Advertisement

हाथरस केस की जांच अब सीबीआई के हाथ, इन सवालों के जवाब तलाशने की चुनौती

अबतक हाथरस मामले की जांच एसआईटी कर रही थी. घटना का दिन यानी कि 14 सितंबर का सच जानने के लिए एसआईटी ने जब जांच शुरू की तो उसके निशाने पर थे पूरे 40 लोग. गांव के इन 40 लोगों से सवाल किए जा चुके हैं या किए जाने हैं.

यूपी के ACS अवनीश अवस्थी पीड़ित परिवार के साथ (फाइल फोटो) यूपी के ACS अवनीश अवस्थी पीड़ित परिवार के साथ (फाइल फोटो)
जितेंद्र बहादुर सिंह/कुमार अभिषेक
  • हाथरस,
  • 11 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 8:48 AM IST
  • सीबीआई ने शुरू की हाथरस केस की जांच
  • देश के सबसे बड़ी पेशेवर एजेंसी के हवाले केस
  • सवाल बरकरार, हाथरस की बेटी को किसने मारा?

बयानबाजी, दावे-प्रतिदावे और कई सनसनीखेज थ्योरी के बाद सीबीआई ने हाथरस केस को अपने हाथ में ले लिया है. इस घटना को लगभग 27 दिन हो चुके हैं, लेकिन ये सवाल अपने स्थान से टस से मस नहीं हुआ है कि हाथरस की बेटी को किसने मारा?

पहले हाथरस पुलिस, फिर एसआईटी और अब सीबीआई ने इस केस की तफ्तीश शुरू कर दी है और अब लोगों को उम्मीद बंधी है कि आपराधिक मामलों की जांच में निपुण सीबीआई ऐसे तथ्य, गवाह और सबूत लेकर आएगी, जिससे इस मामले में सब कुछ साफ हो जाएगा.  

Advertisement

अबतक इस मामले की जांच एसआईटी कर रही थी. घटना के दिन यानी 14 सितंबर का सच जानने के लिए एसआईटी ने जब जांच शुरू की तो उसके निशाने पर थे पूरे 40 लोग. गांव के इन 40 लोगों से सवाल किए जा चुके हैं या किए जाने हैं. ये 40 लोग वे हैं, जो 14 सितंबर को आसपास के खेतों में काम कर रहे थे, आरोपी और पीड़िता के घर वाले तो इनमें हैं ही. 

वहीं हाईकोर्ट भी इस केस में दखल दे चुका है. सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होने वाली है. सीबीआई और एसआईटी की जांच के बीच कुछ बुनियादी सवाल हैं जो हर किसी के जेहन में उठ रहे हैं. 

-सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर 14 सितंबर को खेत में लड़की को किसने मारा?
-लड़की ने पहले दिन वाले बयान में अपने साथ कथित बलात्कार की बात क्यों नहीं की?
-पीड़िता ने आखिरी बयान में बलात्कार की बात की लेकिन मेडिकल रिपोर्ट इसके विपरीत क्यों है?
-29 सितंबर को पीड़िता की मौत के बाद आनन-फानन में रात के अंधेरे में उसकी लाश क्यों जला दी गई?

Advertisement

ये कुछ ऐसे सवाल हैं, जिसके जवाब सीबीआई को इस केस से ढूंढ़ने होंगे. सीबीआई को एसआईटी की अब तक की पड़ताल से मदद भी मिलेगी. लेकिन एक बड़ा पेच ये भी है कि पीड़िता के परिवार को सीबीआई जांच पर भरोसा ही नहीं है. पीड़ित परिवार बार-बार कह रहा है कि उन्हें सिर्फ और सिर्फ न्यायिक जांच पर ही भरोसा है. 

हाथरस केस में पीड़ित परिवार शुरू से कह रहा था कि उसे पुलिस और एसआईटी पर भरोसा नहीं है. उसके बाद योगी सरकार ने सीबीआई जांच की अनुशंसा की थी, सीबीआई जांच के लिए हरी झंडी मिलते ही केंद्रीय एजेंसी ने जांच का जिम्मा संभाल लिया. 

पीड़ित परिवार की शंकाओं के बीच सीबीआई की चुनौतियां बढ़ गई हैं. हाथरस कांड के जरिए दंगे फैलाने तक के आरोप सामने आ रहे हैं. इस मामले में कथित तौर पर पीएफआई की भूमिका सामने आई है. दावा किया जा रहा है कि पीएफआई के कुछ सदस्यों की गिरफ्तारी भी हुई है. 

अब सीबीआई को चश्मदीदों से लेकर फॉरेंसिक जांच जैसे सबूतों के आधार पर सच तक पहुंचना होगा. काम आसान नहीं है लेकिन देश की सबसे पेशेवर जांच एजेंसी इस केस के तह तक पहुंचेगी इसका यकीन किया जा सकता है.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement