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कोलकाता कांड: 9 फरवरी को सड़क पर उतरेंगे पीड़िता के माता-पिता, लोगों से की ये भावुक अपील

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हत्या और बलात्कार की शिकार हुई महिला डॉक्टर के माता-पिता ने 9 फरवरी को इंसाफ की मांग को लेकर सड़क पर उतरने का ऐलान किया है. उस दिन पीड़िता का 32वां जन्मदिन है. इस मौके पर उन्होंने लोगों से साथ देने की अपील की है.

महिला डॉक्टर के माता-पिता ने 9 फरवरी को इंसाफ की मांग को लेकर सड़क पर उतरने का ऐलान किया. महिला डॉक्टर के माता-पिता ने 9 फरवरी को इंसाफ की मांग को लेकर सड़क पर उतरने का ऐलान किया.
aajtak.in
  • कोलकाता ,
  • 05 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 8:34 PM IST

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हत्या और बलात्कार की शिकार हुई महिला डॉक्टर के माता-पिता ने 9 फरवरी को इंसाफ की मांग को लेकर सड़क पर उतरने का ऐलान किया है. उस दिन पीड़िता का 32वां जन्मदिन है. इस मौके पर उन्होंने लोगों से साथ देने की अपील की है. उनका कहना है कि वे तब तक लड़ते रहेंगे, जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिल जाता.

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एक वीडियो मैसेज में उन्होंने कहा, "पिछले छह महीनों से हम अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं. हम उस दुर्भाग्यपूर्ण बेटी के माता-पिता हैं, जिसके सपने चकनाचूर हो गए. उसने कड़ी मेहनत से जो कुछ भी हासिल किया था, वो सबकुछ बर्बाद हो गया. 9 फरवरी को वो 32 साल की हो जाती. उस दिन हम अपनी बेटी के लिए न्याय में देरी के विरोध में सड़कों पर उतरने वाले हैं." 

पीड़िता के माता-पिता ने उन सभी लोगों को भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने पिछले साल 9 अगस्त को हुई घटना के बाद से उनका समर्थन किया. मां ने कहा, "जब वह एमबीबीएस कर रही थी, तब उसका जन्मदिन मेडिकल कॉलेज में मनाया जाता था. पीजी होने के बाद उसका जन्मदिन उसके नर्सिंग होम और चैंबर में मनाया जाता था. उसने आखिरी जन्मदिन आरजी कर मेडिकल कॉलेज में मनाया था." 

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उन्होंने कहा कि इस साल हमारी बेटी हमारे साथ नहीं है. हम सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में काम करने वालों से अनुरोध करेंगे कि वे हमारी बेटी के लिए न्याय में देरी के विरोध में दीये जलाएं. उनकी बेटी को फूल बहुत पसंद थे, इसलिए लोग अपने घरों और कार्यस्थलों पर एक फूल का पौधा जरूर लगाएं. कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मामले की जांच सीबीआई कर रही है.

बताते चलें कि इस केस में दोषी ठहराए गए संजय रॉय को उम्रकैद की सजा मिली है. इस पर पीड़िता के माता-पिता ने निराशा जताई थी. उन्होंने कहा था कि वे दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं. उनका दावा था कि इस जघन्य कांड की जांच आधे-अधूरे मन से की गई है. इस अपराध में शामिल कई दोषियों को बचाया गया है. वे इंसाफ की मांग करते हैं. 

पीड़िता की मां ने कहा था, "हम स्तब्ध हैं. यह दुर्लभतम से दुर्लभतम मामला कैसे नहीं है? ड्यूटी पर मौजूद एक डॉक्टर के साथ बलात्कार किया गया. उसकी हत्या कर दी गई. हम निराश हैं. इस अपराध के पीछे एक बड़ी साजिश थी." संजय रॉय के लिए सजा का ऐलान करते वक्त अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिरबन दास ने कहा था कि ये रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस की श्रेणी में नहीं आता है.

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फैसले के बाद पीड़िता के पिता ने कहा था कि वे तब तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे जब तक कि अन्य सभी दोषियों को सजा नहीं मिल जाती. उन्होंने मुआवजा लेने से भी इनकार कर दिया था. कोर्ट ने राज्य सरकार को 17 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया था. जज ने कहा, ''पीड़िता की मौत अस्पताल में ड्यूटी के दौरान हुई. वो उसका कार्यस्थल था. उसके परिवार को मुआवजा मिलना चाहिए.'' 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि यदि इस मामले को पुलिस ने संभाला होता, तो मौत की सजा सुनिश्चित होती. उन्होंने कहा था, "हमने मौत की सजा मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने उम्रकैद की सजा दे दी है.'' सियालदह कोर्ट ने संजय रॉय को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके साथ ही 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था. फिलहाल फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है.

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