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10 साल किडनैप रही 9 की बच्ची... जुंको फुरुता जैसा जापान का दूसरा केस, रोंगटे खड़े कर देगी टॉर्चर की ये कहानी

ये कहानी है 9 साल की जापानी लड़की की, जिसे 28 साल के लड़के ने किडनैप (Kidnap) कर लिया. वह पूरे 10 साल तक किडनैप रही. इस दौरान इस लड़के ने इस बच्ची को इतने टॉर्चर दिए, जिसका कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता. कैसे यह बच्ची इस लड़के के चंगुल से आजाद हो पाई, चलिए जानते हैं विस्तार से...

फुसाको सानो (फाइल फोटो) फुसाको सानो (फाइल फोटो)
तन्वी गुप्ता
  • नई दिल्ली,
  • 14 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 4:44 PM IST

जापान (Japan) में 1962 में जन्मा नोबूयूकी साटो (Nobuyuki Sato) माता-पिता की इकलौती संतान था. साटो जब बड़ा होने लगा तो उसके पिता ने परिवार के लिए एक नया घर बनवाया. इसमें उन्होंने दो फ्लोर बनवाए. दंपति की उम्र काफी ज्यादा थी, इसलिए वे लोग ग्राउंड फ्लोर पर रहते थे, जबकि साटो फर्स्ट फ्लोर में अकेला रहता था. उसने अपने हिसाब से अपना कमरा डिजाइन करवा रखा था, लेकिन यही घर आने वाले दिनों में किसी के लिए नरक बनने वाला था.

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दरअसल, साटो बचपन से ही काफी अजीब स्वभाव का लड़का था. उसकी किसी से भी नहीं बनती थी. न घर में और न ही स्कूल में वह किसी से सीधे मुंह बात करता. वह छोटी-छोटी बातों पर लोगों से लड़ने लगता. इसलिए साटो का कभी कोई दोस्त नहीं बन पाया. सभी लोग उससे दूरी बनाकर रखते थे.

इसके अलावा साटो को जर्मोफोबिया (Germophobia) नामक एक अजीब बीमारी भी थी. यह ऐसी बीमारी है, जिसमें इंसान को गंदगी से नफरत होती है. इसलिए जब भी साटो के पिता काम करके घर लौटते और उनके कपड़ों में उसे जरा सी भी गंदगी दिखती तो वो उन्हें लात-घूसों से मारने लगता. माता-पिता ने उसका काफी इलाज करवाया, लेकिन उसकी ये बीमारी जस की तस रही.

खैर जैसे-तैसे वक्त बीता. हाईस्कूल खत्म होने के बाद साटो ने ऑटोमोबाइल की फैक्ट्री में काम करना शुरू किया, लेकिन जल्द ही उसे निकाल दिया गया, क्योंकि एक दिन उसने अचानक फैक्ट्री के अंदर लोगों के सामने ही पेशाब कर दिया था. इसके लिए साटो ने फैक्ट्री में माफी मांगी तो उसे दोबारा काम पर रख लिया गया. थोड़े ही दिन बाद वह खुद ही काम छोड़कर घर वापस लौट आया.

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घर को लगा दी आग

जब साटो की उम्र 19 साल हुई तो उसने मां से कहा कि वह अब अकेला रहना चाहता है. इसलिए वह घर छोड़कर जा रहा है. माता-पिता ने भी कहा कि ठीक है, जैसा तुन्हें सही लगे, लेकिन न जाने साटो को अचानक क्या हुआ और उसने घर से बाहर निकलते ही पेट्रोल छिड़कर अपने ही घर को आग के हवाले कर दिया.

आग के फैलते ही घर वालों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी. इसके बाद बड़ी मुश्किल से आग पर काबू पाया गया. साटो के माता-पिता को उसकी ये हरकत इतनी अजीब लगी कि उन्होंने उसे इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवा दिया. एक महीने तक उसका इलाज चला, लेकिन तब भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ा.

लड़की के किडनैप का प्लान

उधर साटो जब इलाज के बाद घर आया तो उसने माता-पिता से जिद की कि उसके लिए एक अलग से कमरा बनवाया जाए, जहां वह अकेला शांति से रहे. माता-पिता ने उसकी बात मान ली और सेकंड फ्लोर पर उसके लिए एक अलग से कमरा बनवा दिया.

साटो अब पूरा-पूरा दिन इसी कमरे में रहता. अकेले रह-रहकर उसका दिमाग अब और भी ज्यादा अजीब हो गया था. उसने एक दिन प्लान बनाया कि क्यों न वो किसी लड़की का अपहरण कर ले.

