
साल 2015 में फिल्म 'दृश्यम' रिलीज हुई थी. इसमें बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन लीड रोल में थे. फिल्म की कहानी में दिखाया गया था कि कैसे एक शख्स हत्या करता है, फिर खुद को और अपने परिवार को बचाने के लिए एक परफेक्ट प्लानिंग करता है. यह जानते हुए कि हत्या उसी शख्स ने की है, पुलिस को ऐसा कोई सबूत नहीं मिलता कि वो उसे गिरफ्तार कर सके. ठीक उसी तरह की एक खौफनाक कहानी महाराष्ट्र के नागपुर में देखने को मिली है.
फिल्म 'दृश्यम' की तरह नागपुर में भी एक हत्या होती है और शव गायब हो जाता है. एक के बाद एक कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस बहुत मुश्किल से हत्यारे तक पहुंच पाती है. इसके बाद जो कहानी सामने आती है, वो हैरान कर देने वाली है. दिलचस्प बात तो ये है कि इस कहानी में हत्यारोपी का नाम भी अजय है. उसने अपनी प्रेमिका की हत्या करके शव को ऐसी जगह छिपाया कि पुलिस लाख कोशिशों के बावजूद उसे खोज नहीं पाई. फिलहाल आरोपी गिरफ्तार है.
दरअसल, ये पूरा मामला नागपुर के बेलतरोड़ी थाना क्षेत्र का है. यहां सेना के एक जवान अजय वानखेड़े की मेट्रोमोनियल साइट पर ज्योत्सना आकरे से मुलाकात हुई. ज्योत्सना तलाकशुदा थी. उसकी शादी एक साल तक ही चली थी. इसके बाद उसने अपने पति से तलाक ले लिया था. अजय और ज्योत्सना के बीच पहले बातचीत शुरू हुई, जो बाद में प्यार में बदल गई. दोनों एक-दूसरे से मिलने भी लगे. इस दौरान शादी के वादे के साथ शारीरिक संबंध भी बनने लगे.
इस तरह दो साल बीत गए. ज्योत्सना अपने प्रेमी अजय से बार-बार शादी के लिए कहती, लेकिन हर बार वो टाल जाता. इधर उसके घर वाले इस रिश्ते का विरोध करने लगे और उस पर दूसरी लड़की से शादी का दबाव डालने लगे. इस वजह से अजय ने ज्योत्सना से किनारा करना शुरू कर दिया. उससे बातचीत बंद कर दी. लेकिन वो हार मानने वाली नहीं थी. उसने भी अपने संपर्कों के जरिए उसका पता लगा लिया. इस बात का पता लगते ही अजय घबरा गया.
इसके बाद उसने अपनी मां के मोबाइल फोन से ज्योत्सना को कॉल किया. उसे 28 अगस्त को नागपुर के वर्धा रोड पर मिलने के लिए बुलाया. वो ऑटोमोबाइल शॉप में काम करती थी. उसने अपने परिवार से बहाना बनाया कि वो अपने दोस्त के घर जा रही है. वहीं पर रात को रुक जाएगी. दोनों वर्धा रोड इलाके में स्थित एक होटल में ठहरे. कुछ समय बाद होटल से निकलकर पास के टोल प्लाजा पर पहुंचे, जहां अजय ने ज्योत्सना को नशीली कोल्डड्रिंक पिला दिया.
ज्योत्सना बेहोश हो गई. अजय ने उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी. इसके बाद एक सुनसान इलाके में ले गया. वहां उसने रात में एक गड्ढा खोदा. उसके शव को दफना कर उसे सीमेंट से कवर कर दिया. उसका मोबाइल फोन वर्धा रोड से गुजर रहे एक ट्रक में फेंक दिया. इधर, ज्योत्सना जब अगले दिन घर नहीं लौटी तो उसके परिजनों ने 29 अगस्त को बेलतरोडी थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने भी तुरंत जांच शुरू कर दी.
कई दिनों तक जब ज्योत्सना का पता नहीं चला, तो 17 सितंबर को अपहरण का मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की, तो पता चला कि वो अजय वानखेड़े को नियमित रूप से कॉल करती. इसके बाद पुलिस ने अजय को पूछताछ के लिए बुलाया. लेकिन कहते है ना कि चोर की दाढी में तिनका. पुलिस का नाम सुनते ही अजय डर गया. उसने अपने फौजी होने का फायदा उठाया और पुणे के आर्मी अस्पताल में मरीज बनकर भर्ती हो गया.
इस बीच उसने नागपुर के सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया, लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी गई. इसके बाद उसने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसने 15 सितंबर को उसकी याचिका खारिज कर दी. अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद बेलतरोडी पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने जब कड़ाई से उससे पूछताछ की तो उसने अपना अपराध कबूल कर लिया. इसके बाद उसे क्राइम सीन भी पुलिस को बता दिया.