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आसाराम बापू के बेटे ने वापस ली जमानत याचिका, हाई कोर्ट में नारायण साईं ने बताई ये वजह

रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे नारायण साईं ने अपने कथित बीमार पिता आसाराम से मिलने के लिए दायर की गई जमानत याचिका वापस ले ली है. इससे पहले उनकी फरलो पर भी सुप्रीम कोर्ट रोक लगा चुका है. साल 2021 में उनको गुजरात हाईकोर्ट ने 14 दिन की फरलो पर रिहा करने का आदेश दिया था, लेकिन इस पर रोक लगा दी गई थी.

स्वयंभू संत आसाराम बापू के बेटे नारायण साईं ने गुजरात हाईकोर्ट में अपनी याचिका वापस ले ली है. स्वयंभू संत आसाराम बापू के बेटे नारायण साईं ने गुजरात हाईकोर्ट में अपनी याचिका वापस ले ली है.
aajtak.in
  • अहमदाबाद,
  • 20 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 6:17 PM IST

जेल में बंद स्वयंभू संत आसाराम बापू के बेटे नारायण साईं ने मंगलवार को गुजरात हाई कोर्ट में अपनी जमानत याचिका वापस ले ली है. नारायण बलात्कार के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं. वो अपने बीमार पिता से मिलने और उनकी देखभाल करने के लिए 20 दिन की अस्थाई जमानत चाह रहे थे. उनका कहना था कि उनके पिता अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर हैं. पिछले महीने कोर्ट इस याचिका को खारिज करते हुए पेश किए गए सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराने के लिए कहा था. 

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न्यायमूर्ति एएस सुपेहिया और न्यायमूर्ति विमल व्यास की खंडपीठ को नारायण साईं के वकील आईएच सैयद ने बताया कि उनके पिता आसाराम बापू को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. वो राजस्थान की जोधपुर जेल में वापस आ गए हैं, जहां वह आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं. यही वजह है कि उनके मुवक्किल ने जमानत याचिका वापस लेने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि नारायण सूरत जेल में बंद हैं. यदि उनके पिता से मिलने की अनुमति दी जाती है, तो वो जोधपुर आने-जाने के लिए पुलिस एस्कॉर्ट का खर्च वहन करेंगे.

वकील आईएच सैयद ने हाई कोर्ट में एक मेडिकल रिपोर्ट भी पेश किया, जिसमें दिखाया गया कि आसाराम को जोधपुर जेल में कार्डियक अरेस्ट हुआ था. खंडपीठ ने राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा पारित एक हालिया आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि आसाराम दिल्ली एम्स में इलाज कराने के इच्छुक नहीं थे. वो केवल आयुर्वेदिक इलाज चाहते थे. कोर्ट ने कहा कि वह जमानत याचिका पर फैसला करने से पहले एम्स के डॉक्टरों के एक पैनल की राय मांगेगी. इसके बाद ही आसाराम से मिलने की अनुमति देगी.

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हाई कोर्ट ने नारायण साईं से कहा कि यदि वो आसाराम बापू को इलाज के लिए मनाना चाहते हैं तो जूम मीटिंग की व्यवस्था की जा सकती है. हालांकि, इससे पहले यह पता लगाना होगा कि क्या आसाराम आईसीयू में हैं और बातचीत करने की स्थिति में हैं. इसके बाद ही इस तरह की अनुमति दी जा सकती है. इसके बाद कोर्ट को सूचित किया गया कि आसाराम अब अस्पताल में नहीं हैं और उनकी बीमारी का इलाज जेल में ही किया जा रहा है. इसके बाद कोर्ट ने कहा ऐसे में उनको जमानत दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है.

यह भी पढ़ें: 'आसाराम, राम रहीम जैसे धर्म गुरुओं को जेल भेज दिया, हिम्मत है तो...', बोले देवकीनंदन ठाकुर

बताते चलें कि साल 2013 में सूरत की दो बहनों ने आरोप लगाया था कि आसाराम और नारायण साईं ने उनके साथ रेप किया है. दोनों बहनों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि साल 2002 और 2005 में बाप और बेटे ने उनको कई बार अपनी हवस का शिकार बनाया. दोनों बहनें आसाराम के आश्रम में साधक बनकर रह रही थीं. इस दौरान आसाराम और नारायण की पत्नियां ही उन्हें उनके पास ले जाया करती थी. इसके बाद दोनों बाप-बेटे उन्हें अपनी हवस का शिकार बनाते थे. 

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रेप पीड़िताओं ने बताया था कि नारायण साईं उनको कई जगहों पर ले जाकर शारीरिक शोषण किया था. यहां तक कि अप्राकृतिक संबंध भी बनाया करता था. वो अक्सर ऐसा कई लड़कियों के साथ करता था. उसने कई लड़कियों से जिस्मानी रिश्ते बनाए थे. जब लड़कियों ने उसके खिलाफ रेप की शिकायत की तो वो कहता कि उनसे बहुत प्यार करता है. इतना ही नहीं उन्हें लव लेटर लिखकर अपने प्यार का इजहार भी किया करता था. दिल्ली पुलिस ने उसको दिसंबर 2013 में गिरफ्तार किया था.

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