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बेगुनाह होकर भी 41 साल एकांत कारावास में बीते, फिर रिहाई के 3 दिन बाद हुई मौत... क्या है 'अंगोला-थ्री' की कहानी

कहानी तीन ऐसे लोगों की जिन्हें उस गुनाह की सजा मिली जो उन्होंने कभी किया ही नहीं था. तीन में से एक 29 साल बाद जेल से रिहा हुआ. तो वहीं दूसरा 41 साल बाद और तीसरा 43 साल बाद रिहा हुआ. तीनों को एकांत कारावास की सजा सुनाई गई थी. आखिर कौन थे वो तीनों शख्स जिन्हें बिना किसी बात के इतनी खौफनाक सजा सुनाई गई. चलिए जानते हैं विस्तार से...

अंगोला-थ्री के नाम से थे तीनों फेमस. अंगोला-थ्री के नाम से थे तीनों फेमस.
तन्वी गुप्ता
  • नई दिल्ली,
  • 02 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 10:00 AM IST

10 जून 1972... अमेरिका का लूसियाना (Louisiana) शहर. इस रात एक दुकान में चोरी की वारदात घटी. चोरी का इल्जाम हरमन वैलेस (Herman Wallace), रॉबर्ट किंग (Robert King) और अल्बर्ट वूडफॉक्स (Albert Woodfox) पर लगा. इन तीनों को जेल में बंद कर दिया गया. कोर्ट ने भी इन तीनों को दोषी मानते हुए एक साल कैद की सजा सुनाई गई.

जब ये तीनों जेल में अपनी सजा काट रहे थे, ठीक कुछ ही महीनों बाद जेल के गार्ड ब्रेंट मिलर की हत्या हो गई. तब पुलिस वालों को शक हुआ कि ब्रेंट की हत्या हरमन वैलेस और अल्बर्ट वूडफॉक्स ने की है. पुलिस ने छानबीन किए बिना ही कोर्ट में यह भी साबित कर दिया कि ये कत्ल हरमन और अल्बर्ट ने की है.

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वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, इसके बाद दोनों को एकांत कारावास में 40 सालों के लिए बंद कर दिया गया. उनके साथ-साथ रॉबर्ट को भी जेल में उन्ही के साथ कैद रखा गया. उस पर इनका साथ देने का आरोप लगा था. इन तीनों तो वहां 'अंगोला-थ्री' के नाम से जाना जाता था.

 बता दें, एकांत कारावास अमेरिका में सबसे लंबे समय जेल की सजा मानी जाती है. यह सजा उन कैदियों को दी जाती है जिन्होंने बेहद संगीन अपराध किया हो. जैसे किसी की हत्या या रेप जैसे अपराध. एकांत कारावास में जो जेल होती है वो बिल्कुल अलग होती है.

इसका कमरा 6 फीट लंबा और 9 फीट ऊंचा होता है. यहां न तो कोई लाइट होती है और न ही कैदियों को किसी और से मिलने दिया जाता है. दिन में सिर्फ एक घंटा ही जेल से बाहर निकालने की इजाजत दी जाती है. पूरे अमेरिका में 80 हजार से भी ज्यादा कैदी ऐसे हैं जो आज के समय में एकांत कारावास की सजा काट रहे हैं.

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अल्बर्ट और हरमन दोनों पहले 'ब्लैक पैंथर' राजनीतिक ग्रुप के मेंबर थे. जब इन लोगों को एकांत कारावास की सजा सुनाई गई तो 'ब्लैक पैंथर' के लोगों ने इसका विरोध किया. उनका कहना था कि ये तीनों निर्दोष हैं. इन्हें बेवजह फंसाया गया है. क्योंकि जब गार्ड की हत्या की गई, उस समय तो ये तीनों जेल के अंदर बंद थे. वो जेल से बाहर कैसे आ सकते थे? और कैसे गार्ड की हत्या कर सकते थे?

किसी ने नहीं सुनी 'ब्लैक पैंथर' पार्टी की बात
लेकिन 'ब्लैक पैंथर' पार्टी की बात किसी ने नहीं सुनी. थक हारकर पार्टी ने खुद के दम पर एक जांच कमेटी बैठाई. उन्होंने कोर्ट में एक याचिका दायर की. इसके बाद उनके वकील ने कोर्ट से अपील की कि अल्बर्ट, हरमन और रॉबर्ट को एकांत कारावास की सजा नहीं होनी चाहिए. क्योंकि हत्या के समय वे जेल में बंद थे और वारदात वाली जगह जो फिंगर प्रिंट मिले, वो भी इनसे मैच नहीं होते हैं.

