीनों स्केच में से दो स्केच तो एक दूसरे से बिल्कुल मिलते जुलते हैं.

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स्केच नंबर 1 और 2
इन दोनों ही स्केच में संदिग्ध क़ातिल का माथा चौड़ा है सिर में बाल कम हैं या फिर छोटे-छोटे हैं चेहरा गोल, आंखें बड़ी और नाक चपटी सी है जबकि दोनों ही स्केच में चश्मदीदों ने क़ातिलों को चेक शर्ट पहने हुए ही बताया है.

स्केच नंबर 3
जबकि तीसरी तस्वीर में संदिग्ध कातिल का हुलिया थोड़ा अलग है इसके बाल करीने से बनाए गए हैं नाक पतली और लंबी है चेहरा चौकोर है और क़ातिल ने गोल गले वाली टी शर्ट पहन रखी है.

सालभर से खुला घूम रहा है सीरियल किलर
यानी स्केच में छुपे क्लू ईशारा करते हैं कि महिलाओं के क़त्ल के इस मामले में ऐसे ही एक या दो सीरियल किलर्स का हाथ हो सकता है. लेकिन इसे बरेली पुलिस की काहिली ही कहेंगे कि इतना वक़्त गुजरने के बावजूद महिलाओं के क़त्ल के ये मामला अनसुलझे हैं और सीरियल किलर करीब साल भर से छुट्टा घूम रहा है. लेकिन ये तो रही बरेली पुलिस की नासमझी या फिर लापरवाही की कहानी.

सात अनसुलझे मामलों में सिमिलैरिटी
अगर पिछले साल भर में हुए क़त्ल के इन मामलों पर गौर किया जाए, तो उन्हें देखते ही ये साफ हो जाता है कि इन क़त्ल के पीछे किसी सायको किलर का ही रोल है. उन सारे के सारे क़त्ल के सात अनसुलझे मामलों में दिखने वाली सिमिलैरिटी यानी एकरूपता की बात करेंगे, लेकिन पहले आईए, जल्दी से उन महिलाओं की लिस्ट पर एक निगाह डाल लेते हैं, जो इस सीरियल किलर का शिकार बनीं.

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01 जुलाई 2023 - शाही थाना इलाके के आनंदपुर गांव में 55 साल की प्रेमवती की हत्या
21 जुलाई 2023 - शाही थाना इलाके के गांव कुलचा में 50 साल की धनवती की हत्या 
01 नवंबर 2023 - शीशगढ़ थाना इलाके के लखीमपुर गांव में 65 साल की महमूदन की हत्या 
09 नवंबर 2023 - फतेहगंज थाना इलाके के खानपुर गांव में 65 साल की ओमवती की हत्या 
20 नवंबर 2023 - शाही थाना इलाके के खुरसैनी में 65 साल की दुलारो देवी की हत्या 
26 नवंबर 2023 - शीशगढ़ थाना इलाके के जगदीशपुर गांव में 63 साल की उर्मिला देवी की हत्या 
02 जुलाई 2024 - शाही थाना के गांव बुझिया जागीर में 45 साल की अनिता की हत्या

चंद किलोमीटर के दायरे में है एरिया ऑफ स्ट्राइक 
ये लिस्ट बताती है कि सीरियल किलर ने बरेली के ग्रामीण जिले के तीन थाना इलाकों में ही सारी की सारी वारदातों को अंजाम दिया और अगर इन थाना इलाकों की बात करें, तो ये सारे के सारे इलाके एक दूसरे से बिल्कुल सटे हुए हैं. यानी सीरियल किलर का एरिया ऑफ स्ट्राइक भी चंद किलोमीटर के दायरे में ही है. ऐसे में उसे ढूंढना भी शायद उतना मुश्किल नहीं है, जितना अगर उसके हमले का एरिया पूरे जिले में या फिर जिले से बाहर फैले होने पर हो सकता था. लेकिन जब बरेली पुलिस साल भर तक इन क़त्ल के मामलों के सीरियल किलिंग होने की बात ही नहीं समझ सकी, तो फिर भला वो किसी सीरियल किलर की तलाश कैसे करती?

