
रायबरेली के बछरावां पुलिस ने फर्जी वेबसाइट बनाकर फ्रॉड करने वाले गैंग के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह गैंग फर्जी वेबसाइट के जरिए लोगों से बात करता था. उनके पास से 9 लाख 25 हजार रुपये और चार फोन भी बरामद हुआ हैं. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. आगे की कार्रवाई की जा रही है.
पुलिस के मुताबिक, कुछ दिन पहले प्रदीप नाम के युवक ने ऑनलाइन फ्रॉड होने का एफआईआर दर्ज कराया था. उसने बताया कि उन्हें जीआई वायर (गैल्वनाइज्ड स्टील तार) खरीदना था. इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन नंबर सर्च किया. सर्च करने पर कई कंपनी के नंबर आए. उसमें एक कंपनी मिला, जिससे उन्होंने बात की. उन लोगों ने प्रॉमिस किया कि बहुत ही अच्छा जीआई वायर सस्ते दामों में उपलब्ध करा देंगे.
एडवांस के तौर पर जमा कराए 8 लाख रुपये
इसके बाद 17 लाख रुपए की डील हो गई. फिर उनके अकाउंट में एडवांस के तौर पर 8 लाख रुपये जमा कर दिया. वादे किए गए समय पर वायर नहीं आया,तो बात करने की कोशिश की. मगर कंपनी वेबसाइट से गायब हो गई थी. फिर उसने इसकी जानकारी पुलिस को दी. इसके बाद थाना अध्यक्ष बछरावां और उनकी टीम ने मामले में जांच की.
कई कंपनियां फर्जी नाम से रजिस्टर्ड
इसी बीच 28 जून बुधवार को बछरावां थाना पुलिस को मुखबिर के सूचना पर थाना क्षेत्र के फ्लाईओवर के पास पहुंची. इसके बाद घेराबंदी कर फर्जी वेबसाइट बनाकर फ्रॉड करने वाले गैंग के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. इस गैंग के लीडर रवि सिंह हैं. पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनके द्वारा कई कंपनियां फर्जी नाम से रजिस्टर्ड है. वे लोग फर्जी बिल बनाकर किसी भी तरीके से कस्टमर से वादा करके उनसे एडवांस के तौर पर कुछ रुपये लेते थे. फिर वेबसाइट से गायब हो जाते थे.
गैंग के लोग ठगी के लिए करीब ढाई सौ लोगों से की है बात
मामले में पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि ऑनलाइन ठगी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस उनका आपराधिक इतिहास के बारे में पता कर रही है. अभी उन लोगों पर दो एफआईआर दर्ज हैं. इनमें एक हैदराबाद और एक रायबरेली में है. यह गैंग करीब ढाई सौ लोगों से फोन करके बात की है. उन सब से बात करके पता किया जा रहा है कि उनसे फ्रॉड हुआ है या नहीं. जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.