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Lacey Fletcher: 12 साल तक सोफे से चिपकी रही लड़की, लाश देखकर पुलिस की भी कांप गई रूह

क्या कोई अपनी ही बच्चे की हत्या कर सकता है? वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वह कोई गंभीर बीमारी से पीड़ित है. लेकिन 2022 में अमेरिका (America) के लुसियाना में पुलिस ने ऐसे ही दंपति को गिरफ्तार किया जिसने अपनी ही बेटी को धीरे-धीरे करके मौत के घाट उतार दिया. जब पुलिस को लड़की की लाश मिली तो उनके भी रोंगटे खड़े हो गए. क्योंकि उसकी हालत दंपति ने ऐसी कर दी थी कि किसी की भी रूह कांप जाए.

सोफे से चिपकी हुई थी लेसी फ्लेचर की लाश. सोफे से चिपकी हुई थी लेसी फ्लेचर की लाश.
तन्वी गुप्ता
  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 11:35 AM IST

तारीख, 3 जनवरी 2022... जगह अमेरिका का लुसियाना स्टेट (Louisiana, America) ... यहां एक छोटे सा कस्बा है जिसका नाम स्लॉटर (Slauter) है. जहां सिर्फ 900 के करीब लोग रहते हैं. यहां रहने वाली 64 वर्षीय शीला फ्लेचर (Sheila Fletcher) नामक महिला ने इस दिन पुलिस को फोन किया और रोते हुए बताया कि उसकी बेटी लेसी फ्लेचर (Lacey Fletcher) की मौत हो गई है. उसने बताया कि मैं और मेरे पति (Clay Fletcher) कहीं घूमने गए थे. लेकिन जब लौटे तो घर में हमें हमारी 36 साल की बेटी लेसी की लाश (Dead Body) मिली.

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सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. फिर शीला और क्ले पुलिस को घर के अंदर लेकर गए. जब पुलिस ने कमरे में देखा तो उनके होश उड़ गए. क्योंकि कमरे से बहुत ही तेज बदबू आ रही थी और वहीं सोफे पर एक लाश पड़ी थी, जो कि लेसी की थी. पुलिस हैरान इसलिए थी क्योंकि लाश ही हालत ही कुछ ऐसी थी कि किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं. वो लाश सोफे से ऐसे चिपकी हुई थी जैसे वह सोफे का ही एक हिस्सा हो. लाश बिल्कुल गल चुकी थी, जिससे सोफे में लाश का आधा हिस्सा धंस गया था.

यही नहीं, लाश के ऊपर कई कीड़े भी रेंग रहे थे. उसे देखकर ऐसा लग रहा था मानो वह लाश कई समय से ऐसे ही सोफे पर पड़ी हुई है. लाश के शरीर पर लाल रंग के कई निशान थे जिससे लग रहा था जैसे उसे कोई गंभीर बीमारी हुई हो. लाश की ऐसी हालत देखकर पुलिस वालों को भी उल्टी आने लग पड़ी. फिर भी उन्होंने हिम्मत जुटाई और लाश को जैसे तैसे बाहर निकाला. जब उसका वजन किया गया तो वह सिर्फ 27 किलोग्राम निकला.

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12 सालों से सोफे पर थी लेसी
इसके बाद लाश का पोस्टमार्टम करवाया गया, जिसमें पता चला कि लेसी की मौत भुखमरी और अल्सर के बाद सेप्सिस नामक गंभीर बीमारी के कारण हुई है. जब लेसी के माता-पिता से इसे लेकर पूछताछ की गई तो उन्होंने बेहद चौंकाने वाली बात पुलिस को बताई. उन्होंने बताया कि उनकी बेटी पिछले 12 सालों से ऐसे ही सोफे पर पड़ी हुई थी. दंपति ने बताया कि उन्हें याद भी नहीं है कि अंतिम बार उन्होंने लेसी को हिलते-डुलते कब देखा था. उसके शरीर में कुछ हिलता था तो वह थी उसकी आंखें. वो बोल भी नहीं पाती थी. बस आंखों के इशारों से बताती थी कि उसे क्या चाहिए. वह सोफे पर ही मल-मूत्र करती थी.

गंभीर बीमारी से पीड़ित थी लेसी
दंपति ने बताया कि उनकी बेटी एक अजीब बीमारी से ग्रसित थी, जिसे लॉक्ड-इन सिंड्रोम (Locked-in syndrome) कहते हैं. ये ऐसी रेयर बीमारी है जिसके अंदर व्यक्ति की लगभग सारी मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं सिर्फ आंखों की मांसपेशियों को छोड़कर. इसमें व्यक्ति का शरीर एक जिंदा लाश जैसा बनकर रह जाता है. अब यहां पुलिस को साफ हो गया था कि लेसी की अगर हत्या हुई भी है तो इसमें बाहर वाले किसी भी इंसान का हाथ नहीं हो सकता. क्योंकि वह तो पिछले 12 सालों से घर के अंदर ही पड़ी थी. उसका बाहर के लोगों के साथ कोई कॉन्टेक्ट था ही नहीं.