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लड़कियों के बहलाने फुसलाने लगा साटो

जून 1989 में प्लान के मुताबिक, उसने घर से कार उठाई और एक एलिमेंटरी स्कूल के बाहर जाकर खड़ा हो गया. वहां से 4 लड़कियों का ग्रुप जा रहा था. उन लड़कियों की उम्र 9 से 10 साल के बीच थी. उसने उन लड़कियों का पीछा किया. फिर आगे जाकर उनके सामने गाड़ी रोक दी.

साटो गाड़ी से उतरा और उन्हें टॉफी-चॉकलेट का लालच देकर बहकाने की कोशिश की, लेकिन वे लड़कियां समझदार थीं. उन्होंने उससे बात तक नहीं की और आगे बढ़ गईं. उन्होंने फिर घर जाकर माता-पिता को पूरी बात बताई. मामला पुलिस तक पहुंचा और उन्होंने साटो को गिरफ्तार कर लिया गया.

पिता की हो गई डिप्रेशन से मौत

पुलिस ने जब उसका मेडिकल करवाया तो पाया कि उसकी मानसिक हालत कुछ ठीक नहीं है. इसलिए कोर्ट ने उसे रिहैब सेंटर भेजने का आदेश दिया. यहां वह एक महीना रहा और वापस घर लौट आया. लेकिन लोग अब साटो को लेकर तरह-तरह की बातें बनाने लगे थे. जिसके कारण साटो के पिता काफी डिप्रेशन में रहने लगे.

दो महीने बाद तबीयत खराब होने के चलते उनकी मौत हो गई. फिर घर की सारी जिम्मेदारी अब साटो की मां पर आ गई. साटो तो कोई काम करता नहीं था. इसलिए घर चलाने के लिए साटो की मां नौकरी करने लगीं.

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9 साल की बच्ची का किडनैप

फिर दिन आया 13 नवंबर 1990 का. साटो ने शाम को मां की कार उठाई और मार्केट की तरफ निकल गया. यहां उसे एक छोटी लड़की दिखाई दी. उसे वह लड़की इतनी पसंद आई कि उसने उसका किडनैप करने का सोच लिया.

लड़की का नाम था फुसाको सानो (Fusako Sano). जिसकी उम्र उस समय महज 9 साल थी. साटो ने कार रोकी और सानो के सामने आकर खड़ा हो गया. साटो ने उसे चाकू दिखाया और गाड़ी में बैठने को कहा. सानो काफी छोटी थी. वह डर के मारे चुपचाप गाड़ी में बैठ गई.

रस्सी से खींचकर लड़की को ऊपर लाया साटो

साटो ने गाड़ी स्टार्ट की और उसे अपने घर ले गया, लेकिन घर में उसकी मां भी मौजूद थी. इसलिए उसने लड़की के मुंह में टेप लगा दिया और आंखों पर पट्टी बांध दी. उसके हाथ भी बांधे और घर के पीछे ले जाकर उसे खड़ा कर दिया. फिर अकेले घर में घुसा और ऊपर जाकर खिड़की से रस्सी बांधकर उसे नीचे फेंका. फिर दोबारा नीचे गया और रस्सी को सानो की कमर में बांध दिया. इसके बाद ऊपर जाकर उसने रस्सी से सानो को ऊपर खींचा और कमरे में लाकर पटक दिया.

बच्ची को धमकाया

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उसने फिर सानो की पट्टियां खोलीं और धमकाते हुए कहा कि तुम्हारा किडनैप हुआ है. तुम काफी समझदार लड़की लगती हो. अगर तुम मरना नहीं चाहती हो तो जैसा मैं बोलता हूं वैसा ही करो. अगर तुमने जरा सा भी शोर मचाया तो मैं तुम्हें जान से मार डालूंगा और तुम्हारे परिवार की भी हत्या कर दूंगा. 9 साल की सानो उसकी धमकी से डर गई और उसने एक आवाज भी नहीं निकाली. इसके बाद शुरू हुआ साटो का जुल्म.

बच्ची के माता पिता ने करवाई गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज

वहीं जब शाम होते-होते सानो घर नहीं पहुंची तो उसके माता-पिता को टेंशन होने लगी. वे पुलिस स्टेशन पहुंचे और बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई. पुलिस ने तुरंत हर जगह सानो को ढूंढ़ना शुरू किया, लेकिन उन्हें वह कहीं नहीं मिली. उस जमाने में सीसीटीवी होते नहीं थे. इसलिए बिना सीसीटीवी के सानो का पता लगा पाना बेहद मुश्किल था.

इसके बाद पुलिस ने 200 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को सानो की तलाश में लगा दिया, लेकिन कहीं कोई सफलता नहीं मिली. अगले दिन होते-होते पैंपलेट्स और होर्डिंग्स इलाके में लगाए गए, तभी सानो का कहीं कुछ पता नहीं लग पाया.

