
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए डॉक्टर रेप-मर्डर केस की सुनवाई की है. सुप्रीम कोर्ट ने विकिपीडिया सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पीड़िता की तस्वीरों और वीडियो के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने आईटी मंत्रालय को इसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है. पीड़िता के माता-पिता ने कहा कि पीड़िता का वीडियो को सोशल मीडिया पर एआई का उपयोग करके अपलोड किया जा रहा है.
सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि ऐसे सभी पोस्ट, तस्वीरों और वीडियो को हटाने के लिए सोशल मीडिया पर निगरानी रखने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा. मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की है. उन्होंने 17 सितंबर को कहा था कि वो इस मामले में सीबीआई की स्टेट्स रिपोर्ट में दिए गए निष्कर्षों से परेशान हैं, लेकिन विवरण बताने से इनकार कर दिया था.
कोर्ट ने कहा- हमने रिपोर्ट देखी, जांच में मिले अहम सुराग
सोमवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ''हमने रिपोर्ट देखी है. कुछ अहम सुराग मिले हैं. सीबीआई जांच जारी रहेगी. पहले बलात्कार और हत्या के मामले में और दूसरे वित्तीय अनियमितताओं के मामले में. चोट के निशानों से पता चलता है कि पीड़िता ने वारदात के वक्त चश्मा पहना हुआ था. यदि उस पर सोते समय हमला हुआ, तो फिर उसने चश्मा कैसे पहना हुआ था?'' इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हो सकता है कि उसने थकान की वजह से चश्मा न निकाला हो.''
केस से जुड़े लोगों पर कार्रवाही करने का SC ने दिया आदेश
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ''सीबीआई ने 30 सितंबर को चौथी स्टेट्स रिपोर्ट पेश की है. इसमें जांच में उठाए गए कदमों और सुरागों का ब्यौरा दिया गया है. सीबीआई रेप-मर्डर केस के साथ वित्तीय अनियमितताओं की जांच भी कर रही है. इन दोनों के बीच क्या संबंध है, ये सीबीआई द्वारा जांच का विषय है. इस केस से जुड़े कई लोग अपने पदों पर बने हुए हैं. ऐसे लोगों को या तो निलंबित किया जाना चाहिए या छुट्टी पर जाने का निर्देश दिया जाना चाहिए.''
बंगाल सरकार को 15 अक्टूबर तक काम पूरा करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार सीसीटीवी लगाने, शौचालय और अलग रेस्ट रूम बनाने का काम बहुत धीरे कर रही है. कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को 15 अक्टूबर तक काम को पूरा करने का निर्देश दिया है. पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टर इनपेशेंट डिपार्टमेंट और आउटपेशेंट डिपार्टमेंट का काम नहीं कर रहे हैं. रेजिडेंट डॉक्टरों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि वे सभी आवश्यक और आपातकालीन सेवाएं कर रहे हैं.
खामोशी से बहुत देर तक स्टेट्स रिपोर्ट बढ़ते रहे न्यायाधीश
पिछली सुनवाई में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेट्स रिपोर्ट दाखिली की थी. उस वक्त मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्र बहुत गंभीरता और खामोशी के साथ स्टेट्स रिपोर्ट पढ़ते रहे थे. स्टेट्स रिपोर्ट गोपनीय है, जिसमें कोलकाता की जूनियर डॉक्टर के क़त्ल और रेप या गैंगरेप का शुरुआती सच लिखा था. इस रिपोर्ट में सीबीआई ने अब तक अपनी जांच की पूरी रिपोर्ट लिखी थी. कोर्ट की कार्रवाई खत्म होने से पहले सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपील की कि इस स्टेट्स रिपोर्ट को वापस लिफाफे में सील कर कोर्ट अपनी कस्टडी में रख लिया जाए.