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सीरियल किलर की मॉडस ऑपरेंडी
अब आइए बात इस क़ातिल के मॉडस ऑपरेंडी की करते हैं, जिसके चलते इन सारे के सारे महिलाओं के क़त्ल को सीरियल किलिंग की तरह देखा जा रहा है. क़ातिल 50-60 के एज ग्रुप की महिलाओं की ही जान ले रहा है. वो गांव के सुनसान इलाकों में आम तौर पर दोपहर के वक़्त ही हत्याएं करता है. सभी की हत्याएं गला घोंट कर करता है. सभी हत्याओं में महिलाओं की साड़ी के पल्लू या फिर दुपट्टा से उनकी जान लेता है. किसी भी मामले में महिलाओं के साथ रेप-छेड़छाड़ के सबूत नहीं मिले हैं. क़त्ल के ज्यादातर मामले में गन्ने के खेतों में या उसके आस-पास के हैं. और सभी के सभी मामलों में महिलाओं के घरवालों ने किसी दुश्मनी से इनकार किया है. यानी क़त्ल का मोटिव साफ़ नहीं है और ऐसा अक्सर सायको किलर्स के मामलों में होता है.

केवल महिलाएं बनी कातिल का शिकार
ज़ाहिर है, ये सारी बातें ईशारा करती हैं कि बरेली में रह-रह कर हो रही महिलाओं की हत्या के पीछे किसी सीरियल किलर का ही हाथ है. लेकिन आखिर वो सीरियल किलर है कौन? और वो क्यों चुन-चुन कर एक खास उम्र की महिलाओं की ही जान ले रहा है, यही फिलहाल सबसे बड़ा सवाल है. कातिल जो भी है वो चुन-चुन कर बुजुर्ग हो चली महिलाओं को ही अपना निशाना बना रहा है. उसने अब तक ना तो किसी पुरुष की जान ली है और ना ही कम उम्र की किसी लड़की या महिला की. लेकिन महिलाओं के कत्ल का यही एक पैटर्न नहीं है, जो इन मामलों को एक दूसरे से जोड़ता है, बल्कि महिलाओं के कत्ल के इस सिलसिले में और भी कई ऐसी बातें हैं, जो सीरियल किलिंग की तरफ़ ईशारा करती हैं.

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कत्ल का तरीका और हथियार भी बिल्कुल एक
कातिल का शिकार बनी महिलाओं के घरवालों की मानें तो मारी गई सभी की सभी महिलाओं की लाश गांव के आस-पास सुनसान इलाकों में मिली और तकरीबन सभी महिलाओं की हत्या गला घोंट कर की गई थी. ये हत्याएं तभी की गई थीं, जब महिलाएं अकेली बाहर गई थीं. तकरीबन सभी मामलों में कातिल ने महिलाओं की जान लेने के लिए दुपट्टा या गमछे जैसी किसी चीज का इस्तेमाल किया. यानी ना सिर्फ मरनेवाली महिलाओं का एज ग्रुप एक जैसा है, बल्कि क़त्ल का तरीका और हथियार भी बिल्कुल एक हैं.

पुलिस को नहीं मिल रहा कातिल का मोटिव!
अब आइए उसकी बात करते हैं, जिसके बग़ैर क़त्ल का कोई भी मामला पूरा नहीं हो सकता या फिर यूं कहें कि जिसके बगैर दुनिया में कोई कत्ल होता ही नहीं यानी मोटिव. क्योंकि कहते हैं कि क़त्ल कोई भी हो, उसके पीछे कोई ना कोई मक़सद ज़रूर होता है. लेकिन बरेली में जिस तरह से एक के बाद एक महिलाओं का क़त्ल हो रहा है, उसके पीछे पुलिस को कोई मोटिव भी ढूंढे नहीं मिल रहा. शायद यही वजह है कि पुलिस इन मामलों को सुलझा नहीं पा रही है... असल में कातिल का शिकार बनी किसी भी महिला के साथ सेक्सुअल अटैक यानी रेप या छेड़छाड़ जैसी किसी वारदात के सबूत नहीं मिले हैं. ऊपर से उनके पास मौजूद रुपये-पैसे या गहने भी जस के तस मिले हैं. यानी इन कत्ल के पीछे ना तो रेप की वजह है और ना लूटपाट की. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर क़ातिल महिलाओं की जान क्यों ले रहा है?

