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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED ने रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा को बेटे संग किया गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मामले में रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है. अनिल टुटेजा अपने बेटे के साथ बयान दर्ज करवाने के लिए एसीबी/ईओडब्ल्यू ऑफिस पहुंचे थे. वहां पूछताछ के बाद ईडी की टीम ने दोनों को अपने गिरफ्त में ले लिया है.

रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा को ईडी ने किया गिरफ्तार. रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा को ईडी ने किया गिरफ्तार.
aajtak.in
  • रायपुर,
  • 21 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 1:37 PM IST

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मामले में रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है. अनिल टुटेजा अपने बेटे के साथ बयान दर्ज करवाने के लिए आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू)/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के ऑफिस पहुंचे थे.

सूत्रों के मुताबिक, साल 2003 बैच के आईएएस अधिकारी रहे अनिल टुटेजा को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया है. मजिस्ट्रेट के सामने पेश करके ईडी उन्हें रिमांड में लेने की कोशिश करेगी. अनिल टुटेजा पिछले साल ही रिटायर्ड हुए थे.

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में आयकर विभाग की शिकायत पर आधारित अपनी पिछली एफआईआर को रद्द करने के बाद ईडी ने शराब घोटाला मामले में एक नया मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था. ईडी ने इस मामले में अपनी जांच का विवरण राज्य ईओडब्ल्यू/एसीबी के साथ साझा किया था.

सूत्रों के हवाले से ये भी जानकारी सामने आ रही है कि भूपेश सरकार में ईओडब्ल्यू में संविदा में नियुक्ति पाए एक बड़े पुलिस अधिकारी से भी ईडी ने जब डिटेल मांगनी शुरू की तो उनसे जमकर नोंकझोंक हुई है. भूपेश सरकार में नियुक्ति लेना इस पुलिस अधिकारी के लिए काफी मंहगा पड़ गया है. 

बताते चलें कि प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया था कि ये घोटाला पूरे दो हजार करोड़ रुपए का है. इस घोटाले में छत्तीसगढ़ के कई बड़े नेता और अफसर भी शामिल हैं. मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे अनवर ढेबर को ईडी ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था. 

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अनवर ढेबर कांग्रेस नेता है. रायपुर के मेयर एजाज ढेबर का भाई है. ईडी ने छत्तीसगढ़ के इस शराब घोटाले के लिए अनवर ढेबर के साथ-साथ आईएएस अफसर अनिल टुटेजा को भी 'सरगना' बताया था. एजेंसी का कहना था कि मामले में पूछताछ के लिए अनवर ढेबर को सात बार समन भेजा गया था.

पिछले साल ईडी ने अनवर ढेबर के छत्तीसगढ़, वेस्ट बंगाल और दिल्ली के 35 ठिकानों पर छापेमारी की थी. एक प्रेस रिलीज जारी करके पूरे घोटाले की जानकारी दी थी. ईडी का कहना है कि साल 2019 से 2022 के बीच 'अकूत भ्रष्टाचार' हुआ है. इसमें दो हजार करोड़ की 'मनी लॉन्ड्रिंग' के सबूत मिले हैं.

छत्तीसगढ़ में शराब का सारा कारोबार राज्य सरकार ही चलाती है. यहां 800 शराब की दुकानें हैं, जिन पर सरकार का नियंत्रण है. यहां प्राइवेट शराब की दुकानें खोलने की इजाजत नहीं है. राज्य में बिकने वाली शराब का स्टॉक छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) करता है. 

इसके साथ ही शराब की दुकान चलाने, बोतल बनाने और कैश कलेक्शन जैसे काम में लगने वाले लोगों के लिए भी टेंडर जारी करता है. ईडी का कहना है कि अपनी राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर अनवर ढेबर CSMCL कमिश्नर और एमडी का करीबी बन गया. उनकी मदद से विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह जैसे लोगों को नौकरी दिलवाई. इस तरह से उसने छत्तीसगढ़ के शराब कारोबार की पूरी प्रक्रिया पर कब्जा कर लिया था.

इनपुट- छत्तीसगढ़ से नरेश शर्मा

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