बच्ची को करने लगा टॉर्चर

उधर, साटो 9 साल की सानो को साटो अजीबोगरीब तरीके से टॉर्चर देने लगा. उसके पांव बांध दिए. उसका जब मन करता चाकू से उस पर निशान बना देता. उसे मारता-पीटता. उसके चेहरे पर मुक्के बरसाता. बाथरूम भी उसे खुद लेकर जाता. उसके लिए भी उसने एक ही समय तय कर रखा था. उसी समय सानो बाथरूम जा सकती थी.

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साटो खाने में भी उसे वही देता जो उसका मन करता. वह उसे सिर्फ एक ही टाइम खाना देता. वह स्टेनगन से उस पर हमला करता. ये ऐसी स्टेनगन थी, जिससे सिर्फ जोर का करंट लगता था. और यह दर्द घंटों तक रहता था.

स्टेनगन से सानो को इतना दर्द होता कि उसकी आंखों से आंसू निकल जाते, लेकिन फिर भी वह चूं तक नहीं करती. उसकी बेरहमी से वह इतनी तंग आ चुकी थी कि कभी-कभी वह खुद ही स्टेनगन से खुद को तकलीफ पहुंचाती, ताकि उसे दर्द की आदत हो जाए.

आंखों पर मारता मुक्के

साटो सिर्फ इतना ही जुल्म नहीं करता, बल्कि वह रोजाना उसकी आंखों पर कई मुक्के मारता. साटो ने खुद सानो से कहा कि वह एक साल में कुछ दिन छोड़कर उसे मुक्के मारा करेगा. वह उसे साल में 300 से ज्यादा मुक्के सिर्फ आंख में ही मारेगा.

सानो इन मुक्कों से कई दिनों के लिए अंधी भी हो जाती, लेकिन फिर भी सानो ये सब बर्दाश्त करती रही. अब उसे लगने लगा था कि यही उसकी जिंदगी होने वाली है. वह उम्रभर इसी कमरे में रहेगी और यहीं उसकी मौत हो जाएगी.

साटो का टॉर्चर सह सह कर सानो का वजन अब सिर्फ 37 किलोग्राम रह गया था. काफी दिन यूं ही बीतते गए. फिर एक दिन साटो ने सानो के पैरों पर बंधी टेप को खोला. सानो के पैर खोलने के बावजूद वह उन्हें हिला भी नहीं पा रही थी, क्योंकि उसके पैर बिल्कुल सुन्न पड़ चुके थे. उसे महसूस ही नहीं हो रहा था कि उसके शरीर में पैर हैं भी या नहीं.

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साटो की मां ने करवाई रिपोर्ट दर्ज

जनवरी 1996 का समय आया. अब सानो को उस घर में रहते हुए साढ़े पांच साल से ज्यादा का समय हो चुका था. वह जिंदा तो थी, लेकिन एक लाश की तरह. तभी साटो की मां ने पुलिस में अपने बेटे के खिलाफ एक शिकायत दर्ज करवाई. उसने बताया कि उसका बेटा उसे मारता-पीटता है.

पुलिस जब उनके घर आई तो उन्होंने साटो को नीचे बुलवाया और डांटते हुए दोबारा ऐसा न करने की वार्निंग दी. अगर उस समय पुलिस साटो का कमरा देख लेती तो शायद सानो उन्हें वहां दिखती और उस बच्ची को तभी छुड़ा लिया जाता. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

साटो का साथ देने लगी सानो

वहां सानो की हालत अब काफी खराब होने लगी थी. उसने किडनैपिंग के बाद से कभी धूप ही नहीं देखी थी. इस कारण उसके शरीर में विटामिन की कमी आने लगी थी. अब यहां सानो को लगने लगा कि उसकी यही जिंदगी है तो उसने भी साटो का साथ देना शुरू कर दिया. उसने सोचा कि अगर वो साटो का साथ देगी तो शायद वह उस पर कम जुल्म करे.

अब दोनों के बीच में थोड़ी बहुत दोस्ती हो गई थी. दोनों साथ में टीवी देखते और बातें करते. लेकिन फिर भी साटो उसे दोस्त नहीं बल्कि अपना गुलाम ज्यादा मानता था. उसके अत्याचार तब भी कम नहीं हुए. वह उससे मारपीट करता रहता. वहां सानो जिंदा रहने के लिए चुपचाप ये सब सहती रहती.

मां से मारपीट करता साटो

उधर दूसरी तरफ, साटो की मां अब भी बेटे से काफी परेशान थी. वह उससे भी मारपीट करता. साटो की उम्र 40 के करीब हो चुकी थी. जबकि, उसकी मां 65 साल की हो गई थी. फिर भी वह घर का कोई काम नहीं करता और न ही कोई नौकरी करता. वह सिर्फ मां के पैसों पर ऐश कर रहा था.

