
महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में भवन निर्माण से जुड़ा सामान सप्लाई करने वाले दो सप्लायर से रिश्वत मांगे जाने का मामला सामने आया है. इस सिलसिले में एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में दो राजस्व अधिकारियों और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.
दरअसल, 4 मई को राजस्व कर्मियों ने सप्लायर्स के दो रेत से भरे टिपरों को पकड़ लिया था. फिर दोनों वाहनों को गोरेगांव तहसील कार्यालय ले जाया गया. इसके बाद उन अधिकारियों ने दोनों सप्लायर्स को 1,23,883 रुपये का जुर्माना जमा करने के लिए कहा.
एसीबी (ACB) के एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए पीटीआई को बताया कि दोनों टिप्पर दो-दो पीतल की रेत ले जा रहे थे, लेकिन राजस्व अधिकारियों ने क्षतिपूर्ति बांड तैयार करते समय वाहनों को एक-एक पीतल रेत ले जाने वाले ट्रैक्टर के रूप में उल्लेख किया था.
एसीबी के अफसर ने आगे बताया कि दोनों सप्लायर 6 मई को जुर्माना राशि बैंक में जमा कर चुके थे और रसीद तहसील कार्यालय में जमा कर दी थी, लेकिन इसके बावजूद उनके वाहन उन्हें नहीं सौंपे गए. फिर उनके एक दोस्त ने उन्हें बताया कि अपने वाहन वापस लेने और रेत परिवहन जारी रखने के लिए, उन्हें एक राजस्व अधिकारी को रिश्वत के तौर 50,000 रुपये देने होंगे, जो चाहता था कि पैसा उसकी ओर से एक कंप्यूटर ऑपरेटर को सौंप दिया जाए.
इसके बाद दोनों सप्लायर परेशान होकर एसीबी के दफ्तर पहुंचे और वहां शिकायत दर्ज कराई. ब्यूरो के एक अफसर ने बताया कि एसीबी ने पहले शिकायत का सत्यापन किया और फिर गोरेगांव पुलिस ने दो राजस्व अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया.
एसीबी ने कहा कि साल 2017 में भी आरोपी राजस्व अधिकारियों में से एक के खिलाफ 10 लाख रुपये की रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया गया था.