Advertisement

Lucknow: उलझे रिश्तों और साजिश का शिकार हो गई महिला सिपाही, तहसीलदार से इश्क का खूनी हुआ अंजाम

डीजीपी मुख्यालय में तैनात महिला कांस्टेबल रुचि चौहान की हत्या उलझे रिश्तों और साजिश का नतीजा थी. फेसबुक के जरिए तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव के संपर्क में आई रुचि कैसे साजिश का हो गई शिकार? आइए जानते हैं

महिला सिपाही रुचि और गिरफ्तार तहसीलदार पति-पत्नी महिला सिपाही रुचि और गिरफ्तार तहसीलदार पति-पत्नी
संतोष शर्मा
  • लखनऊ,
  • 22 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 1:35 PM IST
  • महिला सिपाही की हो गई थी हत्या
  • तहसीलदार, पत्नी और एक आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ पुलिस ने डीजीपी मुख्यालय में तैनात महिला कांस्टेबल की हत्या में शामिल प्रतापगढ़ के तहसीलदार, उसकी पत्नी और दोस्त को गिरफ्तार कर हत्या से पर्दा उठा दिया, लेकिन महिला सिपाही की हत्या उलझे रिश्तों और साजिश का नतीजा थी. साजिश में भले ही जान महिला सिपाही ने गंवाई हो लेकिन शिकार इस हत्याकांड में शामिल आरोपी भी थे.

लखनऊ पुलिस ने डीजीपी मुख्यालय के अनुभाग 3 में संबद्ध महिला कांस्टेबल रुचि चौहान की हत्या में शामिल प्रतापगढ़ के तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव, उनकी पत्नी प्रगति श्रीवास्तव और करीबी दोस्त नामवर सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. महिला सिपाही रुचि चौहान की हत्या के आरोप में गिरफ्तार तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव से पूछताछ की गई.

Advertisement

फेसबुक के जरिए तहसीलदार से हुआ था परिचय

पुलिस को जांच में मिले सुबूत और असंद्रा थाने में तैनाती के दौरान सामने आई जानकारियां इस ओर इशारा कर रही थी कि रुचि भले ही सिपाही थी लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे. पुलिस की नौकरी में आने के बाद रुचि ने अपने साथी सिपाही से शादी की, लेकिन बाराबंकी में तैनाती के दौरान फेसबुक के जरिए तहसीलदार पद्मेश से परिचय हुआ.

जमीन विवाद ने बढ़ाई थी करीबी

फिर अपने एक करीबी के प्रतापगढ़ में जमीनी विवाद में ली गई पद्मेश श्रीवास्तव से मदद के बाद दोनों के बीच मुलाकात का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ कि रुचि चौहान ने अपने सिपाही पति को छोड़कर तहसीलदार को अपना पति बनाने का सपना संजो लिया और इस सपने को पूरा करने के लिए उसने सिपाही पति से छुटकारा पाने के लिए तलाक तक फाइल कर दिया.

Advertisement

रुचि से लखनऊ मिलने आते थे तहसीलदार

कोर्ट में तलाक के मुकदमे का फैसला भी इसी महीने आने वाला था. यही वजह थी कि शादीशुदा तहसीलदार को अपना पति बनाने के लिए रुचि ने दबाव बनाना शुरू कर दिया था. फेसबुक के जरिए अपने से कम उम्र की लड़की से दोस्ती में पद्मेश भी ऐसे डूबे कि पत्नी प्रगति को इलाहाबाद में छोड़कर रुचि से मिलने लखनऊ आने लगे.

डीजीपी मुख्यालय में संबद्धता भी तहसीलदार ने करवाई!

चर्चा है कि रुचि की डीजीपी मुख्यालय में संबद्धता भी पद्मेश ने ही करवाई थी. वजह प्रतापगढ़ से बाराबंकी जाकर मुलाकात करने में वक्त ज्यादा लगता था और थाने की ड्यूटी में छुट्टी भी नहीं मिल पाती थी. ऐसे में लखनऊ में पुलिस मुख्यालय में संबद्धता होने से शनिवार और रविवार को अमूमन छुट्टी मिल जाने से मुलाकातों का सिलसिला भी आसान था.

साजिश का शिकार भी हो गया नामवर सिंह

लखनऊ में तबादले के बाद रुचि किराए के सुलभ अपार्टमेंट में रहती थी. कहा जाता है कि यह अपार्टमेंट भी तहसीलदार ने ही दिलवाया था. अभी इस अपार्टमेंट के असल मालिक की तलाश बाकी है. इस हत्याकांड में पति-पत्नी के अलावा तीसरा आरोपी नामवर सिंह भी साजिश में शामिल था, लेकिन साजिश का शिकार भी था.

Advertisement

नामवर सिंह को फंसाने की थी साजिश

रुचि चौहान के बार-बार शादी करने के दबाव से परेशान पद्मेश और उसकी पत्नी प्रगति ने उसको रास्ते से हटाने का जो प्लान रचा उसमें नामवर सिंह एक मोहरे की तरह था. दरअसल प्लानिंग थी कि रुचि को मुलाकात के लिए पद्मेश कॉल कर बुलाएंगे जरूर, लेकिन नशे की हालत में उसकी हत्या और लाश को फेंकने का काम नामवर करेगा.

नामवर ने ही अनार के जूस में गोलियां मिलाई थीं

ऐसे में अगर हत्या के मामले में कोई पकड़ा भी जाएगा तो वह नामवर होगा. 12 फरवरी की शाम पद्मेश ने रुचि को फोन कर मुलाकात के लिए पीजीआई इलाके में बुलाया. जिस गाड़ी में रुचि और पद्मेश बैठे थे, वह नामवर की थी. नामवर ने ही पीजीआई में एक जूस कॉर्नर से अनार का जूस में अल्प्रेक्स की 10 गोलियां मिलाकर रुचि को दी. 

नामवर की एक गलती से फंस गई तहसीलदार की पत्नी

जब रुचि बेहोश हो गई तो हत्या के बाद नामवर अपनी कार से रुचि की लाश नाले में फेंक आया, लेकिन नामवर की एक चूक ने इस हत्याकांड में तहसीलदार की पत्नी प्रगति श्रीवास्तव को भी आरोपी बना लिया. नामवर ने घटनास्थल से जब रुचि का फोन स्विच ऑफ किया तो वहीं से प्रगति को फोन कर बताया काम हो गया है.

Advertisement

पुलिस की जांच में अंतिम बार रुचि की तहसीलदार से की गई बात और फिर जिस जगह और जिस वक्त पर रुचि का मोबाइल बंद हुआ, ठीक वहीं से तहसीलदार की पत्नी के नंबर पर एक कॉल ने इस पूरी साजिश की तीनों कड़ियों को जोड़ दिया और तीनों आरोपी पुलिस के शिकंजे में फंस गए.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement