
साइबर अपराधियों के लिए फर्जी पहचान पत्र से खोला गया बैंक खाता सबसे बड़ा हथियार होता है, क्योंकि धोखाधड़ी कर ठगी गई रकम को साइबर अपराधी इसी बैंक खाते में जमा करवाते हैं. पुलिस जब तक तफ्तीश करती है तो पता चलता है जिस नाम पते पर बैंक खाता खुला था वह सब फर्जी था. फर्जी नाम पते पर बैंक खाता कैसे खुल रहा था, इसकी तफ्तीश वाराणसी साइबर पुलिस ने की और यूपी पुलिस की साइबर टीम ने लखनऊ से ऐसे 3 लोगों को गिरफ्तार किया.
बीते साल वाराणसी साइबर थाने पर शिकायत मिली कि ट्रेजरी अधिकारी बनकर पुलिस विभाग के रिटायर्ड अफसरों से ठगी की जा रही है. वाराणसी साइबर टीम ने जांच के बाद दो एफआईआर दर्ज हुई और 9 लोग गिरफ्तार किए गए. पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद पता चला कि फर्जी नाम पता से पैन कार्ड और आधार कार्ड बनाकर साइबर अपराधियों के द्वारा ठगी के लिए खोले जा रहे बैंक खातों का पूरा एक रैकेट चल रहा है.
तीन आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ की साइबर थाने की पुलिस ने जांच शुरू की और इस मामले में बिहार के रहने वाले तीन आरोपी अफजल आलम, सुशील कुमार और मोहम्मद इरशाद को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार तीनों आरोपियों में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का मास्टर अफजल आलम मास्टरमाइंड है, जो कई सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट वाली कंपनियों में काम कर चुका है. पूछताछ की गई तो पता चला अफजल आलम ने डोमेन नेम सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों से कई डोमेन बुक करा रखे थे. अफजल आलम ने कई वेबसाइट बना रखी थी जिसमें www.digitalportal.in, www.digitalfastprint.co.in, www.digitalfastprint.online, www.digitalfastprint.in और www.reprintportal.xyz के नाम से वेबसाइटें बना रखी थी.
अफजल आलम ने कई डाटा सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों से कस्टमर के डाटा खरीद रखे थे. मोडस ऑपरेंडी की बात करें तो जब भी कोई व्यक्ति आधार कार्ड या पैन कार्ड बनवाने के लिए इसकी वेबसाइट पर लॉगिन करता तो किसी भी दूसरे व्यक्ति का आधार कार्ड नंबर इनके सामने होता, जिसमें व्यक्ति अपना नाम फोटो और फर्जी पता डाल देता. जिसके बाद उसे यूआईडीआई की तरह की फर्जी आधार कार्ड की कॉपी निकल आती.
फर्जी दस्तावेंजों से खोलते थे खाते
एसपी साइबर थाना त्रिवेणी सिंह का कहना है अमूमन ऐसे फर्जी नाम पता वाले आधार कार्ड से साइबर अपराधी बैंक खाता खोलते थे. जब उनके द्वारा ठगी की रकम इस फर्जी नाम पता वाले बैंक खाते में जमा होती और पुलिस किसी केस की जांच करते बैंक खाते तक पहुंचती तो पता चलता खाताधारक का नाम फोटो पता सब फर्जी था. इस तरह फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाने के इस गोरखधंधे का इस्तेमाल साइबर अपराधियों की ठगी की रकम के लिए बैंक खाता खोलने में किया जा रहा था.
एसपी साइबर क्राइम त्रिवेणी सिंह की माने तो यह गैंग इस फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड का प्रिंट लेने के लिए फीस भी बहुत मामूली लेता और वह भी ऑनलाइन. हर आधार कार्ड के लिए गेटवे के जरिए ₹20 का पेमेंट और पैन कार्ड ₹19 का पेमेंट लेकर प्रिंट कर देता था.
एक दिन में तैयार होते थे हजार फर्जी आधार और पैन कार्ड
पकड़े गए तीनों आरोपियों के पास से बरामद रजिस्टर के आधार पर, पुलिस का दावा है यह लोग एक वेबसाइट से दिन भर में 20 से 25 हजार रुपये कमाते और करीब 1000 फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बना रहे थे. अफजल आलम के पास से बरामद एक रजिस्टर में लगभग 80 लाख के हिसाब किताब का जिक्र है. पुलिस का कहना है कि इस हिसाब से लगभग चार लाख आधार कार्ड और चार लाख फर्जी पैन कार्ड प्रिंट कर देने की संभावना है.
फिलहाल पुलिस ने पकड़े गए तीनों आरोपियों को लखनऊ साइबर थाने से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. फर्जी आधार कार्ड पैन कार्ड के इस रैकेट में साइबर अपराधियों का एक बड़ा गैंग सक्रिय है. पकड़े गए तीनों आरोपियों से पूछताछ के बाद उम्मीद है कि ठगी करने वालों का एक बड़ा गैंग जल्द पुलिस की गिरफ्त में होगा.