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देवघर: जमीन धोखाधड़ी मामले में फंसी BJP सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी, 420 के तहत मुकदमा

रिपोर्ट के अनुसार ये डील देवघर के चर्चित ऐलोकेसी धाम से जुड़ी है. यहां पर एक कोठी खरीदी गई थी. इस मामले में उपायुक्त के कोर्ट ने फैसला सुनाया है. इस डील में ऑनलाइन इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से निबंधन हुआ था. सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी अनामिका गौतम इस कंपनी की प्रोपराइटर हैं. 

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (फाइल फोटो) बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (फाइल फोटो)
धनंजय भारती
  • देवघर,
  • 20 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 4:02 PM IST
  • बीजेपी सांसद की पत्नी प्रॉपर्टी डील में फंसी
  • 420 समेत कई धाराओं में मुकदमा
  • डीसी कोर्ट ने रद्द की डील, FIR दर्ज

झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की परेशानी बढ़ गई है. प्रॉपर्टी खरीद के एक मामले में उपायुक्त की अदालत ने उनकी पत्नी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है. इसके अलावा अदालत ने एक डील को भी रद्द कर दिया है.  

रिपोर्ट के अनुसार ये डील देवघर के चर्चित ऐलोकेसी धाम से जुड़ी है. यहां पर एक कोठी खरीदी गई थी. इस मामले में उपायुक्त के कोर्ट ने फैसला सुनाया है. इस डील में ऑनलाइन इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से निबंधन हुआ था. सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी अनामिका गौतम इस कंपनी की प्रोपराइटर हैं. 

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इस डील में आरोप लगा था कि ये रजिस्ट्री गलत तरीके से की गई है. इस मामले में देवघर के सब रजिस्ट्रार राहुल चौबे ने दर्ज कराया है. उपायुक्त के आदेश के बाद निशिकांत दुबे की पत्नी अनामिका गौतम समेत पांच लोगों पर धोखाधड़ी का मामला देवघर नगर थाना में दर्ज कराया गया है. 

केस में अनामिका गौतम के अलावा विक्रेता संजीव कुमार, कमल नारायण झा, पहचानकर्त्ता देवता पांडे और गवाह सुमित कुमार सिंह पर भी मामला दर्ज किया गया है. नगर थाना में इस संबंध में कांड संख्या 42/21 दर्ज किया गया है. केस में आरोपियों पर धारा 406, 420, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत मामला दर्ज किया गया है. 

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गौरतलब है कि इस मामले में देवघर डीसी की अदालत में केस चल रहा था. परिवाद संख्या 10/20-21 की सुनवाई के बाद रजिस्ट्री संख्या 770 दिनांक 29/08/2019 को कपटपूर्ण मानते हुए उपायुक्त ने निबंधन को रद्द करने का फैसला सुनाया है. इसके अलावा इस रजिस्ट्री के विक्रेता, क्रेता, पहचानकर्त्ता और गवाह पर एफआइआर दर्ज करने का आदेश भी दिया गया है. इस मामले में कोई अधिकारी या पक्ष-विपक्ष के वकील अभी कुछ भी बोलने से इनकार कर रहे हैं. 

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