
गाजियाबाद के मुरादनगर में श्मशान से 25 लाशें यूं बाहर ना आतीं. महज चार महीने पहले जिस छत को श्मशान में आनेवाने दुखियारों का सिर छुपाने के इरादे से बनाया गया था, वही छत रविवार को अचानक भरभराकर ज़मींदोज़ हो गई और इसी के साथ ये छत यूं एक ही झटके में 25 ज़िंदगियां लील गई. हादसे के वक्त श्मशान की उसी छत के मलबे के नीचे दबे एक पीड़ित का ऑडियो सामने आया है. जिसमें वो अपने भाई से उसे बचाने की गुहार लगा रहा है. उसकी आवाज़ में मौत का खौफ साफ नजर आता है.
दरअसल, रविवार के दिन जब ये हादसा हुआ, तो वहां अंश नाम का एक नौजवान भी मौजूद था. वो छत के मलबे के नीचे दबा हुआ था. इसी दौरान किसी तरह से उस लड़के अपना मोबाइल फोन निकाला और अपने बड़े भाई को फोन किया. उसकी आवाज़ में खौफ था. पीछे से लोगों के चीखने की आवाज़े आ रही थीं.
अंश ने अपने भाई को फोरन करके कहा कि 'भैया श्मशान घाट की छत गिर गई है, बचाने आ जाओ." असल में जो लेंटर गिरा था अंश भी उसके नीचे ही दबा था. वहां लेंटर के नीचे एक बाइक खड़ी थी. लेंटर बाइक पर गिरा. उसके बाद अंश पर गिरा. जिससे अंश बेहोश हो गया था. जब उसे होश आया तो उसने खुद को दीवार के नीचे दबा पाया और उसके बगल में 2 बॉडी भी दबी हुई थीं.
अंश ने हिम्मत दिखाई. किसी तरह से अपना मोबाइल निकाला और सीधा अपने बड़े भाई को फोन किया. अंश ने भाई को बताया "भैया श्मशान घाट की छत गिर गई है. मैं दबा हूं, बचाने आ जाओ." इसके बाद अंश को मलबे से निकाल लिया गया. अंश सही सलामत है. लेकिन जिस बहादुरी से उसने उस हालात में भी अपने भाई को फोन किया, उसके लिए अंश की तारीफ हो रही है.
घटना के वक्त जब अंश ने भाई को फोन किया था. उस कॉल की रिकार्डिंग अब वायरल हो रही है. जिसमें अंश के अलावा और भी चीखने की आवाजें सुनाई दे रही हैं. इससे ज़्यादा बदकिस्मती की बात और क्या होगी, जिस श्मशान में आकर बड़े से बड़े दुनियादार को भी वैराग्य का भाव पैदा हो जाता है, भ्रष्टाचार ने उसी श्मशान में बने शेल्टर के खंभों पर भी अपनी जगह बना ली. और पहली बारिश में ही छत का लेंटर अचानक नीचे गिर गया.