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माता-पिता पर हुआ हत्या का शक
फिर पुलिस को सीधे क्ले और शीला पर ही लेसी की हत्या का शक हुआ. उन्होंने दंपति को सामने बैठाकर पूछताछ शुरू की. उन्होंने बताया कि 12 साल पहले जब हमें पता चला कि लेसी लॉक्ड-इन सिंड्रोम से पीड़ित है तो हमने उसका इलाज करवाने की कोशिश की. लेकिन जब कोशिश कामयाब नहीं हुई तो हम लेसी को घर ले आए. फिर हमने उसे इसी सोफे पर रख दिया. हम उसका घर पर ही ध्यान रखने लगे. उसे जो कुछ भी चाहिए होता था हम उसे यहीं लाकर दे देते थे.

दंपति ने दी पुलिस को सफाई
उन्होंने बताया कि लेसी सोशल एंजाइटी से भी पीड़ित हो चुकी थी. वह किसी से भी बात नहीं करती. वह सिर्फ अकेले रहना चाहती थी. हमने कई बार उसे कहा कि तुम्हें बाहर घुमाकर लाते हैं, लेकिन वो मना कर देती. इसलिए हम उसे कभी बाहर लेकर नहीं गए. घर में भी वह किसी से भी मिलना नहीं चाहती थी. इसलिए सिर्फ हम दोनों ही उसके साथ रहते थे. बाकी किसी को भी उससे मिलने नहीं देते. लेसी के माता-पिता ने बताया कि उसने कभी भी उन्हें यह शिकायत नहीं की कि उसे शरीर में कोई दिक्कत हो रही है. अगर वो ऐसा बताती तो हम उसे जरूर डॉक्टर के पास लेकर जाते. पुलिस इसके बाद दोनों को उनके घर लेकर गई. वहां भी उनसे सवाल किए. लेकिन उन्हें हैरानी इस बात को लेकर थी कि दंपति को जैसे उनकी बेटी की मौत से कोई फर्क ही नहीं पड़ा है. दोनों बहुत ही नॉर्मल व्यवहार कर रहे थे. उनकी आंखों में जरा भी दुख नहीं दिखाई दे रहा था.

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शीला फ्लेचर

पुलिस ने किया माता-पिता को गिरफ्तार
फिर दिन आया 22 अप्रैल 2022 का. Daily Mail के मुताबिक, इस दिन पुलिस ने शीला और क्ले को अपनी ही बेटी के मर्डर के लिए गिरफ्तार कर लिया. जैसे ही दोनों की गिरफ्तारी हुई यह खबर पूरे शहर में फैल गई. क्योंकि यह फैमिली काफी प्रतिष्ठित मानी जाती थी. शीला तो एक पॉलिटिकल पार्टी से भी जुड़ी हुई थी. वह केयर चैरिटी से भी जुड़ी हुई थी. सवाल ये भी खड़ा हो रहा था कि अगर वो खुद एक केयर चैरिटी से जुड़ी हुई थी तो उसने अपनी बेटी को वहां क्यों नहीं रखवाया? वहीं, उसके पिता भी न जाने कितनी एनजीओ के लिए काम करते थे. फिर भी उन्होंने खुद की बेटी का जरा भी ध्यान नहीं रखा. सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो ये थी कि उनके आस-पास रहने वाले अधिकतर लोगों को तो ये भी नहीं पता था कि दंपति की कोई बेटी भी है.

क्ले फ्लेचर

एक और लापरवाही आई सामने
उनकी एक और लापरवाही भी यहां सामने आई. पुलिस को जांच में पता चला कि साल 2010 में दंपति ने एक डॉक्टर से पूछा भी था कि क्या हम लेसी को सोफे से हटाकर कहीं और रख सकते हैं? तो डॉक्टर ने उन्हें कहा कि आप उसे क्लिनिक लेकर आइये हम उसका इलाज करेंगे. लेकिन दंपति ने ऐसा कुछ नहीं किया. उन्होंने उसे सोफे में ही पड़े रहने दिया. फिर मई 2022 में कोर्ट में यह साबित हो गया कि लेसी का मर्डर उसके ही माता-पिता ने किया है. वो भी बेहद शातिराना तरीके से. उन्होंने धीरे-धीरे करके लेसी को मारा है. ताकि उन पर हत्या का आरोप न लग सके.

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19 जून को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने दंपति के ऊपर सेकंड डिग्री मर्डर के चार्ज लगाए हैं. फिलहाल इस केस का ट्रायल अभी चल रहा है. दंपति, 3-3 लाख डॉलर की जमानत पर बाहर हैं. ईस्ट फेलिसियाना पैरिश डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी सैम डी'अक्विला के मुताबिक, कोर्ट में केस की अगली सुनवाई पहले 6 फरवरी 2023 को होनी थी. लेकिन अब अगली सुनवाई 19 जून 2023 को होगी. उन्होंने बताया कि मुकदमे से पहले लीगल डिस्कशन के लिए दंपति को 22 फरवरी, 2023 को अदालत में पेश होना होगा.

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