
बिहार के चंपारण में डाक विभाग और अधिकारियों की लापरवाही का मामला सामने आया है. डाककर्मियों की लापरवाही कहें या सरकारी अव्यवस्था. जिस आधार कार्ड को भारत सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ आईडी कार्ड माना गया है, वही आधार कार्ड आज नदी में तैरता दिख रहा है.
आधार कार्ड को बनवाने के लिए लोग महीनों दरबदर भटकते रहते हैं. इतना ही नहीं इस कार्ड के कारण बहुत सारे गरीबों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं हो सका है. .
शुक्रवार को हजारों की संख्या में आधार कार्ड चनपटिया प्रखण्ड के घोघा गांव स्थित सिकरहना नदी में लावारिस स्थिति में बहते मिले. ग्रामीण नदी किनारे घूमने निकले थे तभी नदी के पानी में भारी संख्या में आधार कार्ड को देख इसकी सूचना आसपास के ग्रामीणों को दी.
देखते ही देखते लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. कुछ ग्रामीणों ने नाव के सहारे नदी में प्रवेश कर कार्ड को पानी से निकाला और कार्ड पर अंकित नाम और पते को पढ़ने के बाद जानकारी मिली कि अधिकतर कार्ड घोघा, गिद्धा एवं आसपास के गांव का है. जो डाक द्वारा अब तक कार्डधारक को नहीं प्राप्त हो सका है.
मामले की सूचना ग्रामीणों द्वारा पुलिस को भी दी गई. इस संबंध में चनपटिया अंचलाधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि मामले की सूचना मिलते ही गोपालपुर थाने को स्थल पर भेज दिया गया है, मामले की जांच करायी जा रही है. जबकि ग्रामीणों ने सरकार व प्रशासन से मामले में जांच कराने की मांग की है. वहीं, इस संबंध में घोघा पोस्ट मास्टर विनय पांडेय का कहना है कि हमे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है. हमें जो भी आधार कार्ड मिलता है उसे बांट दिया जाता है.
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