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सेक्स स्कैंडल: जेडीएस नेता प्रज्वल रेवन्ना को झटका, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु में कोर्ट ने बुधवार को जेडीएस नेता प्रज्वल रेवन्ना की जमानत याचिका खारिज कर दी, जो कई मामलों में बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे हैं. एडिशनल सिटी सिविल और सेशन कोर्ट के जज ने सोमवार को उनकी याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

कोर्ट ने बुधवार को जेडीएस नेता प्रज्वल रेवन्ना की जमानत याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने बुधवार को जेडीएस नेता प्रज्वल रेवन्ना की जमानत याचिका खारिज कर दी है.
aajtak.in
  • बंगलुरु,
  • 26 जून 2024,
  • अपडेटेड 7:55 PM IST

कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु में कोर्ट ने बुधवार को जेडीएस नेता प्रज्वल रेवन्ना की जमानत याचिका खारिज कर दी, जो कई मामलों में बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे हैं. एडिशनल सिटी सिविल और सेशन कोर्ट के जज ने सोमवार को उनकी याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज इसे खारिज करते हुए आदेश पारित कर दिया है.

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33 वर्षीय प्रज्वल रेवन्ना इस वक्त एसआईटी की हिरासत में है. सोमवार को उनको 8 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था, लेकिन एक दिन बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज ने उन्हें 29 जून तक एसआईटी की कस्टडी में भेज दिया, जब एसआईटी ने एसपीपी के जरिए से बॉडी वारंट की मांग की थी. प्रज्वल के खिलाफ चार अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं.

प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ पहले से तीन केस दर्ज किए गए थे. लेकिन चौथा केस सोमवार को एक अन्य मामले में दर्ज किया गया है. उनके खिलाफ दर्ज पहला केस 47 साल की पूर्व नौकरानी के यौन शोषण से जुड़ा है. इसमें उनको मुख्य आरोपी ना बनाकर सहायक आरोपी यानी की आरोपी नंबर 2 बनाया गया है. इसे 28 अप्रैल को हासन के होलेनारसीपुरा में दर्ज किया गया था. 

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इसमें उनके पिता एचडी रेवन्ना मुख्य आरोपी हैं. वो इस समय जमानत पर हैं. दूसरा केस सीआईडी ने दर्ज किया था. यह मामला 1 मई को दर्ज हुआ था. इसमें 44 साल की महिला ने कई बार बलात्कार करने का आरोप लगाया है. पीड़िता जेडीएस की कार्यकर्ता है. तीसरा केस भी रेप का ही है. चौथा केस एक महिला के यौन उत्पीड़न, पीछा करने और धमकी देने के आरोप में दर्ज है.

इसमें हासन से पूर्व भाजपा विधायक प्रीतम गौड़ा सहित तीन अन्य लोगों का भी नाम है. इन पर यौन उत्पीड़न के दौरान प्रज्वल द्वारा खींची गई तस्वीरों को वीडियो कॉल पर शेयर करने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक, "एसआईटी ने प्रज्वल और तीन अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 355ए, 354बी, 354 डी, 506 और आईटी एक्ट की धारा 66 ई के तहत केस दर्ज किया गया है.''

एसआईटी ने 31 मई को जर्मनी से बंगलुरु एयरपोर्ट पर उतरने के बाद प्रज्वल रेवन्ना को गिरफ्तार कर लिया था. वो हासन में लोकसभा चुनाव का मतदान समाप्त होने के बाद 27 अप्रैल को जर्मनी भाग गए थे. सीबीआई के जरिए एसआईटी इंटरपोल से उनके ठिकाने की जानकारी मांगने के लिए 'ब्लू कॉर्नर नोटिस' जारी कराया था. एक विशेष अदालत ने 18 मई को गिरफ्तारी वारंट जारी किया था.

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दूसरी तरफ अपने ही पार्टी के वर्कर के साथ जबरन समलैंगिक संबंध बनाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए उनके छोटे भाई सूरज को भी अदालत ने एक जुलाई तक के लिए सीआईडी की कस्टडी में भेज दिया है. सीआईडी ​​को रविवार शाम सूरज रेवन्ना के केस से संबंधित फाइलें और दस्तावेज मिल गए थे. इस मामले में अशोक नाइक को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है. 

प्रज्वल और सूरज के पिता एचडी रेवन्ना ने कहा था कि उनके बेटों को साजिश के तहत फंसाया गया है. उन्हें भगवान और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा कि जब समय आएगा तो वो सब कुछ बताएंगे. उन्होंने कहा था, "मैं किसी भी बात पर प्रतिक्रिया नहीं दूंगा. सीआईडी को जांच करने दीजिए. मैं इस पर अभी कुछ नहीं कहूंगा. मैं न्यायपालिका का सम्मान करता हूं.''

उन्होंने आगे कहा था, "मैं ऐसी साजिशों से नहीं डरूंगा. मैं जानता हूं कि यह क्या है. सब समय तय करेगा." यह पूछे जाने पर कि साजिश कौन कर रहा है, तो उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता, मैं इसे आप पर छोड़ता हूं. मेरा बेटा सूरज पहले ही पुलिस के पास गया था. सभी जानते हैं कि पिछले कुछ दिनों में क्या हुआ है." सूरज रेवन्ना ने भी अपने उपर लगे सभी आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन किया है.

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