अब साटो की मां की रिटायरमेंट हो गई. वह घर पर रहने लगीं. इससे घर में झगड़े और भी बढ़ गए. साटो मां को कुर्सी से बांधकर रखता. उनसे मारपीट करता. वह दिनभर मां को बांधकर रखता. फिर रात को सोने के टाइम उन्हें छोड़ देता. एक दिन परेशान होकर 12 जनवरी 2000 के दिन साटो की मां ने पहली बार पुलिस वालों को फोन किया और बेटे की करतूत बताई. लेकिन पुलिस वालों इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया.

फॉर्मेलिटी के लिए 19 जनवरी 2000 के दिन एक पुलिसकर्मी आया और बाहर से ही साटो की मां से पूछताछ करके चला गया. साटो की मां ने भी उसे कुछ खास नहीं बताया, क्योंकि उसे लगा कि जब तक कोई बड़ा अधिकारी यहां नहीं आएगा, उसके मामले पर कार्रवाई नहीं की जाएगी.

कमरे में मिली सानो

फिर 19 जनवरी 2000 के दिन साटो की मां ने कुछ हेल्थ ऑफिसर्स को फोन दिया. जिसके बाद 28 जनवरी 2000 के दिन कुछ हेल्थ ऑफिसर्स साटो के घर आए. जैसी ही वे वर्कर्स उनके घर पहुंचे तो उन्हें वहां बदबू आ रही थी. तब साटो की मां ने बताया कि उनका बेटा ऊपर कमरे में है. जैसे ही हेल्थ वर्कर्स ऊपर गए तो उनके होश उड़ गए. उन्हें वहां सानो बदहाल हालत में मिली. तुरंत पुलिस को सूचना दी गई.

जब पुलिस वहां पहुंची उन्होंने तुरंत सानो को अस्पताल पहुंचाया. BBC के मुताबिक, साटो की मां से पूछा गया कि क्या आप इस लड़की को जानते हो. तो साटो की मां ने कहा कि उसे इस बारे में कुछ भी नहीं पता. उसे नहीं पता कि ये लड़की कौन है. क्योंकि वह कभी ऊपर वाले कमरे में गई ही नहीं. दरअसल, साटो कभी भी अपनी मां को अपने कमरे में जाने ही नहीं देता था. फिर पुलिस ने सख्ती से साटो से पूछताछ शुरू की. लेकिन साटो कुछ भी नहीं बोल रहा था.

उम्र 19 साल, दिमाग 9 साल की बच्ची का
वहीं, सानो से जब पुलिस ने पूछा कि वह अपने बारे में कुछ बताए तो वह कुछ भी नहीं बता पाई. क्योंकि भले ही उसकी उम्र उस समय 19 साल हो चुकी थी. लेकिन अभी भी उसका दिमाग 9 साल के बच्चे का ही था.

दरअसल, उसकी हालत उस कमरे में रह रह कर काफी खराब हो चुकी थी. इसका असर उसके दिमाग पर भी पड़ा था. लेकिन कुछ समय बाद सानो ने पुलिस को अपना नाम बताया. उसका नाम सुनते ही पुलिस वाले भी दंग रह गए. क्योंकि उन्हें अच्छे से याद था कि इसी लड़की की तलाश में 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी लगे थे, लेकिन उन्हें वह बच्ची मिली ही नहीं थी. पुलिस वालों ने तुंरत सानो के माता-पिता से संपर्क किया. वे बेटी से मिलने पहुंचे और उसे देखकर फूट-फूट कर रोने लगे.

11 साल कैद की सजा

Los Angeles Times के मुताबिक, 11 फरवरी 2000 के दिन पुलिस ने साटो को गिरफ्तार किया. क्योंकि उससे पहले पुलिस ने उसे इलाज के लिए अस्पताल में रखा था. इसके बाद पुलिस ने साटो को सबूतों के साथ कोर्ट के सामने पेश किया. कोर्ट ने उसे सिर्फ 10 साल कैद की सजा सुनाई. क्योंकि वहां अपहरण करने के लिए सिर्फ 10 साल कैद की सजा का प्रावधान था. लेकिन जब लोगों को इतनी कम सजा का पता चला तो उनका गुस्सा फूट पड़ा.

उन्होंने साटो के खिलाफ उम्रकैद या फांसी की मांग की. लोगों का गुस्सा देख पुलिस ने उसके खिलाफ और भी गंभीर धाराएं लगाईं. इसके बाद उसकी सजा बढ़ाकर 14 साल कर दी, लेकिन साटो के वकीलों ने कुछ दलीलें कोर्ट के सामने रखीं जिसके बाद एक बार फिर साटो की सजा कम करके 11 साल कैद कर दी गई.

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