
गाजा पट्टी पर इजरायली हमले का तीसरा हफ्ता चल रहा है. गाजा में उत्तर से लेकर दक्षिण तक इजरायल का हमला जारी है. इस हमले में गाजा के 5000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इजरायल के भी 1400 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. इन सबके बीच गाजा में हो रही बमबारी का धुआं पूरी दुनिया में इंसानियत का दम घोंट रहा है. उस जंग का एक नया मोर्चा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खुल गया है, जहां अमेरिका खुलकर अपने दोस्त इजरायल का समर्थन कर रहा है. इस दौरान 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमले का भी जिक्र किया गया है. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने लश्कर-ए-तैयबा और हमास के बीच समानता दिखाते हुए इजरायल में हुए हमले को मुंबई अटैक जैसा बताया है. इसके साथ ही आतंक का समर्थन करने वाले देशों की निंदा करने की बात कही गई है.
अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने क्या है...
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि आतंकवाद के सभी कार्य गैरकानूनी और अनुचित हैं. सुरक्षा परिषद को उन सदस्य देशों की निंदा करनी चाहिए जो आतंकवादी समूहों को हथियार, पैसे और ट्रेनिंग देते हैं. उन्होंने कहा, "हमें किसी भी राष्ट्र के अपनी रक्षा करने और ऐसी भयावहता को दोहराने से रोकने के अधिकार का समर्थन करना चाहिए. इस परिषद का कोई भी सदस्य, इस पूरे निकाय में कोई भी राष्ट्र अपने लोगों की हत्या बर्दाश्त नहीं कर सकता है. जैसा कि इस परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बार-बार पुष्टि की है, आतंकवाद की सभी गतिविधियां गैरकानूनी और अनुचित हैं. चाहे वो नैरोबी, बाली, इस्तांबुल, मुंबई, न्यूयॉर्क या किबुत्ज में लोगों को निशाना बनाते हों. वे गैरकानूनी और अनुचित हैं, चाहे वे आईएसआईएस, बोको हरम, अल शबाब, लश्कर-ए-तैयबा द्वारा किए गए हों या फिर हमास के आतंकियों ने किए हों.''
26/11 को क्यों याद किया जा रहा है...
7 अक्टूबर को इजरायल के किबुत्ज शहर में हमास के आतंकियों ने जमकर कत्लेआम मचाया था. इजरायल की सरहद पार करके सैकड़ों आतंकियों ने जमीन, पानी और हवा से ऐसा हमला बोला कि किसी को कुछ समझ ही नहीं आया. हर तरफ हाहाकर मच गया. आतंकियों ने जिसे जहां देखा, वहां गोलियों से भून डाला. घरों में घुस-घुसकर लोगों की हत्या कर डाली. सैकड़ों लोगों को बंधक बना लिया. इस हमले में 1300 से ज्यादा इजरायली नागरिकों की हत्या कर दी गई. इतना ही नहीं आतंकी 203 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले गए. कुछ इसी तरह 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान प्रायोजित लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकी समंदर के जरिए मुंबई में घुस आए थे.
हमले का मुंबई-इजरायल कनेक्शन...
हमास के आतंकियों की तरह लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने भी मुंबई शहर में जिसे जहां देखा वहीं मार डाला. होटल, रेलवे स्टेशन, रेस्टोरेंट सहित कई जगहों पर जमकर नरसंहार किया. आतंकियों ने 60 घंटे तक पूरी मुंबई में कत्लेआम मचाया था. इस आतंकी हमले 166 लोग मारे गए थे. इसमें 6 अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे. मुंबई में हुए इस हमले का इजरायली कनेक्शन भी है. अपनी पूर्व योजना के तहत दो हमलावरों ने यहूदियों के सामुदायिक केंद्र चाबड़ हाउस (नरीमन हाउस) को अपने कब्जे में ले लिया था. यहां उन्होंने रब्बी गैव्रिएल होल्ट्जबर्ग और उनकी गर्भवती पत्नी रिवकाह होल्ट्जबर्ग सहित छह लोगों की हत्या कर दी थी. इस घटना की इजरायल ने कड़ी निंदा की थी.
यहूदियों को निशाना बनाने की वजह...
लश्कर-ए-तैयबा आतंकियों ने योजना के तहत मुंबई में चाबड़ हाउस पर हमला किया था. दरअसल, वो ऐसा करके पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते थे. दो साल पहले एक न्यूजपेर यहूदी क्रॉनिकल ने खुलासा किया था कि आतंकियों की बातचीत के वायर टेप रिकॉर्डिंग से पता चला कि दुनियाभर की मीडिया का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए उन्होंने यहूदियों को निशाना बनाया था. यही वजह है कि उन्होंने आतंकी हमले के लिए चाबड हाउस को चुना था. न्यूज पेपर की इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत सरकार के एक सोर्स ने एक फिल्म प्रोड्यूसर को वायर टेप के बारे में बताया था. इस टेप के बारे में जानने वाले फिल्म प्रोड्यूसर यहूदियों पर एक डॉक्युमेंट्री बना रहे थे.
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इजरायली संसद के स्पीकर ने कहा था...
इसी साल मार्च में भारत दौरे पर आए इजरायली संसद के स्पीकर आमिर ओहाना ने 26/11 आतंकी हमले की कड़ी आलोचना की थी. उन्होंने कहा था कि इस हमले के मास्टरमाइंड को भारी कीमत चुकानी होगी. भारत और इजरायल दोनों के सामने आतंकवाद सबसे बड़ी समस्या है. दोनों देश मिलकर इससे निपटेंगे. ओहाना ने कहा था, ''हम सभी को 2008 का मुंबई आतंकी हमला याद है. इसमें 150 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. इस हमले में मारे गए विदेशियों में दुर्भाग्य से इजरायली और यहूदी भी थे, जो चबाड हाउस आए थे. यह सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि यहूदियों पर भी हमला था. यह भारत और इजरायल के साझा मूल्यों पर हमला था. हम इस हमले की कड़ी नींदा करते हैं.''