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एक्सटॉर्शन, हवाला और क्राइम सिंडिकेट...ठीक दाऊद की तरह अपना गैंग खड़ा कर रहे हैं लॉरेंस और गोल्डी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA ने कुख्यात गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई, कनाडा और इंडिया से वांटेड गोल्डी बराड़ समेत कई कुख्यात गैंगस्टर्स के खिलाफ गैंगस्टर टेरर केस में चार्जशीट दाखिल की है. इस चार्जशीट में कई अहम खुलासे हुए हैं.

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़
अरविंद ओझा
  • नई दिल्ली,
  • 26 जून 2023,
  • अपडेटेड 10:22 AM IST

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि लारेंस बिश्नोई और उसका टेरर सिंडिकेट अभूतपूर्व तरीके से फैला हुआ है. यह ठीक उसी तरह काम कर रहा है, जैसा 90 के दशक में दाऊद इब्राहिम ने छोटे मोटे अपराध करते हुए अपना नेटवर्क खड़ा किया था. तब दाऊद ने ड्रग की तस्करी, टारगेट किलिंग, एक्सटॉर्शन रैकेट के जरिए D कंपनी बनाई और फिर पाकिस्तानी आतंकियों से गठजोड़ बनाकर अपना नेटवर्क फैलाया.

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दाऊद की तरह कर रहे हैं ऑपरेट

दाऊद इब्राहिम और D कंपनी की तरह ही बिश्नोई गैंग ने भी छोटे मोटे अपराध से अपनी शुरुआत की, फिर खुद का अपना गैंग खड़ा किया और नॉर्थ इंडिया में बिश्नोई गैंग का कब्जा हो चुका है. कनाडा पुलिस और भारतीय सुरक्षा एजेसियों की वांटेट लिस्ट में शामिल सतविंदर सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ के जरिए बिश्नोई गैंग ऑपरेट हो रहा है.

इस तरह करते हैं शूटरों की भर्ती

सोशल मीडिया और तमाम अलग अलग तरीके से नौजवानों को गैंग में रिक्रूट किया जाता है. आज बिश्नोई गैंग में 700 से ज्यादा शूटर हैं जिसमें 300 पंजाब से जुड़े हैं. सोशल मीडिया प्लेटफार्म, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब के जरिए बिश्नोई और गोल्डी बराड़ की फोटो डाली गई. बिश्नोई का कोर्ट लाते जाने का फोटो डाला गया और इस तरह गैंग का प्रचार प्रसार किया गया. इसके अलावा, नौजवानों को कनाडा या उनकी मनचाही कंट्री में शिफ्ट करवाने का लालच देकर गैंग में भर्ती करवाया जाता है. 

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उगाही कर विदेश भेजे करोड़ों

गैंग का स्लोगन है 'जय बलकारी'. बिश्नोई गैंग ने साल 2020-21 तक करोड़ों रुपए एक्सटोर्शन के जरिए कमाए और वो पैसा हवाला के जरिए विदेशों में भेजा गया. एनआईए के मुताबिक, कभी बिश्नोई का गैंग सिर्फ पंजाब तक सीमित था लेकिन उसने (लॉरेंस) अपने शातिर दिमाग और अपने करीबी गोल्डी बराड़ के साथ मिलकर हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के गैंग से गठजोड़ किया और गैंग का विस्तार किया.  बिश्नोई गैंग अब पूरे नॉर्थ इंडिया में, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान और झारखंड में फैल चुका है.

NIA के मुताबिक पाकिस्तान में बैठा खालिस्तानी आतंकी हरविंदर सिंह रिंदा बिश्नोई गैंग के शूटर का इस्तेमाल पंजाब में टारगेट किलिंग और अपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिलवाने में करता है. UAPA के तहत अदालत में NIA ने कुछ दिनों पहले लारेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ समेत कुल 16 गैंगस्टर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी.

