
दिल्ली पुलिस ने बैंकों और ई-कॉमर्स वेबसाइटों के कस्टमर केयर अधिकारी बनकर 2,500 से ज्यादा लोगों को ठगने के आरोप में झारखंड के जामताड़ा से पांच लोगों को अरेस्ट किया है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से एक सिम कार्ड सप्लायर को भी दबोचने का दावा किया है. पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने इंटरनेट पर अपने फोन नंबर बैंकों और ई-कॉमर्स साइटों के कस्टमर केयर हेल्पलाइन के रूप में पोस्ट कर दिए थे. इसके बाद जब कोई बैंक खाताधारक उस नंबर पर कॉल करता था तो ठगों को बैंक में रजिस्टर्ड उनके फोन नंबर से पूरी जानकारी मिल जाती थी. इसके बाद वे खाताधारकों के अकाउंट से पैसे निकाल लेते थे.
पुलिस ने गिरफ्तार लोगों की पहचान जामताड़ा के निजामुद्दीन अंसारी (23), अफरोज आलम (23), मोहम्मद आमिर अंसारी (22), सरफराज अंसारी (22) और अफरोज अंसारी (22) और मुर्शिदाबाद के नसीम मालित्य (31) के रूप में की है. पुलिस की पड़ताल में पता चला कि जामताड़ा में जालसाजों को मालित्य ने एक साल में 12500 प्री-एक्टिवेटिड सिम कार्ड मुहैया कराए थे. पुलिस को मालित्य के पास से 21,000 से ज्यादा सिम कार्ड बरामद हुए हैं.
दुबई से दिल्ली आया शख्स हो गया था शिकार
पुलिस ने बताया कि दुबई में रहने वाला एक व्यक्ति अपनी बेटी से मिलने दिल्ली आया था. वह अपनी बेटी की बैंक पासबुक को अपडेट करवाना चाहता था इसलिए वह इंटरनेट पर कस्टमर केयर नंबर की तलाश कर रहा था. उसने जब दिए गए नंबर पर फोन किया तो दूसरे तरफ से व्यक्ति ने कस्टमर केयर एक्जीक्यूटिव बनकर उससे अपने फोन पर 'एनीडेस्क' एप्लिकेशन डाउनलोड करने को कहा.
इसके बाद जालसाज ने फिर व्यक्ति को अपने नेट बैंकिंग खाते में लॉग इन करने के लिए कहा, जिसके बाद उसके खाते से दो बार में 9.5 लाख रुपये और 50,000 रुपये निकल गए. इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की. जांच में पता चला कि इन ठगों ने कॉल फॉर्वर्डिंग मैथड का इस्तेमाल किया और अपनी जगह छुपाने के लिए उन्होंने वेबपेज कस्टमर फोन नंबरों को बार-बार बदला.
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11 अप्रैल की रेड में मिली थी सफलता
पुलिस उपायुक्त (बाहरी उत्तर) रवि कुमार सिंह ने बताया कि 11 अप्रैल को झारखंड पुलिस की एक टीम ने जामताड़ा में एक छापा मारा था और आरोपियों को उस समय गिरफ्तार किया था, जब वे करमतर के नवाडीह गांव से कॉल कर रहे थे.
डीसीपी ने कहा कि इसके बाद जांच में पता चला कि मुर्शिदाबाद से एक्टिवेशन के बाद सिम कार्ड यहां भेजे गए थे. यहां भी पता चला कि एक दिन में एक फोन से 300 से ज्यादा सिम एक्टिवेट किए गए. उन्होंने बताया कि एक जालसाज एक समय में कॉल करने के लिए तीन से चार स्मार्टफोन रखता था. इसके लिए वह जामताड़ा के करमातार गांव नावाडीह में कोई दूर की जगह चुनता था.
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किया गया निजामुद्दीन अंसारी जमातारा के एक साइबर फ्राड मामले में पहले भी पकड़ा जा चुका है. वह चार महीने तक जेल में भी रहा था. वह इस मामले के मास्टरमाइंड में से एक है. पुलिस ने कहा कि वह खुद को एक वरिष्ठ बैंक मैनेजर बताता था. इस मामले में पुलिस अब तक करीब 20 लाख रुपये का पता लगा चुकी है. जांच के बाद पैसे रिफंड की प्रक्रिया शुरू की गई है.
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10 जनवरी 2020 को गृह मंत्री अमित शाह ने एक पोर्टल लॉन्च किया था. इसपर जाकर साइबर क्राइम की शिकायत की जा सकती है. गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च में बताया था कि इस पोर्टल पर अब तक 20 लाख से ज्यादा शिकायतें आ चुकी हैं, जिनके आधार पर 40 हजार एफआईआर दर्ज की गईं हैं. उन्होंने बताया कि पोर्टल के अलावा एक हेल्पलाइन नंबर '1930' भी जारी किया गया है, जो देशभर में 250 से ज्यादा बैंकों से कनेक्ट है. साइबर धोखाधड़ी होने पर इस पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. उन्होंने बताया कि साइबर फ्रॉड की जल्दी रिपोर्टिंग होने के कारण साइबर अपराधियों से 235 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है. ये रकम 1.33 लाख से ज्यादा लोगों से धोखाधड़ी कर जुटाई गई थी.