ना दुश्मनी, ना रेप और ना लूटपाट
वैसे महिलाओं के कत्ल की वजह सिर्फ रेप या लूटपाट ही नहीं होती. क़त्ल की वजह किसी से दुश्मनी भी हो सकती है. लेकिन पिछले छह महीने में मारी गई इन छह महिलाओं के घरवाले उनकी किसी से दुश्मनी की बात से भी इनकार कर रहे हैं. और यही वजह है कि पुलिस को इन मामलों को सुलझाने में बड़ी दिक्कत हो रही है. और शायद यही वजह है कि मामलों को सीरियल किलिंग से जोड़ कर देखा जाने लगा है. क्योंकि ऐसा पहले कई बार देखा गया है, जब दिमागी तौर पर अस्थिर लोग या फिर कोई साइको किलर चुन-चुन कर किसी खास वर्ग के लोगों को अपना निशाना बनाने लगता है, फिर चाहे उसकी उनसे कोई दुश्मनी हो या ना हो. शुरू में तो बरेली पुलिस ने भी इस मामलों को हल्के में ही लिया था. वो इन सभी मामलों को एक-दूसरे से अलग कर देख रही थी.

90 गांवों में एक गुमनाम कातिल का ख़ौफ
बरेली के तीन थाना इलाकों के लगभग 90 गांवों में एक गुमनाम सीरियल किलर का ख़ौफ़ पसरा है. वो रह-रह अकेली महिलाओं को अपना निशाना बनाता है और फिर भीड़ में गुम हो जाता है. ये सिलसिला पिछले करीब साल भर से यूं ही चल रहा है और अब रहस्यमयी सीरियल किलर का शिकार बनने वाली महिलाओं की तादाद बढ़ कर सात तक पहुंच चुकी है. ऐसे में गांव के गांव लोग सहमे हुए हैं. महिलाएं अकेली घर से बाहर निकलने से घबराने लगी हैं. खेती किसानी को नुकसान हो रहा है और लोगों की ज़िंदगी मानों घर की चारदिवारी के अंदर कैद हो कर रह गई है.

ऐसे हरकत में आई बरेली पुलिस
लेकिन फिर सवाल उठता है कि आखिर ये सीरियल किलर पिछले साल भर से रह-रह कर इतनी महिलाओं का क़त्ल कर रहा है और पुलिस कुछ कर क्यों नहीं रही? तो जवाब है कि पुलिस अब तक क़त्ल के इन मामलों को सीरियल किलिंग का मामला मान कर चल ही नहीं रही थी. वो तो जब करीब 8 महीने के अंतराल के बाद सीरियल किलर ने फिर से घात लगा कर एक और महिला की जान ले ली और क़त्ल में उसी मॉडस ऑपरेंडी का इस्तेमाल हुआ, तो फिर जाकर बरेली पुलिस का माथा ठनका और डीजीपी के हुक्म पर पुलिस ने रहस्यमयी सीरियल किलर के स्केच बना कर उसकी तलाश शुरू कर दी. स्केच को सोशल मीडिया में फ्लोट किया, उसके पोस्टर चिपकाए जाने लगे.

कातिल की तलाश में पुलिस ने उतारी 14 टीम
फिलहाल, इस सीरियल की धर पकड़ के लिए सालभर बाद अब बरेली पुलिस ने 14 अलग-अलग टीमें बनाई हैं. सात टीमें वर्दी धारी पुलिस वालों की, जबकि 7 टीमें ऐसी जिनमें पुलिस वालों को सादे लिबास में क़ातिल की तलाश करने के लिए कहा गया है. पुलिस ने अलग-अलग गांवों में नाका लगा कर संदिग्ध सीरियल किलर की तलाश शुरू की है और सीरियल किलर की खोज में लगे पुलिस वालों को बताया गया है कि वो हरेक उन गांवों में पहुंच कर सीरियल किलर की जानकारी जुटाने की कोशिश करें, जिन गावों में या जिनके आस-पास महिलाओं की हत्या हुई. पुलिस वालों को वहां रहने वाले लोगों से पूछताछ कर संदिग्ध लोगों की जानकारी जुटाने और हर जानकारी थाने में मौजूद एक स्पेशल रजिस्टर में दर्ज करने को कहा गया है, ताकि उन जानकारी का मिलान कर ये समझने की कोशिश की जाए कि जिले में रहने वाले लाखों लोगों में से वो सीरियल किलर कौन हो सकता है. इसके अलावा ड्रोन से सर्चिंग, सीसीटीवी फुटेज की मॉनिटरिंग और दूसरे तौर-तरीके तो काम में लाए ही जा रहे हैं. जाहिर है फिलहाल इस सीरियल किलर को पकड़ना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है.

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