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Digital Arrest: आपका डर ही साइबर अपराधियों के लिए बन जाता है हथियार, ऐसे करें बचाव

सबसे पहले तो आपको सावधानी बरतनी है. कभी भी किसी अप्रत्याशित कॉल या मैसेज का जवाब न दें. सबसे महत्वपूर्ण बात, कभी भी अज्ञात खातों में पैसे ट्रांसफर न करें. याद रखें- डर उनका हथियार है और ज्ञान आपका.

साइबर क्राइम से बचने के लिए अलर्ट रहना ज़रूरी है साइबर क्राइम से बचने के लिए अलर्ट रहना ज़रूरी है
हिमांशु मिश्रा/अरविंद ओझा
  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 7:36 PM IST

ऑनलाइन क्राइम के इस दौर में साइबर अपराधी आपके डर और भ्रम का फायदा उठाते हैं. इसी का नतीजा है डिजिटल गिरफ्तारी. ये सिर्फ एक स्कैम नहीं है, यह आपके भरोसे, आपकी भावनाओं और आपके पैसे पर एक व्यवस्थित हमला है. ऐसे में जब ये स्कैम आपके डर का फायदा उठाता है, तो आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखने की ज़रूरत है. जिनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं.

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सबसे पहले तो आपको सावधानी बरतनी है. कभी भी किसी अप्रत्याशित कॉल या मैसेज का जवाब न दें. सबसे महत्वपूर्ण बात, कभी भी अज्ञात खातों में पैसे ट्रांसफर न करें. याद रखें- डर उनका हथियार है और ज्ञान आपका.

दरअसल, इंटरनेट ने बैंकिंग ने भुगतान और व्यक्तिगत डेटा को डिजिटल बना दिया है. साइबर अपराधी इसी कमज़ोर मोबाइल फ़ोन डेटा का फ़ायदा उठा रहे हैं. कल्पना करें कि आप अपने ही घर में बंधक बने हैं, लेकिन अपने मोबाइल फ़ोन के ज़रिए. आप हैरान होंगे कि पीड़ित 48 घंटे तक अपने फ़ोन से चिपके रहते हैं और डरे हुए होते हैं. उन्हें लगता है कि पुलिस या सरकारी अधिकारी दूसरी तरफ हैं.

पीड़ितों को लगता है कि उन्हें 48 घंटे के भीतर अपना पैसा वापस मिल जाएगा, लेकिन यह सब कुछ मिनटों में खत्म हो जाता है. एक लड़की को 15 घंटे तक उसके फोन पर बंधक बनाकर रखा गया. वह डरी हुई थी और धोखे से अपनी जीवनभर की सेविंग उससे ट्रांसफर करा ली गई थी.

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इंटरनेट की तेजी से विकसित होती दुनिया में, दूरियां कम हो गई हैं और जानकारी पलक झपकते ही उपलब्ध हो जाती है. लेकिन इस डिजिटल क्रांति के बीच, अपराधियों की एक नई नस्ल भी पैदा हो गई है, जो छिपी हुई है.

जैसे-जैसे हमारी बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी हमारे मोबाइल डिवाइस और सोशल मीडिया पर स्थानांतरित होती जा रही है, साइबर अपराधियों को हमारे डर का फायदा उठाने का सुनहरा अवसर मिल रहा है. ऐसा ही एक भयानक स्कैम है डिजिटल अरेस्ट, जहां साइबर ठग फोन पर डर और हेरफेर के जरिए अपने शिकार को बंधक बनाकर रखते हैं.

जरा सोचिए कि आप अपने मोबाइल के सामने घंटों तक फंसे रहें, यह मानते हुए कि आप कानूनी एजेंसी के साथ गंभीर संकट में हैं. जिसमें पुलिस की वर्दी में एक सख्त चेहरे वाला व्यक्ति वीडियो कॉल पर आपके साथ है. ये ठग पुलिस अधिकारी या केंद्रीय एजेंसियों के एजेंट के रूप में पेश आते हैं. वे आपके डर का फायदा उठाते हैं, जिससे आपको लगता है कि आपके मोबाइल का दुरुपयोग किया गया है या आपके पते पर या पते से अवैध सामान भेजा गया है.

पीड़ित को उनके फोन पर एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट मिलता है, जिससे उनकी घबराहट बढ़ जाती है. आगे की जांच के नाम पर पीड़ित को अपने सारे पैसे दूसरे खाते में ट्रांसफर करने के लिए बहकाया जाता है. ठग वादा करते हैं कि 48 घंटे के भीतर पैसे वापस कर दिए जाएंगे, लेकिन हकीकत में यह सब झूठ होता है. पैसा कभी वापस नहीं आता. 

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उच्च पदस्थ अधिकारियों के रूप में पेश आकर और झूठे आश्वासन देकर, ठग अपने शिकार को यह विश्वास दिलाते हैं कि अगर आपने कानून का पालन नहीं किया यानी उनके बताए अनुसार काम नहीं किया तो जेल की सजा या इससे भी बदतर स्थिति हो सकती है. 

साइबर अपराधी हमारे डर और भरोसे पर फलते-फूलते हैं. वे हमेशा एक कदम आगे रहते हैं, धोखा देने और हमारे मन की शांति को छीनने के नए तरीके गढ़ते हैं. इस खतरे का एकमात्र समाधान हमेशा अलर्ट और सावधान रहना है. इन साइबर ठगों की चालों को समझें और खुद को उनका अगला शिकार बनने से बचाएं.

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