शातिराना तरीके से चलाते हैं गिरोह

लॉरेंस इस क्राइम कंपनी में मास्टर ब्रेन है तो गोल्डी बराड़ कंपनी की रीढ़ की हड्डी है. लारेंस का भांजा सचिन बिश्नोई कंपनी का भर्ती सेल और टारगेट प्लान का प्रमुख है, जो इस वक्त फरार है. जबकि ऑस्ट्रिया से अनमोल और कनाडा से विक्रम बराड़ कंपनी की फाइनेंस डील को संभालते हैं. इस क्राइम कंपनी में हर टारगेट  से जुड़ा शख्स केवल अपने आगे वाले एक शख्स को जानता है. इसके अलावा एक ऑपरेशन में जितने भी बंदे गैंग से जुड़े होते हैं, उन्हें बाकी गैंग मेम्बर के बारे  में कोई भी जानकारी नहीं रहती.  

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कौन है लॉरेंस

लॉरेंस बिश्नोई का जन्म 22 फरवरी 1992 को पंजाब के शहर फजिल्लका में हुआ था. उसके पिता लाविंदर सिंह पुलिस कांस्टेबल थे और मां एक पढ़ी-लिखी गृहणी हैं. कहा जाता है कि पैदा होने पर उसका रंग दूध की तरह सफेद था, लिहाजा उसे एक क्रिश्चियन नाम “लॉरेंस” दिया गया जिसका मतलब होता है सफेद चमकने वाला. उसने स्कूल की पढ़ाई फज्जिलका में की. इसके बाद, कॉलेज की पढ़ाई करने चंडीगढ़ गया जहां डीएवी कॉलेज में उसने दाखिला लिया. यहीं से जुर्म की दुनिया में भी उसकी एंट्री हुई. लॉरेंस ने यूनिवर्सिटी इलेक्शन में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा लेकिन चुनाव में उसकी हार हुई. इस दौरान कॉलेज यूनियन के दो गुटों में लड़ाई हुई, गुस्से में उसने रिवॉल्वर खरीद ली और उसने जीतने वाले छात्र पर फायरिंग की जो क्राइम वर्ल्ड में उसकी एंट्री साबित हुई. 

लॉरेंस बिश्नोई ने गैंगस्टर नरेश शेट्टी, संपत नेहरा और मर चुके सुक्खा से मिलकर हथियार के दम पर उगाही करने का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क तैयार किया. उसके नेटवर्क में आकर काला जठेड़ी, रिवॉल्वर रानी के नाम से चर्चित लेडी डॉन अनुराधा चौधरी समेत कई गैंगस्टर ने भी जुर्म की दुनिया में साम्राज्य खड़ा कर लिया. सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में भी लॉरेंस मुख्य आरोपी है.

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कौन है गोल्डी बराड़

गोल्डी बराड़ पंजाब के श्रीमुक्तसर साहिब के रहने वाला है. उसका असली नाम सतविंदर सिंह है. उसका जन्म 1994 में पंजाब पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर शमशेर सिंह के घर में हुआ था. क्राइम की दुनिया में गोल्डी की एंट्री थोड़ी फिल्मी नजर आती है. दरअसल, उसके चचेरे भाई गुरलाल सिंह बराड़ की हत्या कर दी गई थी. उस हत्याकांड के बाद गोल्डी बदले की आग में जल रहा था. जैसे ही इस हत्याकांड में यूथ कांग्रेस के नेता गुरलाल पहलवान का नाम सामने आया तो गोल्डी बराड़ ने उसकी हत्या कर दी थी. यही वो वारदात थी, जिसने गोल्डी को मुजरिम बना दिया था.

गोल्डी दिल्ली के गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का करीबी माना जाता है. वो कनाडा में बैठकर ही लॉरेंस का गैंग चलाता है. पंजाब के फरीदकोट जिले की एक अदालत ने गुरलाल सिंह की हत्या के मामले में गोल्डी बराड़ के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. केवल यही नहीं, पुलिस और भारतीय एजेंसियों को 16 से ज्यादा मामलों में गोल्डी बराड़ की तलाश है. इंटरपोल ने भी गोल्डी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था. 

वो गोल्डी बराड़ ही था, जिसने कनाडा में बैठकर सिद्धू मूसेवाला की हत्या की साजिश रची थी. इस मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से भी पूछताछ की गई थी. गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई दोनों कॉलेज के समय से ही साथ में हैं.

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