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नरेंद्र गिरि केस में गिरफ्तार आनंद गिरि पर एक और महंत ने लगाए सनसनीखेज आरोप, बताया हिस्ट्रीशीटर

महंत नरेंद्र गिरि की मौत मामले में गिरफ्तार किए गए आनंद गिरि पर एक और महंत ने गंभीर आरोप लगाए हैं. ब्रह्मचारी कुटि के एक महंत का आरोप है कि लॉकडाउन के वक्त आनंद गिरि ने उनकी कुटि पर कब्जा करने की कोशिश की थी.

आनंद गिरि को लेकर एक और खुलासा (फाइल फोटो) आनंद गिरि को लेकर एक और खुलासा (फाइल फोटो)
श्रेया चटर्जी
  • नोएडा,
  • 21 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 6:13 PM IST
  • महंत नरेंद्र गिरि की मौत मामले में जांच जारी
  • आनंद गिरि को लेकर एक और नया खुलासा

Narendra Giri Suicide Case: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत पर सवाल खड़े हो रहे हैं. अपने सुसाइड नोट में नरेंद्र गिरि ने जिस आनंद गिरि पर सवाल खड़े किए थे, उसे उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) ने गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन अब एक और महंत ने इस आनंद गिरि पर गंभीर आरोप लगाए हैं. 

उत्तर प्रदेश के नोएडा (Noida) में ब्रह्मचारी कुटि के स्वामी ओम भारती ने आनंद गिरि को लेकर खुलासा किया है. स्वामी ओम भारती ने आजतक को बताया कि आनंद गिरि (Anand Giri) एक हिस्ट्रीशीटर है, लॉकडाउन के दौरान उसने नोएडा की सेक्टर 82 में मौजूद ब्रह्मचारी कुटि पर कब्जा करने की कोशिश की थी. 

स्वामी ओम भारती के मुताबिक, तब आनंद गिरि ने खुद को प्रथम महंत बताया था. उन्होंने इस मामले में एफआईआर कराने की कोशिश की थी, लेकिन किसी ने एफआईआर दर्ज नहीं की थी. इसके बाद स्वामी ओम भारती ने अखाड़ा परिषद के महंत नरेंद्र गिरि से संपर्क किया था और तब जाकर आनंद गिरि ने अपना दावा वापस लिया था. 

सुसाइड नोट में था आनंद गिरि का नाम

गौरतलब है कि महंत नरेंद्र गिरि (Narendra Giri) के कमरे से जो सुसाइड नोट मिला है, उसमें आनंद गिरि का नाम था. आनंद गिरि पर नरेंद्र गिरि ने मानसिक तौर पर पीड़ित करने के आरोप लगाए थे. इसी आधार पर पुलिस ने आनंद गिरि को पहले हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया. 

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इतना ही नहीं अब नरेंद्र गिरि और आनंद गिरि के बीच मई महीने में हुए एक समझौते के तीन चश्मदीदों से भी यूपी पुलिस पूछताछ करने की तैयारी में है. इस मुलाकात में दो नेता और एक अफसर मौजूद थे. 

हालांकि, हिरासत में आने से पहले आनंद गिरि ने महंत नरेंद्र गिरि को मौत को आत्महत्या की बजाय हत्या करार दिया था. आनंद गिरि का आरोप था कि संपत्ति विवाद को लेकर ये सब किया जा सकता है, जिसकी जांच की जानी जरूरी है. 


 

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