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नवंबर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे 10 कुकी-जो युवक, अब हुआ अंतिम संस्कार

मणिपुर पुलिस ने दावा किया था कि 11 नवंबर को जिरीबाम जिले के जाकुरधोर में बोरोबेकरा पुलिस स्टेशन और उससे सटे सीआरपीएफ कैंप पर सशस्त्र विद्रोहियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी. इसके बाद सुरक्षा बलों के साथ भीषण मुठभेड़ में 10 संदिग्ध उग्रवादी मारे गए थे.

मणिपुर पुलिस ने बताया था कि 11 नवंबर को 10 उग्रवादी मुठभेड़ में मारे गए थे (फोटो- PTI) मणिपुर पुलिस ने बताया था कि 11 नवंबर को 10 उग्रवादी मुठभेड़ में मारे गए थे (फोटो- PTI)
aajtak.in
  • चुराचांदपुर,
  • 05 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 7:32 PM IST

मणिपुर के जिरीबाम कस्बे में 11 नवंबर को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए 10 कुकी-जो युवकों का गुरुवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया. अहम बात ये है कि चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड में आयोजित अंतिम संस्कार कार्यक्रम से पहले गांव के स्वयंसेवकों ने मृतकों को बंदूक की सलामी दी. इसके बाद शोकसभा का आयोजन किया गया. मणिपुर पुलिस ने इन युवकों को उग्रवादी बताया था.

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मणिपुर में कुकी-जो समुदाय के एक प्रमुख संगठन, स्वदेशी आदिवासी नेता मंच (आईटीएलएफ) ने इससे पहले एक शोक कार्यक्रम भी आयोजित किया. मृतकों के परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों ने एनकाउंटर में मारे 10 युवकों को पुष्पांजलि भी अर्पित की.

अंतिम संस्कार में मिजोरम के विधायक गिंजालाला और पड़ोसी राज्य के कई अन्य लोग शामिल हुए. विधायक गिंजालाला मुख्यमंत्री लालदुहोमा के सलाहकार (तकनीकी) भी हैं. 

मणिपुर पुलिस ने दावा किया था कि 11 नवंबर को जिरीबाम जिले के जाकुरधोर में बोरोबेकरा पुलिस स्टेशन और उससे सटे सीआरपीएफ कैंप पर सशस्त्र विद्रोहियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी. इसके बाद सुरक्षा बलों के साथ भीषण मुठभेड़ में 10 संदिग्ध उग्रवादी मारे गए थे.

उग्रवादियों पर उसी दिन छह लोगों का अपहरण करने और उनकी हत्या करने का भी आरोप था. जिनमें तीन महिलाएं और तीन बच्चे शामिल थे. पिछले साल मई से मैतेई और कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं.

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16 नवंबर को 10 कुकी-जो युवकों के शवों को असम के सिलचर शहर से चुराचांदपुर ले जाया गया, जहां शवों का पोस्टमार्टम किया गया और शवगृह में रखा गया. शवों को बुधवार को संबंधित परिवारों को भेज दिया गया था.

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