
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खारघर के रहने वाले 34 वर्षीय व्यक्ति के साथ साइबर ठगी की बड़ी वारदात सामने आई है. साइबर ठगों ने पीड़ित को ऑनलाइन ट्रेडिंग में बंपर रिटर्न का झांसा देकर 46 लाख रुपए लूट लिए. शिकायत के आधार पर पुलिस ने 5 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज किया है.
खारघर पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि पीड़ित द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), 419, 34 के साथ-साथ आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर लिया है.
मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में एक कंपनी में काम करने वाले पीड़ित से फरवरी से अप्रैल 2024 के बीच आरोपियों ने संपर्क किया था. उनकी पहचान केवल उनके मोबाइल नंबरों से होती है. आरोपियों ने उसे ऑनलाइन ट्रेडिंग करने और बंपर रिटर्न का लालच दिया था.
उन्होंने उसे निवेश और ट्रेडिंग में मदद करने के वादे पर व्हाट्सएप ग्रुप और विभिन्न लिंक उपलब्ध कराए. इस दौरान जालसाजों की मदद से पीड़ित ने निवेश और ट्रेडिंग में 46.23 लाख रुपए खर्च कर दिए. कुछ दिनों बाद जब उसने अपना खाता चेक किया तो उसने देखा कि उसे अच्छा रिटर्न मिला है.
हालांकि, निवेश और कमाई वापस लेने का उसका प्रयास विफल रहा, जिसके बाद उसने जालसाजों से संपर्क किया, जिन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. अपने साथ ठगी होने के एहसास के बाद पीड़ित ने पुलिस से संपर्क किया है. उसकी शिकायत के आधार पर केस दर्ज करके पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.
बताते चलें कि देश में बीते कुछ वर्षों के दौरान साइबर ठगी के मामलों में तेजी आई है. लोकलसर्किल्स के एक ताजा सर्वे में दावा किया गया है कि बीते 3 साल में 47 फीसदी भारतीयों ने एक या ज्यादा फाइनेंशियल फ्रॉड का अनुभव किया है. यानी कि देश की आधी आबादी इस वक्त साइबर ठगों की पहुंच में हैं.
किसी न किसी तरह से ठग लोगों को चूना लगा रहे हैं. इस सर्वे में ये भी कहा गया कि इनमें यूपीआई और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी फाइनेंशियल फ्रॉड सबसे आम हैं. आधे से ज्यादा लोगों को क्रेडिट कार्ड पर अनऑथराइज्ड चार्ज लगाए जाने का सामना करना पड़ा है. सर्वे में पिछले 3 साल का डेटा शामिल है.
इस आधार पर लोकलसर्किल्स ने कहा है कि 10 में से 6 भारतीय फाइनेंशियल फ्रॉड की सूचना रेगुलेटर्स या लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों को नहीं देते हैं. सर्वे में शामिल लोगों में से 43 फीसदी ने क्रेडिट कार्ड पर फ्रॉड वाले ट्रांजैक्शन की बात कही है. 36 फीसदी ने कहा कि उनके साथ फ्रॉड वाला ट्रांजैक्शन हुआ है.
क्रेडिट कार्ड फ्रॉड के बारे में 53 फीसदी लोगों ने अनऑथराइज्ड चार्ज के बारे में बात की है. वहीं आरबीआई के डेटा की बात करें तो 2023-24 में फ्रॉड के मामले 166 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 36 हजार से भी ज्यादा रहे हैं. इनमें शामिल रकम 2022-23 के मुकाबले आधी यानी 13 हजार 930 करोड़ रुपए रही है.