'ब्लैक पैंथर' पार्टी ने सबूत के तौर पर एक कैदी की भी गवाही ली थी, जो खुद एक मुजरिम था. उसने बताया था कि हत्या के समय हरमन, अल्बर्ट और रॉबर्ट उसके ही सामने वाली जेल में बंद थे. इसलिए उन्होंने गार्ड की हत्या नहीं की. लेकिन जब उसे कोर्ट में पेश किया जाना था तो किन्ही कारणों से उस कैदी की भी मौत हो गई.

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29 साल बाद एक कैदी रिहा
इस कारण तीनों को एकांत कारावास में ही रहना पड़ा. फिर 29 साल बाद एक उम्मीद की किरण नजर आई. 'ब्लैक पैंथर' के लगातार कोशिश करने से कोर्ट ने भी माना कि दोनों को रिहा कर देना चाहिए. कोर्ट ने अल्बर्ट और हरमन को रिहा करने की घोषणा भी कर दी. लेकिन जैसे ही वो ऑर्डर जेल के अधिकारियों के पास पहुंचा तो उनकी तरफ से इस ऑर्डर को चैलेंज कर दिया गया. और उन्हें फिर से जेल में बंद कर दिया गया.

Daily Mail के मुताबिक, सिर्फ तीसरे कैदी रॉबर्ट किंग को ही साल 2001 रिहा किया गया. जेल से बाहर आते ही रॉबर्ट ने बताया उन्हें उस गुनाह की सजा मिली जो उन्होंने कभी किया ही नहीं था. रॉबर्ट ने जेल में पूरे 29 साल बिताए. जिनमें से कुछ ही महीने नॉर्मल जेल में, तो बाकी के साल उन्होंने एकांत कारावास में बिताए.

अल्बर्ट और हरमन को अलग जेल में डाला
वहीं, रॉबर्ट के बाहर आते ही जेल अधिकारियों को लगने लगा कि कहीं अल्बर्ट और हरमन वहां से भागने की कोशिश कर सकते हैं. इसलिए उन्होंने साल 2008 में अल्बर्ट को वहां से निकालकर दूसरी जेल में शिफ्ट कर दिया गया. फिर आया साल 2010. हरमन और अल्बर्ट को रिहा होने की फिर से उम्मीद जागी. क्योंकि इस साल अमेरिका में एक नया कानून बना था. जिसके अनुसार, जेल में बंद कैदी कोर्ट में जज के सामने अपनी कहानी बता सकता है.

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इसके तहत जज तय करेंगे कि ये आदमी बेकसूर है या नहीं. अगर जज को लगता है कि वह बेवजह बंद है तो वे तुरंत उसे रिहा कर सकते हैं. लेकिन इसमें भी कुछ रूल्स थे. इनमें से एक रूल ये भी था कि अगर जज उस मुजरिम को लेकर कोई भी फैसला सुनाएं तो उनके फैसले को कोई भी चैलेंज कर सकता था.

41 साल बाद हरमन रिहा
तब अल्बर्ट ने और हरमन ने अपनी-अपनी कहानी जज को सुनाई. जज ने उन्हें बेकसूर मानते हुए रिहा कर दिया. हरमन को तो साल 2013 में रिहा कर दिया गया. उन्होंने 41 साल एकांत कारावास में बिताए. दुखद बाद ये रही कि हरमन की जेल से रिहा होने के तीन दिन बाद ही मौत हो गई. दरअसल, वह लिवर कैंसर से पीड़ित थे.

लेकिन अल्बर्ट को रिहा नहीं किया गया. क्योंकि जज के फैसले को पुलिस वालों ने चैलेंज कर दिया था. इसके बाद अल्बर्ट ने हार ही मान ली. वो बिल्कुल टूट गया था. उसने मान लिया था कि अब उसे सारी जिंदगी ऐसे ही एकांत कारावास में बितानी पड़ेगी. लेकिन जब ये बात लोगों तक फैली तो उन्होंने इसका विरोध किया. जिसके चलते जज को अल्बर्ट को भी रिहा करना पड़ा. फिर साल 2016 में वह जेल से रिहा हो गए.

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43 साल बाद अल्बर्ट रिहा
बता दें, अल्बर्ट ने पूरे 43 साल एकांत कारावास में बिताए. जेल से बाहर आकर उन्होंने भी यही कहा कि मुझे उस अपराध की सजा मिली जो मैंने कभी किया ही नहीं था. मेरी आधे से ज्यादा जिंदगी तो जेल में ही कट गई. इसके बाद उन्होंने 'Solitary' नामक एक बुक भी लिखी. फिर 4 अगस्त 2022 में उनकी मौत हो गई.

 

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